हमारा समाज आज काफी तरक्की कर चुका है। लोग पढ़े-लिखे और सभ्यतावादी होने का तमगा लिए घूमते हैं, लेकिन इसके पीछे का स्याह सच किसी की भी रूह कंपा देने के लिए काफी है। हम बात कर रहे हैं जातिवाद की, जिसकी जड़ें आज भी हमारे समाज में इतनी गहराई से जमी हुई हैं कि अगर कोई छोटी जाति का लड़का या लड़की दूसरी जाति वाले से संबंध जोड़ ले तो आधुनिकता भरी पूरी सोच फुर्र हो जाती है। अगर आपको लगता है कि जातिवाद आज के समय में खत्म हो गया है तो स्क्रीन पर ही सही, लेकिन भारतीय सिनेमा में बनी कुछ फिल्मों को जरूर देखना चाहिए, जिनमें जातिवाद के मुद्दे को मुखरता से दिखाया गया है।
Movies Based On Casteism Issue: जातिवाद के मुद्दे को मुखरता से उठाती हैं ये फिल्में, आपको झिंझोड़कर रख देंगी
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जय भीम (2021)
साउथ के निर्देशक टीजे ग्नानवेल द्वारा निर्देशित और लिखित फिल्म जय भीम में जातिवाद की मुद्दा मुखरता से दिखाया गया है। इस फिल्म को मद्रास हाईकोर्ट के जज रहे जस्टिस चंद्रा के एक चर्चित केस पर फिल्माया गया है। फिल्म जय भीम की कहानी तमिलनाडु की एक जनजाति के उत्पीड़न को दिखाती है। फिल्म में सुपरस्टार सूर्या के अलावा लिजोमोल जोस, के मणिकंदन, राजिशा विजयन, राव रमेश और प्रकाश राज जैसे स्टार्स ने भी दमदार अभिनय किया है। इस फिल्म के कुछ दृश्य आपको हिलाकर रख देंगे।
आर्टिकल 15 (2019)
'आर्टिकल 15' संविधान का वह हिस्सा है जिसमें धर्म, जाति, भाषा, रंग या लिंग के आधार पर भेदभाव की सख्त मनाही है। हालांकि, संविधान में ही जातियों को आरक्षण देने का भी प्रावधान किया है। आयुष्मान खुराना की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म में भी जातिवाद को बखूबी दिखाया गया है। इस फिल्म में वह पुलिस अधिकारी की भूमिका नजर आए, जिसके कंधे पर मेडल हैं, लेकिन सिर पर जातिवाद की तलवार।
मसान (2015),
फिल्म मसान की कहानी दो अलग-अलग कहानियों को एक साथ दिखाती है। इसकी एक कहानी में श्मशान घाट पर काम करने वाले दीपक यानी विक्की कौशल की मुलाकात एक लड़की से होती है। दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं। लड़की उच्च वर्ग की है। इस कहानी में आपको जातिवाद का घिनौना रूप साफ नजर आएगा।
मुक्केबाज (2018)
अनुराग कश्यप द्वारा अभिनीत इस फिल्म में जातिवाद की जड़ों को खेलकूद की प्रतियोगिता तक दिखाया गया है। इसमें एक दलित बॉक्सर श्रवण कुमार (विनीत श्रीनेट) की कहानी दिखाई गई है, जिसे हर रोज अपने कोच और स्थानीय बॉक्सिंग फेडरेशन संचालक के हाथों अपमानित होना पड़ता है, लेकिन श्रवण कुमार अपनी काबिलियत के दम पर बॉक्सिंग में कामयाबी हासिल करता है।