हाल ही में नवाजुद्दीन सिद्दीकी की किताब 'एन ऑर्डिनरी लाइफ' रिलीज हुई है। नवाज ने अपनी किताब में जो खुलासे किए उससे कई लोगों का दिल दुखा है। अभी तक तो एक्ट्रेस निहारिका सिंह ही नवाज से नाराज थीं। अब थिएटर आर्टिस्ट सुनीता राजवार ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए नवाज को खरी-खोटी सुनाई है।
नवाज का पहला प्यार थी 4 साल बड़ी ये एक्ट्रेस, अब हीरोइन बोली- 'मुझे तुमसे घिन आती है'
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नवाज ने अपनी किताब में सुनीता का जिक्र करते हुए लिखा है कि वो उनका पहला प्यार थीं। लेकिन गरीबी के कारण सुनीता ने उन्हें छोड़ दिया। जब ये किताब सुनीता ने पढ़ी तो उन्हें इसमें झूठ के सिवाय कुछ ना मिला। तब सुनीता ने नवाज के खिलाफ एक लंबा-चौड़ा पोस्ट डाला।
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नवाज ने लिखा था कि बेरोजगारी की वजह से जब उनका ब्रेकअप हुआ, उस वक्त वो सुसाइड तक की सोचने लगे थे। इन झूठी बातों से नाराज सुनीता ने लिखा कि नवाज मुझे तुमसे घिन आती है। तुम्हें औरतों की इज्जत करनी नहीं आती। अगली स्लाइड में आप सुनीता का वो लंबा-चौड़ा पोस्ट देख सकते हैं।
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सुनीता ने पोस्ट में लिखा-
कहते हैं नसीब वक्त बदल सकता है, इंसान की फितरत नहीं। नवाज की किताब पढ़कर कुछ ऐसा ही लगा और यकायक ‘मेलाराम वफा’ का एक शेर याद आ गया, “एक बार उसने मुझको देखा था मुस्कुराकर, इतनी सी हकीकत है बाकी कहानियां हैं”। क्योंकि इस बायोग्राफी में काफी हद तक सिर्फ छपाई है, सच्चाई नहीं, कई बातें नवाज ने अपने मन से, अपने हिसाब से और अपने हक में लिखी हैं, चित भी मेरी पट भी मेरी टाइप्स। उन्होंने बड़ी ही खूबसूरती से खुद को बुरा भी कह दिया है और उतनी ही खूबसूरती से अपनी बुराई का सारा ठीकरा औरतों पर फोड़ दिया है। खासकर मुझ पर, क्योंकि उनकी मानें तो मेरे बाद उनका प्यार से और औरतों से विश्वास ही उठ गया था और उनके सारे इमोशन्स RIP यानी रेस्ट इन पीस हो गये थे।
बहरहाल, उनकी बायोग्राफी में जहां तक मेरा सवाल है तो उनके झूठ का फलसफा वहीं से शुरू हो जाता है, जहां से मेरा जिक्र, यानी शुरुआत की पहली दो लाइन से ही, जहां नवाज कह रहे हैं कि वो मुझे एनएसडी में कभी नही मिले। NSD में वो मेरे एक साल सीनियर थे तो जाहिर है मुलाकात तो होती होगी। हां उस वक्त हमारे बीच कुछ था नहीं, लेकिन ये कहना कि कभी मिले ही नहीं, ये अटपटा सा जरूर लगता है।
फिर उन्होंने कहा कि मैं उनके घर की दीवारों में आर्ट-वर्क करती थी, हमारे नाम उकेरा करती थी, दिल बनाया करती थी, जिनके बीच से होकर कभी-कभी तीर भी गुजरा करता था। ये पढ़कर ऐसा लगा मानो मैं उनसे मिलने नहीं, बल्कि उनकी आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स क्लास लेने जाती थी। हद तो तब हो गई जब उन्होंने रोमांटिक बॉलीवुड मूवी स्टाइल में लिख दिया कि हमारे ब्रेक-अप के बाद उन्होंने वाइट पेंट की बाल्टी ली और ब्रश से मेरे आर्ट-वर्क को दीवार से और मुझे दिल से मिटाते गए। अब सवाल ये उठता है कि जब मैंने कभी कोई आर्ट-वर्क बनाया ही नहीं था तो वो किसके आर्ट वर्क को मिटाने की बात कर रहे हैं?
चलो इन छोटी-छोटी बातों को नजर अंदाज भी किया जा सकता है, लेकिन असली खेल तो उन्होने वहां खेला जहां हमारे ब्रेक-अप की बात आई। नवाज हमेशा से Sympathy seeker रहे हैं, वो कोई एसी चीज़ नही छोड़ते जहां से सहानुभूती बटोरी जा सकती हो, कभी अपने रंग रूप को लेकर, कभी गरीबी को लेकर, कभी ये कहकर की वो वॉचमैन की नौकरी कर चुके हैं, जब की सच तो ये है कि उस वक्त उनका फैमली बैकग्राउंड मेरे फैमली बैकग्राउंड से अच्छा था। एक कामयाब आदमी को इतना इनसिक्योर देखकर कामयाबी से डर सा लगने लगता है कभी-कभी।