चार हजार गाने, 40 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामांकन और करीब चार दशकों तक सिनेमा पर संगीत का जादू बिखेरने वाले जादूगर आनंद आनंद बक्शी ने जो कलम से लिखा वो संगीत की दुनिया में सुनहरा इतिहास बनकर दर्ज हो गया। शमशाद बेगम, अलका याग्निक, मन्ना डे और कुमार सानू जैसे गायक आते- जाते रहे लेकिन शब्दों को संगीत में पिरोने वाले आनंद बक्शी हमेशा मैदान में खड़े रहे। आनंद आनंद बक्शी का जन्म 21 जुलाई साल 1930 में मौजूदा पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में हुआ था।
सदाबहार: 'दो दिल मिल रहे हैं' से लेकर 'मेरे नसीब में तू है कि नहीं...', सुनिए आनंद बक्शी के ये सुपरहिट गाने
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गीत : मेरे मेहबूब कयामत होगी
फिल्म : मिस्टर एक्स इन बॉम्बे (1964)
फिल्म मिस्टर एक्स इन बॉम्बे (1964) का लोकप्रिय गीत मेरे मेहबूब कयामत होगी... गीत के बोल आनंद आनंद बक्शी द्वारा लिखे गए हैं, म्यूजिक लक्ष्मीकांत और प्यारेलाल द्वारा और किशोर कुमार द्वारा गाए गए हैं।
फिल्म : मिलन (1967)
मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना सावन के महीने के बिना भी सावन जैसा सुहावना महसूस कराता है। इसकी वजह आनंद बक्शी के लिखे शानदार बोल ही हैं, जो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत के साथ बेहतरीन तालमेल बनाते हैं। इस गाने के लिए आनंद बक्शी को पहली बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।
गीत : हम तुम एक कमरे में बंद हों
फिल्म : बॉबी (1973)
इस गीत में दो प्रेमियों की दिली ख्वाहिश को सटीक शब्दों में पिरोने का काम आनंद बक्शी से बेहतर शायद ही कोई कर सके। डिंपल कपाड़िया और ऋषि कपूर पर फिल्माए इस गीत को शैलेन्द्र सिंह और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की प्रतिष्ठित जोड़ी के संगीत से सजे इस सदाबहार गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
गीत : ओम शांति ओम
फिल्म : कर्ज (1980)
नौजवानों को पुरजोर से गाने पर मजबूर कर देने वाला ये गाना उस समय का होने पर भी आज के समय जैसा लगता है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत से सजा ये गाना आज भी बहुत लोकप्रिय है। आनंद बक्शी के लिखे इस गीत को किशोर कुमार ने भी अपनी आवाज देकर रही बची कसर पूरी कर दी। इस गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर के लिए नामित किया गया।