आजादी की सालगिरह का दिन अभिनेता आयुष्मान खुराना के लिए अपने बचपन को फिर से जीने और अपने देशप्रेम से जुड़ी यादों को बार बार सहेजने का दिन होता है। आयुष्मान को देश प्रेम की घुट्टी बचपन से ही अपने माता-पिता से मिली और उनसे ही आयुष्मान ने अपने देश पर, इसके समृद्ध इतिहास पर और इसको आजादी दिलाने वाले वीरों पर नाज करने की आदत मिली।
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15 अगस्त की पूर्व संध्या पर ‘अमर उजाला’ से बात करते हुए आयुष्मान कहते हैं, “स्कूल में हम इस दिन उन नायकों को याद करते थे, जिन्होंने हमें आजादी दिलाई। आजादी हमें बहुत बलिदानों के बाद मिली है। और, स्कूल से ही हमें ये सिखाया गया कि आजादी को बनाए रखने के लिए हमें भी अपना योगदान देना होगा और हम सभी को अपने-अपने तरीके से राष्ट्र निर्माण में भूमिका निभानी चाहिए।”
राष्ट्रीय पर्व आयुष्मान के लिए शुरू से रग रग में स्फूर्ति भर देने वाले रहे हैं। अपने स्कूल के दिनों को याद करते हुए वह बताते हैं, “मुझे स्कूल में ध्वजारोहण समारोह के दौरान जो गर्व और उत्साह महसूस होता था, वह आज भी मेरी यादों में ताजा है। असेंबली हॉल में राष्ट्रगान गाना मेरे लिए गर्व की बात थी और इसे तो मैं आज भी उतने ही जोश से गाता हूं। मेरे कुछ पसंदीदा गाने देशभक्ति के गीत हैं और मुझे यकीन है कि और भी लोग ऐसा ही महसूस करते होंगे।”
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आयुष्मान कहते हैं, “हमारे देशभक्ति गीत हममें उत्साह जगाते हैं। यह हमारी सामूहिक धड़कन है जो भारत को आज इतना खास बनाती है। खास तौर से इस बार के जश्न की थीम ‘विकसित भारत’ मुझसे गहराई से जुड़ी हुई है। हमारे देश ने वैश्विक स्तर पर हाल के दिनों में तेजी से प्रगति की है और हर साल के साथ भारत की छवि सशक्त हो रही है। आज भारत वैश्विक ध्यान का केंद्र है।”
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सामाजिक कार्यों की तरफ शुरू से झुकाव रखने वाले आयुष्मान अपनी फिल्मों के माध्यम से भी अपनी बात कहते रहे हैं। वह कहते हैं, “मैं अपने सिनेमा के माध्यम से समाज को एक संदेश देना चाहता हूं। मेरा उद्देश्य भारत और उसके मजबूत नागरिकों की असाधारण कहानियों को सामने लाना है जो हर दिन एक बदलाव लाते हैं। मैं यह काम परदे के बाहर करता हूं यूनिसेफ के साथ, जो मेरे दिल के बहुत करीब है क्योंकि यह बच्चों के जीवन को छूता है।” आयुष्मान इस बात पर खास जोर देते हैं कि हमें अपनी अगली पीढ़ी की रक्षा करने और उनके फलने-फूलने के लिए एक अच्छा माहौल बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
