"काम पर हूं, सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक केबीसी। अब यहां हूं रिकॉर्डिंग पर, आधी रात के भी बाद तक। बिना मेहनत के जीवन में कुछ मिलता नहीं। बाबूजी कहते थे, जब तक जीवन है, तब तक संघर्ष है।" सुपर स्टार अमिताभ बच्चन ने ये बात अपने 78वें जन्मदिन से ठीक एक दिन पहले ट्वीट करके कही है। आज 11 अक्तूबर को अमिताभ बच्चन 78 बरस के हो गए हैं, अपनी इस उम्र में भी अमिताभ कितने सक्रिय, कितने मेहनती और कितने समर्पित हैं, इस बात की मिसालों की कमी नहीं है। आज भी वे जिस उत्साह और जिस ऊर्जा के साथ लगातार कई-कई घंटे बिना थके काम कर रहे हैं, उसकी कोई और मिसाल ढूंढे नहीं मिलती।
78 साल के हुए अमिताभ बच्चन, आज भी बरकरार है 'बुड्ढा होगा तेरा बाप' वाला तेवर
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सही अर्थों में काम के मामले में अमिताभ किसी भी युवा से कम नहीं, सच तो यह है कि आज वह अपने सभी समकालीन अभिनेताओं को तो मात देते ही हैं साथ ही उनसे कम उम्र के भी अधिकतर अभिनेता उनके सामने नहीं ठहरते। फिल्म संसार में एक से एक उम्रदराज और एक से एक शानदार अभिनेता हुए हैं। काम के प्रति भी बहुत से अभिनेताओं की लगन, निष्ठा और समर्पण भावना गजब की रही है लेकिन बढ़ती उम्र के आगे ज्यादातर अभिनेता निढाल हो गए। जबकि कुछ तो अपनी कई गौरवशाली उपलब्धियों के बावजूद स्वास्थ्य के चलते या किन्हीं और कारणों से अपनी कम उम्र में ही पिछड़ गए। सिने इतिहास के सौ साल से भी लंबे दौर में काफी पीछे जाने पर भी अमिताभ बच्चन जैसा कोई और अभिनेता नहीं दिखता, जो इतनी उम्र में लगातार दिन रात काम करता रहा हो। मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्मों के साथ टीवी शो, विज्ञापन यहां तक सामाजिक कार्यों में भी रात-दिन लगा हो।
अमिताभ बच्चन को फिल्मों में काम करते हुए 51 बरस हो गए हैं, काम के प्रति जबर्दस्त समर्पण का मैं भी पिछले चार दशकों से साक्षी रहा हूं। अमिताभ से जब उनके दिल्ली स्थित घर पर मेरी पहली मुलाक़ात हुई थी तब अमिताभ की उम्र सिर्फ 35 साल थी, तब भी वह अपने काम के प्रति इतने बेचैन रहते थे, जितने आज हैं। अमिताभ बच्चन को लेकर बहुत से कलाकार अक्सर ये कहते सुने जाते हैं-''अमिताभ बच्चन जैसा भाग्य सबका नहीं हो सकता। उनके लिए आज भी खास तौर से फिल्में लिखी जाती हैं। आज भी उनके पास काम की कमी नहीं है। लेकिन यह सौभाग्य हमको नहीं मिल सका।'' यह बात ठीक है कि अमिताभ बच्चन को इस उम्र में जो लोकप्रियता, जो सफलता और जो नित उपलब्धियां मिल रही हैं वह अन्य कई दिग्गज कलाकारों को नहीं मिलीं। इस सबमें अमिताभ बच्चन के भाग्य की भी कुछ भूमिका हो सकती है लेकिन जहां तक मैं समझता हूं भाग्य से ज्यादा उनका अनुशासन और काम के प्रति उनका शत प्रतिशत समर्पण उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है।
अमिताभ आज से नहीं, शुरू से ही इतने अनुशासित और समय के पाबंद हैं। उनके लिए 9 बजे का मतलब ठीक 9 बजे है। बहुत लोग बरसों पहले भी कहते थे कि अमिताभ समय के इतने पक्के हैं कि उनके सेट पर पहुंचने के टाइम से घड़ियां मिलाई जा सकती हैं। अमिताभ के अलावा ये मिसाल किसी और के लिए दी जाती थी, तो वह थे प्राण। यहां यह भी दिलचस्प है कि प्राण और अमिताभ ने जंजीर, कसौटी, डॉन, नसीब और शराबी सहित करीब दर्जन भर फिल्म में साथ काम किया है। जहां कई बार ऐसा होता था कि ये दोनों कलाकार शूटिंग के निर्धारित समय पर सबसे पहले सेट पर पहुंच जाते थे जबकि बाकी लोग देर से आते थे। अमिताभ बच्चन की जिंदगी की बड़ी बात यह भी है कि वह बरसों से कई रोगों से पीड़ित हैं। यहां तक कि अमिताभ बच्चन का लिवर भी अब सिर्फ 25 प्रतिशत ही काम करता है। इसके बावजूद उन्होंने कभी अपने रोगों के सामने न हिम्मत हारी और न ही काम के सामने बीमारी को आड़े आने दिया।
अमिताभ को स्वास्थ्य को लेकर चाहे कितनी भी दिक्कत हो लेकिन जब उनकी शूटिंग होती है या उन्हें किसी अन्य निर्धारित कार्यक्रम में जाना होता है तो वह अपनी बीमारी को घर छोड़कर जाते हैं। कभी ऐसा नहीं होता कि वह सेट पर यह कहकर देर से पहुंचे कि आज उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी। यह भी किसी को समझ नहीं आता कि सभी लोग मुंबई के ट्रैफिक में फंसने की बात कहकर आए दिन देरी से पहुंचते हैं लेकिन अमिताभ बच्चन भी उसी मुंबई का हिस्सा होकर कभी ट्रैफिक में क्यों नहीं फंसे। जुलाई में जब अमिताभ बच्चन, अभिषेक, ऐश्वर्या और आराध्या कोरोना संक्रमित हो गए थे तो लगा कि अमिताभ के अस्पताल में दाखिल होने के बाद अब केबीसी का 12वां सीजन समय से शुरू नहीं हो पाएगा लेकिन अमिताभ ने अस्पताल से छुट्टी होने के कुछ दिन बाद ही, जब केबीसी की शूटिंग शुरू कर दी तो सभी के लिए यह हैरानी की बात थी।