मेरठ और दिल्ली में बिताए बचपन के दिनों को याद कर अब भी भावुक हो जाने वाले सदाबहार अभिनेता अनिल कपूर की नई फिल्म मलंग अगले हफ्ते रिलीज हो रही है। अमर उजाला से खास मुलाकात में अनिल कपूर ने की कुछ खास बातें।
अमर उजाला से खास मुलाकात में बोले अनिल कपूर, निजी जिंदगी अच्छी हो तो आप दुनिया से लड़ सकते हैं
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आपके हिसाब से अच्छे अभिनय की परिभाषा क्या है?
अभिनय में हमेशा ईमानदार होनी चाहिए। अगर कोई थोड़ा नकली अभिनय कर भी रहा है तो उसमें भी मजा आना चाहिए। अगर ये नहीं हो पा रहा है तो फिर संजीदा अभिनय ही आखिरी रास्ता है। ये दोनों ही चीजें बहुत जरूरी है और मुझे प्रभावित करती हैं।
'झक्कास' शब्द को लेकर आप खुद क्या सोचते हैं?
मुझे इसके जरिए लोगों का प्यार मिलता है इसलिए मैं खुशी-खुशी इसे अपनाता हूं। लेकिन, निजी तौर पर मैं कहूंगा कि 'झक्कास' जैसे शब्द एक अच्छे कलाकार के लिए इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। इस शब्द में कोई खराबी नहीं है लेकिन मुझे अगर किसी की तारीफ करनी हो तो वह मैं दूसरे लफ्जों में भी कर सकता हूं। मुझे लगता है कि इससे तारीफ थोड़ी हल्की हो जाती है।
आपकी कामयाबी में आपकी पत्नी का कितना योगदान है।
एक परिवार में पत्नी का योगदान बहुत होता है। कहीं ना कहीं उससे एक परिवार को हंसता खेलता हुआ माहौल मिलता है। इसके बाद ही आप अपने काम में ध्यान लगा सकते हैं। आपकी निजी जिंदगी अच्छी हो तो आप दुनिया से लड़ सकते हैं।
मुंबई की भागदौड़ में मेरठ और दिल्ली कितना याद आता है?
हमारे दादा-दादी मेरठ में रहते थे। बोनी कपूर वहीं पैदा हुए। दिल्ली में हमारी ननिहाल थी। आज भी मैं वहां की कुछ यादें नहीं भूला पाता हूं। गर्मियों के मौसम में हम बोरवेल की पानी ही हौदी में नहाया करते थे। साइकिल रिक्शा भी खूब याद आता है। दिल्ली में सांझा चूल्हा से रोटी बनवाकर लाना आदि सब याद है। मैंने दिल्ली और मेरठ में जिंदगी का हर रंग देखा है।
अपने बच्चों सोनम, रिया और हर्षवर्धन की किन खूबियों ने आप पर असर डाला है?
सोनम से मैंने समाज सेवा, लगन, दोस्ती, ईमानदारी सीखी है। रिया को महिलाओं से जुड़ी फिल्में बनाने का जुनून है। वह खाने से लेकर होटल और फैशन की अच्छी जानकार है। हर्ष ने फिल्म मलंग में मेरी बहुत मदद की है। उसका जुनून, प्रतिबद्धता और उसका फोकस कमाल का है। सीखना जीवन भर है, बच्चे भी हमें कभी कभी अच्छी नसीहत देते हैं।
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