हिंदी, मराठी और भोजपुरी सिनेमा का गढ़ माने जाने वाले शहर मुंबई के फिल्म स्टूडियोज के बनने बिगड़ने की कहानी किसी फिल्म की तरह ही दिलचस्प है। प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'जुबली' की कहानी बॉम्बे टॉकीज के उत्थान और पतन की कहानी है। मुंबई जब बंबई था, उस दौर में बने फिल्म स्टूडियोज के बारे में हम आपको सिलसिलेवार तरीके से बता रहे हैं। पिछली दो कड़ियों में आपने जानी कहानी बॉम्बे टाकीज और फिल्मिस्तान स्टूडियो की। आज बारी फिल्मालय स्टूडियो की।
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फिल्मालय स्टूडियो वाया फिल्मिस्तान
फिल्मालय स्टूडियो के संस्थापक सशधर मुखर्जी भी पहले बॉम्बे टॉकीज से जुड़े रहे। साल 1940 में हिमांशु राय की मृत्यु के बाद सशधर मुखर्जी ने साल 1943 में में अशोक कुमार, ज्ञान मुखर्जी और संगीतकार के मदन मोहन के पिता रायबहादुर चुन्नीलाल के साथ साझेदारी में गोरेगांव में फिल्मिस्तान स्टूडियो की शुरुआत की। फिल्मिस्तान स्टूडियो में उन्होंने देव आनंद को लेकर 'मुनीम जी' और 'पेइंग गेस्ट' का निर्माण किया। इन दोनो फिल्मों का निर्देशन उनके छोटे भाई सुबोध मुखर्जी ने किया। फिल्मिस्तान में ही सशधर मुखर्जी ने शम्मी कपूर को लेकर फिल्म 'तुमसा नहीं देखा' का निर्माण किया जिसे नासिर हुसैन ने निर्देशित किया था। फिर, साल 1950 में सशधर मुखर्जी ने फिल्मिस्तान स्टूडियो से अलग होकर अंधेरी पश्चिम में फिल्मालय स्टूडियो की स्थापना की।
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सशधर मुखर्जी का वंशवृक्ष
अंधेरी रेलवे स्टेशन से निकलकर एसवी रोड पर आने के बाद दाहिनी तरफ करीब एक किमी चलने के बाद अंबोली की तरफ जो रास्ता बाईं तरफ मुड़ता है, उसी रास्ते पर थोड़ी दूर चलकर आता है फिल्मालय स्टूडियो। इस स्टूडियो के तहत सशधर मुखर्जी ने 'दिल देके देखो', 'लव इन शिमला', 'एक मुसाफिर एक हसीना' और 'लीडर' जैसी कई सफल फिल्मों का निर्माण किया। झांसी के रहने वाले सशधर मुखर्जी चार भाई थे, उनके बड़े रविंद्र मोहन मुखर्जी का फिल्म उद्योग से बहुत कम संपर्क था। रानी मुखर्जी उनको पोती हैं। सशधर मुखर्जी के छोटे भाई फिल्म निर्देशक सुबोध मुखर्जी और फिल्म निर्माता प्रबोध मुखर्जी थे। सशधर मुखर्जी के चार बेटे हुए, जॉय मुखर्जी, देब मुखर्जी, शोमू मुखर्जी और शुबीर मुखर्जी थे। देब मुखर्जी की दूसरी पत्नी के बेटे अयान मुखर्जी हैं। अभिनेत्री काजोल के पिता शोमू थे।
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बिखर गया सशधर का साम्राज्य
एक जमाने में फिल्मालय स्टूडियो में खूब रौनक हुआ करती थी। इस स्टूडियो से बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं जिसे हम आगे शेयर करेंगे। इससे पहले हम फिल्मालय स्टूडियो की आज की दशा के बारे में बता दें। इस स्टूडियो के एक तिहाई भाग पर गगनचुंबी इमारत बन चुकी है और स्टूडियो के एक हिस्से में स्टूडियो का बस एक फ्लोर बचा हुआ है जहां पर शूटिंग होती रहती है। इसके अलावा बिल्डिंग के बेसमेंट और तीसरे मंजिल पर शूटिंग का एक फ्लोर है। ग्राउंड फ्लोर में मेकअप रूम और पहली मंजिल पर स्टूडियो का ऑफिस और मेकअप रूम हैं।
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राजा मेहंदी हसन और उषा खन्ना का डेब्यू
फिल्मालय स्टूडियो के बैनर तले सशधर मुखर्जी ने कई यादगार फिल्में बनाईं। वह एक ही नजर में किसी भी कलाकार की प्रतिभा का आकलन करके उसे सही मार्ग दर्शन भी देते थे। मशहूर गीतकार, कवि और लेखक राजा मेहंदी हसन फिल्मों में हीरो बनने आए थे, लेकिन सशधर मुखर्जी ने उन्हें गीतकार बनने की सलाह दी और गीतकार के रूप में राजा मेहंदी हसन ने फिल्मिस्तान स्टूडियो की फिल्मों 'दो भाई' और 'शहीद' से अपने करियर की शुरुआत की। मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर उषा खन्ना भी सिंगर बनने आई थी, लेकिन सशधर मुखर्जी ने ही उन्हें संगीतकार बनने का सुझाव दिया और पहला मौका भी दिया फिल्म 'दिल देके देखो' में।
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