केंद्र सरकार ने देश में ओटीटी पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों के नियमन के लिए नियम जल्द ही जारी करने की बात कही है। ओटीटी पर सामग्री पर अंकुश लगाए जाने के समर्थन में भी तमाम लोग हैं लेकिन फिल्मी सितारे आमतौर पर इसका विरोध ही कर रहे हैं। देखते हैं ओटीटी की चर्चित अभिनेत्री कीर्ति कुल्हरी इस बारे में क्या कहती हैं।
कहानियों के बदले किरदारों पर बोलीं कीर्ति कुल्हरी, ओटीटी पर दिखने वाली लड़कियां आसमान से नहीं आई हैं
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भारत में ओटीटी के चलन के बाद फिल्मों और वेब सीरीजों में गाली-गलौज का चलन बहुत बढ़ गया है। चूंकि वहां भारतीय फिल्म सेंसर बोर्ड की नहीं चलती है, इसलिए निर्माता और निर्देशक अपनी भरपूर मनमानी करते हैं। अपनी भावनाओं को जाहिर करने के लिए अनावश्यक तौर पर गालियों का इस्तेमाल किया जाना एक फैशन सा बन गया है। हिंदी सिनेमा की युवा अभिनेत्री कीर्ति कुल्हरी का इस पर मत है कि अपनी भावनाओं को जाहिर करने के लिए जैसा पहले फिल्मों में होता था उन्हें वह भी तरीका पसंद था। और, जिस तरह से आज की फिल्मों और वेब सीरीजों में दिखाया जाता है, उन्हें वह तरीका भी पसंद है। वह कहती हैं, ‘जितनी घटनाएं भारत में बंद दरवाजों में, शहरों में, समाज में, गली-कूचों में होती हैं, उसकी तुलना में तो हम कुछ नहीं दिखाते। अगर हम पूरी सच्चाई को दिखाने लग जाएं तो लोग उसे बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।’
कीर्ति का मानना है कि अगर फिल्मों में कुछ भी न दिखाया जाए, फिर भी लोगों के पास पहले से ही आसपास के माहौल के बारे में पूरी जानकारी मौजूद है। वह कहती हैं, ‘अगर आज के समय में भी हम पप्पी के नाम पर दो फूलों की गुलू-गुलू दिखाएंगे तो लोग कहेंगे कि क्या मजाक है। आखिर कब तक हम कड़वी सच्चाई को मीठी गोली की तरह परोसते रहेंगे। यह वक्त लोगों तक सच्चाई पहुंचाने का है। अगर हम उनकी सोच नहीं बदल सकते, तो कम से कम उनको सच्चाई तो दिखा ही सकते हैं।’
अभिनेत्री कीर्ति कुल्हरी ने ओटीटी पर खूब काम किया है और सिनेमा व ओटीटी के बीच पुल का काम किया है। वह कहती हैं, ‘हमारा समाज बहुत बदल चुका है। मेरी वेब सीरीज ‘फोर मोर शॉट्स प्लीज’ में जो लड़कियां खाई गई हैं, वे ठीक वैसी ही हैं, जैसी हमारे समाज में होती हैं। ओटीटी पर दिखने वाली ये लड़कियां कहीं किसी आसमान से नहीं आई हैं। ये वही महिलाएं है जो अपने करियर को खुद चुनती हैं। अपनी जिंदगी खुद अपनी शर्तों पर जीने का फैसला करती हैं। ऐसा जहां नहीं है वहां भी होना चाहिए। अब नहीं बनेंगे तो कब बनेंगे। यही तो सही समय है। बहुत जरूरी है कि लोगों को ऐसी दुनिया दिखाई जाए, जो अस्तित्व रखती है। जो इन लड़कियों की दुनिया है वो कल्पना नहीं है। वह एक सच्चाई है। और हम इससे मुंह नहीं मोड़ सकते। उन्हें भी अपनी मर्जी का करने का हक है। मुझे बड़ी खुशी होती है जब मैं इस तरह की कोई भी फिल्म या वेब सीरीज को देखती हूं।’
लगभग इसी कलेवर में रंगी साल 2018 में आई करीना कपूर की फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग’ कीर्ति को पसंद नहीं आई। इसके बारे में वह कहती हैं, ‘मैं जब ‘वीरे दी वेडिंग’ फिल्म देखने गई तो थिएटर हाउसफुल था। हालांकि मुझे फिल्म इतनी पसंद नहीं आई थी। लेकिन मैंने वहां दो चीजें देखीं। एक तो ये कि कुछ लड़कियां उस फिल्म को खुद से जोड़कर देख रहीं थीं। दूसरी ये कि कुछ लड़कियां उनके जैसा बनना चाहती थीं। अब उसका रास्ता वो कैसे चुनती हैं, ये खुद उन्हें ही तय करना है। हम उनकी लड़ाई नहीं लड़ सकते। ये सबकी व्यक्तिगत लड़ाई है।’