हिंदी सिनेमा में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद उपजे वंशवाद, खेमेबाजी, गुटबाजी, पक्षपात जैसे मुद्दों पर बहस अब भी जारी है। इसका हिस्सा दूसरे कलाकार भी बन रहे हैं। वत्सल सेठ को तैमूर के हर तरफ दिखते फोटोग्राफ्स और वीडियो पर एतराज है। विजय वर्मा अपनी फिल्म गली ब्वॉय को लगातार निशाना बनाए जाने से उकता गए हैं। रणवीर शौरी की फायरिंग अब भी जारी है और अब दिव्या दत्ता भी बता रही हैं कि खेमेबाजी के चलते तमाम फिल्में उनके हाथ से निकल गईं। और, इस सबके बीच अनुराग कश्यप ने खुलासा इस बात का किया है कि वह क्या करेंगे, जब उनकी बेटी हीरोइन बनने की ख्वाहिश जताएगी।
ये करेंगे अनुराग जब बेटी हीरोइन बनना चाहेगी, वत्सल सेठ ने तैमूर को स्टार बनाने वालों पर साधा निशाना
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तैमूर पर वत्सल का निशाना
अभिनेता वत्सल सेठ ने भी वंशवाद के मुद्दे पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा, 'तैमूर एक बच्चा है। देखिए उसके लिए लोग अभी से कैसे पागल हैं। उसका फोटो दिखाओ वीडियो दिखाओ। अगर आप तैमूर को देखने के लिए इस समय बेताब हैं तो इसका मतलब तो यही हुआ कि कल को आप उसे बड़ी स्क्रीन पर भी देखना चाहेंगे। अगर वह बड़ा होकर एक अभिनेता बन जाता है तो फिर आपको वंशवाद के खिलाफ आवाज उठाने का कोई हक नहीं है। हर माता-पिता अपने बच्चे का समर्थन करना ही चाहते हैं। चाहे वह आर्थिक रूप से हो, चाहे नैतिक रूप से।'
विजय वर्मा को गुस्सा क्यों आता है!
हिंदी सिनेमा में होने वाले पुरस्कार समारोहों की धांधली भी अब इन बहसों का एक नया मुद्दा है। इस पर अभिनेता विजय वर्मा का कहना है कि अगर फिल्म 'गली ब्वॉय' के लिए सारे पुरस्कार खरीदे गए हैं तो एक पुरस्कार सहायक कलाकार के रूप में उनके लिए भी खरीदा जाना चाहिए था। उनके हिसाब से इस फिल्म पर लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद हैं। इसके अलावा उन्होंने भीतरी और बाहरी की बहस का हिस्सा बनने से साफ इनकार किया। उन्होंने कहा कि यह बहस सिर्फ अभी चल रही है लेकिन वह इस बहस को समझना चाहते हैं न कि इसका हिस्सा बनना।
कौन हैं ये भ्रष्ट बुड्ढे?
अभिनेता रणवीर शौरी भी मौजूदा बहसों का एक अहम हिस्सा हैं। तमाम बयानबाजी के बाद उन्होंने ट्विटर पर एक बार फिर हिंदी सिनेमा में खेमेबाजी पर एक पोस्ट साझा की है। उन्होंने लिखा, 'हिंदी सिनेमा में गुटबाजी मौजूद है जो मूल रूप से कुछ शक्तिशाली, भ्रष्ट और चालाक बुड्ढों की देन है। इसको कुछ युवा फिल्म निर्माता परस्पर आगे बढ़ा रहे हैं। इनको यह इंडस्ट्री विरासत में मिली है। उनका उद्देश्य इंडस्ट्री के पिरामिड पर शीर्ष पर बैठकर इस पूरे कामकाज पर नियंत्रण रखना और सितारों की जिंदगी का फैसला करना है।'
दिव्या ने याद किया पुराना दर्द
अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने भी इस फिल्म जगत में अपने साथ हुई बेईमानी के बारे में बातचीत की है। उन्होंने बताया है कि उनके साथ कई बार ऐसा हुआ है कि अंतिम क्षणों में उनका किरदार किसी और को दे दिया गया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'यह बहुत ही मन को दुखाने वाली भावना है कि कोई भी आता है या आपको फोन करता है और कहता है कि आपकी जगह पर इस फिल्म में अब किसी और को ले लिया गया है। मैं इस तरह कई फिल्मों में अंतिम क्षणों में बाहर कर दी गई हूं। ऐसे मौके पर आपको बहुत बुरा लगता है और आप असहाय महसूस करते हैं। क्योंकि, आप जानते हैं कि आप उस किरदार में बहुत अच्छे हो सकते थे।'