सब्सक्राइब करें

Anand Bakshi Death Anniversary: वह गीतकार, जिसने शशि कपूर के डूबते करियर को बचाया और राजेश खन्ना को सुपरस्टार बनाया

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: मेघा चौधरी Updated Wed, 30 Mar 2022 08:41 AM IST
विज्ञापन
Anand Bakshi Death Anniversary: The lyricist who make Rajesh Khanna a superstar, know some unknown and interesting facts about Anand Bakshi
आनंद बक्शी - फोटो : अमर उजाला

जब दिल छू लेने वाले गाने सुनने का मन करे, तो सबसे पहले आनंद बक्शी के ही गाने याद आते हैं। आनंद बक्शी एक ऐसे गीतकार थे, जो आम सी परिस्थियों में से भी गीत खोज लाते और उसे इतने सरल अंदाज में पेश करते कि वह लोगों की जुबां पर चढ़ जाता। बक्शी ने लगभग चार दशकों तक अपने गानों से लोगों के दिलों पर राज किया। 21 जुलाई 1930 को रावलपिंडी, पाकिस्तान में जन्मे बक्शी का 30 मार्च 2002 को 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। आज आनंद बक्शी की पुण्यतिथि पर हम उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से आपको बताने जा रहे हैं।

Trending Videos
Anand Bakshi Death Anniversary: The lyricist who make Rajesh Khanna a superstar, know some unknown and interesting facts about Anand Bakshi
आनंद बक्शी - फोटो : सोशल मीडिया

सेना में करते थे नौकरी
आनंद बक्शी के पिता रावलपिंडी में बैंक मैनेजर थे और वह सेना में टेलीफोन ऑपरेटर की नौकरी करते थे। जब देश का बंटवारा हुआ तो, बक्शी अपने परिवार के साथ भारत आ गए। इसके बाद वह बंबई (मुंबई) अपने गीतकार बनने के सपने को पूरा करने के लिए पहुंचे, लेकिन जब मायानगरी में उनके सपनों ने उड़ान नहीं भरी, तो वह वापस सेना में भर्ती हो गए और तीन साल तक वहीं काम किया। इसके बाद वह दूसरी बार फौज की नौकरी छोड़कर गीतकार बनने के लिए वापस आए और सफल हो गए।

विज्ञापन
विज्ञापन
Anand Bakshi Death Anniversary: The lyricist who make Rajesh Khanna a superstar, know some unknown and interesting facts about Anand Bakshi
आनंद बक्शी - फोटो : सोशल मीडिया

1958 में मिला पहला मौका
आनंद बक्शी को साल 1958 में आई फिल्म ‘भला आदमी’ में बतौर गीतकार काम करने का मौका मिला, लेकिन उन्हें यह फिल्म कुछ खास सफलता नहीं दिला पाई। इसके बाद 1963 में उन्हें राज कपूर ने अपनी फिल्म 'मेहंदी लगे मेरे हाथ' में गाना का मौका दिया। इसके बाद ही बक्शी की लोकप्रियता बढ़ी और उन्हें काम मिलने लगा। 
 

Anand Bakshi Death Anniversary: The lyricist who make Rajesh Khanna a superstar, know some unknown and interesting facts about Anand Bakshi
आनंद बक्शी - फोटो : सोशल मीडिया
'जब जब फूल खिले’ से मिली पहचान
साल 1965 में आई फिल्म ‘जब जब फूल खिले’ से उन्हें असल मायने में पहचान मिली, जिसमें उन्होंने ‘परदेसियों से न अंखियां मिलाना’, 'ये समां.. समां है ये प्यार का', ' एक था गुल और एक थी बुलबुल’, गाना लिखकर अपना ही नहीं, कपूर खानदान के चिराग, शशि कपूर के डूबते करियर को भी संभाल लिया था। वहीं, ‘आराधना’, ‘अमर प्रेम’ और ‘कटी पतंग’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने गाने दिए, जिनकी वजह से राजेश खन्ना भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने। 
 
विज्ञापन
Anand Bakshi Death Anniversary: The lyricist who make Rajesh Khanna a superstar, know some unknown and interesting facts about Anand Bakshi
दिलीप कुमार के साथ आनंद बक्शी - फोटो : सोशल मीडिया

41 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए हुए नामित

आनंद बक्शी को जनता से इतना प्यार मिलता था कि उनको 41 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया, लेकिन पुरस्कार वे चार बार ही जीत पाए थे। उन्होंने अपने करियर में कई पीढ़ियों के साथ काम किया और उनकी खूबी थी कि समय के साथ उनका लिखने का तरीका भी बदलता जाता था। शायद इसलिए वह लोगों को काफी पसंद आते थे। बक्शी ऐसे गीतकारों में शुमार हैं, जिन्होंने साल दर साल फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक गाने दिए थे।
 
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें मनोरंजन समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे बॉलीवुड न्यूज़, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट हॉलीवुड न्यूज़ और मूवी रिव्यु आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed