बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर संगीतकार आनंदजी वीर जी शाह आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं। नीले नीले अंबर पर, पल पल दिल के पास, बेखुदी में सनम, क्या खूब लगती हो समेत कई लोकप्रिय गानों को संगीतबद्ध करने वाले कल्याणजी-आनंदजी की जोड़ी में भले ही कल्याण जी साथ छोड़ गए, लेकिन छोटे भाई आनंदजी की आज भी हर पल उन्हें याद करते रहते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे दोनों भाइयों ने की जोड़ी ने उस दौर में बहुत से फिल्मो के लिए सुपरहिट गाने बनाएं।
Anandji Virji Shah: कैसे एक नाम 'कल्याणजी आनंदजी' में शामिल हो गए दो भाई, बेहद दिलचस्प है कहानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आनंदजी वीरजी शाह का जन्म 2 मार्च 1933 में हुआ था। इनके पिता का नाम वीरजी शाह था। उनके पिता एक छोटे मोटे व्यवसायी थे, जो किराना व्यवसाय शुरू करने के लिए मुंबई चले गए थे। आनंदजी खुद एक पॉपुलर भारतीय संगीत निर्देशक हैं। इनके गानों को आज भी बहुत सुना जाता है। उन्होंने संगीत जगत को कई अतुलनीय गानों से परिचित करवाया था, जिन गानों ने आगे जाकर इतिहास रचे थे।
कल्याणजी वीरजी शाह ने अपने भाई आनंदजी के साथ कल्याणजी-आनंदजी की एक बेहद अलग और सफल जोड़ी बनाई थी। आनंदजी आज भी कई अवसरों पर अपने भाई को जरूर याद करते हैं और उनके किस्से साझा करते हैं। एक बार आनंदजी ने बताया था कि कल्याणजी को पानी पूरी बहुत पसंद थी। उनके जन्मदिन पर सबको पता होता था कि घर पर पानी पूरी जरूर मिलेगी। उन्हें बधाई देने के लिए घर पर कई दोस्त और कलाकार आते थे। वह दिन पानी पूरी डे के रूप में हम लोग मनाते थे।
आनंदजी के परिवार की बात करें तो उनके घर में बबला और कंचन उनके छोटे भाई और भाभी हैं। बचपन में दोनों भाइयों ने एक ही गुरु से संगीत की शिक्षा ली थी। आनंदजी ने अपनी जोड़ी के बारे में एक इंटरव्यू में बताया था कि शुरू में हम नागिन के बीन वादक कल्याणजी वीरजी शाह एंड पार्टी नाम इस्तेमाल करते थे। शुरुआत में कल्याणजी वीरजी शाह नाम से फिल्म में काम करना शुरू किया। बाद में सुभाष देसाई ने हमें राय दी कि हम दोनों साथ में काम करते हैं, तो अपना नाम बदलकर कल्याणजी आनंदजी कर लें फिर इसी नाम से प्रसिद्धि मिलती गई।
आपको बता दें कि आनंदजी ने 1960 में बलराज साहनी और मीना कुमारी अभिनीत फिल्म ‘सत्ता बाजार’ से बॉलिवुड में अपने करियर में नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। इस लोकप्रिय जोड़ी का एक लंबा और शानदार इतिहास रहा है, इन्होंने एक साथ 250 से अधिक फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया है। अपने पूरे करियर में इन्हें कई बार सर्वश्रेष्ठ संगीत पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है, लेकिन 1975 में आयी फिल्म कोरा कागज के लिए सर्वश्रेष्ठ संगीतकार का पुरस्कार भी जीता था ।