जब मन कुछ ऐसा सुनने को करता है, जो दिल को छुए। तो ऐसे में याद आते हैं आनंद बक्शी के गीत। जी हां.. अंग्रेजों के जमाने में फौज की नौकरी करने वाले आनंद बक्शी तब की बंबई आए तो थे गायक बनने लेकिन उनके गाने हिंदुस्तानियों के हर हौसले की मिसाल बन चुके हैं। गीतकार तो बहुत हुए हैं, लेकिन आनंद बक्शी के गीतों की खासियत उनकी सादगी ही रही। उनके बोल इतने सरल होते हैं कि आम आदमी की जुबान उन शब्दों के साथ पल भर में ही सहज महसूस करती है। हर गाने में एक फलसफा और फलसफे का अपना अलग अंदाज। यही वजह रही है कि उन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला। यह उनके लिए लोगों का प्यार ही है जिसकी वजह से उन्हें सबसे ज्यादा 41 बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। चार बार के फिल्मफेयर पुरस्कार विजेता रहे इस शब्दों के बाजीगर की पुण्यतिथि पर आज हम आपको उनके कुछ यादगार गीत सुनाते हैं। और आखिरी में है वह गीत जो आनंद बक्षी ने खुद गाया ..
इन 10 गानों में आनंद बक्शी ने समझाया जिंदगी का असली फलसफा, सुनिए खुद उनकी आवाज में सुपरहिट बोनस गाना
गीत : एक था गुल और एक थी बुलबुल
फिल्म : जब जब फूल खिले (1965)
आनंद बक्शी का लिखा ये गीत अपने आप में पूरी एक सरल कहानी है। जितनी तसल्ली से आनंद ने इसे लिखा है, उतने ही सुर में मोहम्मद रफी ने इसे गाया है। गीत के एक एक बोल जाने पहचाने से लगते हैं। कल्याणजी आनंदजी की मशहूर जोड़ी ने इस गीत को संगीत दिया है। यह सुपरहिट गाना आनंद बक्शी के करियर की सुनहरी शुरुआत लेकर आया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गीत : सावन का महीना
फिल्म : मिलन (1967)
मुकेश और लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना सावन के महीने के बिना भी सावन जैसा सुहावना महसूस कराता है। इसकी वजह आनंद बक्शी के लिखे शानदार बोल ही हैं, जो लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के संगीत के साथ बेहतरीन तालमेल बनाते हैं। इस गाने के लिए आनंद बक्शी को पहली बार फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया था।
गीत : कोरा कागज था
फिल्म : आराधना (1969)
हिंदी सिनेमा के पहले सुपर स्टार राजेश खन्ना को कामयाब बनाने में आनंद बक्शी के लिखे गीतों का बहुत बड़ा हाथ रहा है। लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज में इस गीत को आज भी रेडियो पर खूब बजाया जाता है। राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर पर फिल्माए गए इस गीत को एस डी बर्मन ने संगीत दिया है। इस गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
गीत : हम तुम एक कमरे में बंद हों
फिल्म : बॉबी (1973)
इस गीत में दो प्रेमियों की दिली ख्वाहिश को सटीक शब्दों में पिरोने का काम आनंद बक्शी से बेहतर शायद ही कोई कर सके। डिंपल कपाड़िया और ऋषि कपूर पर फिल्माए इस गीत को शैलेन्द्र सिंह और लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी है। लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की प्रतिष्ठित जोड़ी के संगीत से सजे इस सदाबहार गीत के लिए आनंद बक्शी को फिल्मफेयर अवार्ड के लिए नामित किया गया।
