मुंबई के उपनगर जोगेश्वरी पूर्व में जोगेश्वरी मुलुंड लिंक पर स्थित कमालिस्तान स्टूडियो एक जमाने में सिनेमा जगत की मशहूर हस्तियों का सबसे लकी स्टूडियो हुआ करता था। यहां पर जितनी भी फिल्मों की शूटिंग हुई है, उनमें से ज्यादातर फिल्में सुपरहिट रही है। लेकिन आज की तारीख में इस स्टूडियो का ऐसा हाल हो गया है कि अब इसका नामोनिशान तक मिट चुका है। अभी भी कुछ लोग इस जगह को एक स्टूडियो के नाम से जानते हैं, लेकिन वह दिन दूर नहीं जब यह स्टूडियो भी बॉम्बे टाकीज की तरह से पूरी तरह से भुला दिया जाएगा। कमालिस्तान स्टूडियो की जगह पर अब भव्य आईटी पार्क का निर्माण शुरू हो गया है। ‘अमर उजाला’ की टीम ने जब कमालिस्तान स्टूडियो का दौरा किया तो देखा अब यह स्टूडियो मलबे में तब्दील हो चुका है।
Studios Of Bombay 6: मिट गई मीना कुमारी और कमाल अमरोही की मोहब्बत की आखिरी निशानी, कमालिस्तान अब नहीं रहा
मीना कुमारी और कमाल अमरोही की मोहब्बत की आखिरी निशानी मिट गई है। कमालिस्तान स्टूडियो अब मलबे में तब्दील हो चुका है।
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कमाल अमरोही ने अपने कैरियर की शुरुआत बतौर लेखक सोहराब मोदी की फिल्म 'जेलर' से की। यह फिल्म साल 1938 में रिलीज हुई थी। 'जेलर' के बाद 'पुकार', 'भरोसा', 'पागल' और 'शहजादा' जैसी फिल्में लिखने के बाद कमाल अमरोही को बॉम्बे टाकीज की फिल्म 'महल' निर्देशित करने का मौका मिला। इस फिल्म में अशोक कुमार और मधुबाला की मुख्य भूमिका थी। उस जमाने में यह फिल्म बॉम्बे स्टूडियो की सबसे महंगी फिल्म थी। कमाल अमरोही ने साल 1958 में कमालिस्तान स्टुडिओ की स्थापना की जो 15 एकड़ में फैला हुआ था।
कमाल अमरोही ने अपने इसी स्टूडियो में उन्होंने 'पाकीजा' जैसी फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया। 4 फरवरी 1972 को रिलीज हुई इस फिल्म के रिलीज के दो महीने के अंदर ही 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी की मृत्यु हो गई। कमलिस्तान स्टूडियो में अमिताभ बच्चन की कई सुपर हिट फिल्मों की शूटिंग हुई है,जिसमें 'अमर अकबर एंथोनी', 'कालिया', 'धर्मवीर', 'कुली' जैसी कई हिट फिल्में शामिल है। 'रजिया सुल्तान' की शूटिंग के लिए तो यहां पर एक बड़ा सा गार्डन बनाया गया था। तब से लेकर वह गार्डन अभी तक वहां पर रहा, जिसमे कई फिल्मों के गाने की शूटिंग हो चुकी है। उन दिनों कमलिस्तान ही एक ऐसा स्टूडियो था जहां पर लोग रेलवे स्टेशन की शूटिंग करने जाया करते थे। हैदराबाद के रामोजी राव स्टूडियो से पहले मुंबई में जितनी भी फिल्मों की शूटिंग में रेलवे स्टेशन दिखाया गया है, वह कमालिस्तान स्टूडियो का ही रेलवे स्टेशन रहता है।
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कमालिस्तान स्टूडियो को ऐसा बनाया गया था कि आप अपनी पूरी फिल्म की शूटिंग इस स्टूडियो में पूरी कर सकते थे। रेलवे स्टेशन के अलावा पुलिस स्टेशन, हॉस्पिटल, गांव का सेट, कस्बा सब कुछ इस स्टूडियो में मौजूद था। पिछले 61 साल में कमालिस्तान स्टूडियो में हिंदी, भोजपुरी और अन्य भाषाओं की तमाम फिल्मों की शूटिंग हुई । महेश भट्ट और सुभाष घई जैसे निर्माता -निर्देशक के लिए कमालिस्तान स्टूडियो लकी जगह होता था। अपनी हर फिल्म की शूटिंग तो ये लोग करते ही थे। बताते हैं कि स्टूडियो साल 2010 में ही बिक चुका था, लेकिन यहां पर साल 2019 तक शूटिंग चलती रहती। कोरोना महामारी के दौरान अक्षय कुमार ने कोरोना के प्रति जागरूक करने वाला विज्ञापन इसी स्टूडियो में शूट किया था।
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कोरोना के बाद से इस स्टूडियो का अब नामोनिशान तक मिट गया और यहां पर आईटी पार्क का निर्माण कार्य शुरू हो गया। कमालिस्तान स्टूडियो के नाम से पहले जो बोर्ड था, अब उसे भी हटा दिया गया। कमलिस्तान स्टूडियो के गेट पर कुछ पुराने सुरक्षाकर्मी मिले बातचीत का जब सिलसिला शुरू हुआ तो उन्होंने बताया, 'कोरोना महामारी के बाद से अब यहां शूटिंग नहीं होती होती है। यह स्टूडियो तो कब का बिक चुका है।' बोर्ड की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, 'वो देखिए, वो कंपनी वालों ने ये जगह खरीद ली है। अब वह लोग यहां कुछ बनाने वाले हैं।'
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