'देव डी' से अपने
फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाली कल्कि कोक्लिन अक्सर
सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय बेझिझक रखती आई हैं। हालांकि उनका मानना है की देश को बनाने की बड़ी जिम्मेदारी अभिनेताओं पर नहीं है। बीबीसी से रूबरू हुई कल्कि ने अभिनेताओं की सामाजिक जिम्मेदारी पर टिप्पणी करते हुए कहा, "हम कलाकार है कोई राजनीतिक विशेषज्ञ नहीं। समाज में हो रही सभी घटनाओं की जानकारी हमें हो यह जरूरी नहीं, जब तक कि हम उस विषय पर फिल्म ना बना रहे हों। अभिनय करना हमारी जिम्मेदारी है और बाकी सभी चीजों की और देश की जिम्मेदारी हम पर नहीं है।" इतना ही नहीं कल्कि ने एक्टर्स को मिलने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ भारत में गर्भवती महिलाओं की स्थिति के बारे में भी अहम बात की।
राष्ट्रीय पुरस्कार से काम नहीं मिलने लगता
अपने 8 साल के फिल्मी करियर में कल्कि कोक्लिन 'जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा', 'ये जवानी है दीवानी' और 'शंघाई जैसी फिल्मों का हिस्सा रही हैं। 2014 में आई फिल्म 'मार्ग्ररिटा विथ अ स्ट्रॉ' फिल्म के लिए कल्कि को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला लेकिन कल्कि का मानना है कि राष्ट्रीय पुरस्कार से खुशी मिलती है काम नहीं मिलता। वो कहती हैं, "लोगों को लगता है राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद हमें बहुत काम मिलने लगता है, पर ऐसा नहीं होता। राष्ट्रीय पुरस्कार मेरे लिए बहुत खास है। बतौर अभिनेता मैं इससे बहुत खुश हूँ, पर काम मिलना भी बड़ा ईनाम है। अवॉर्ड तो बोनस की तरह होते हैं।"
"रिबन" में कामकाजी महिला का किरदार
अपरंपरागत अभिनेत्रियों की श्रेणी में गिनी जाने वाली कल्कि अपनी आने वाली फिल्म "रिबन" में एक ऐसी शादीशुदा कामकाजी महिला का किरदार निभा रही हैं, जो गर्भवती होने के कारण अपने कार्यस्थल में मुश्किलों का सामना करती हैं। कल्कि का मानना है की भारत कामकाजी गर्भवती महिला के प्रति दयालु नहीं है। कॉर्पोरेट जगत में काम कर रही गर्भवती महिलाओं को मैटरनिटी लीव तो मिल जाती है पर दोबारा ऑफिस लौटने के बाद उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस कारण वो अक्सर प्रेरणाहीन महसूस करती हैं। राखी शांडिल्य द्वारा निर्देशित "रिबन" में कल्कि केकलां के साथ सुमित व्यास भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। ये फिल्म 3 नवंबर को रिलीज होने वाली है।