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बलराज साहनी: वो अभिनेता जिन्होंने कहा था मौत के बाद मेरे पार्थिव शरीर पर लाल झंडा ओढ़ाना

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अमरीन हुसैन Updated Tue, 13 Apr 2021 09:27 AM IST
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balraj sahini death anniversary unknown facts his last desire as marxist
बलराज साहनी

बलराज साहनी हिंदी सिने जगत के वो अभिनेता थे, जिनकी गिनती बेहद प्रतिभाशाली और प्रभावशाली अभिनेताओं में होती है। उन्होंने आम आदमी की पीड़ा और समस्याओं को कई दफा फिल्मी पर्दे पर जुबान दे दी। वे वास्तविक जीवन में भी हुनरमंद, सौम्यता, सौहार्द और नैतिकता के प्रतीक बने रहे। अगर उनके निभाए किरदारों को बारीकी से देखें तो पता चलेगा कि वे दुनिया के किसी भी आम आदमी के चरित्र को पर्दे पर उतार सकते थे। बलराज साहनी का असली नाम युद्धिष्ठिर साहनी था। उनपर लिखी ‘द नॉन कन्फर्मिस्ट : मेमरीज ऑफ माई फादर बलराज साहनी’ किताब में वक्त और जिंदगी की अनकही बातों को उनकी जीवनी में बयान किया गया है। ये जीवनी बलराज साहनी के अभिनेता पुत्र परीक्षित साहनी ने लिखी है। 13 अप्रैल को उनकी पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनसे जुड़ी बातों का हम जिक्र कर रहे हैं।

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बलराज साहनी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बलराज साहनी के शौक भी लाजवाब थे। उन्हें पानी से काफी लगाव था। पानी में तैरने की बात हो या फिर बर्फ वाले पानी मे नहाने की, वो तुरंत उत्सुक हो जाया करते थे। उनको काफी कठोर निर्णय लेने के लिए भी जाना जाता था। बलराज को बचपन से ही अभिनय का शौक था।

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बलराज साहनी - फोटो : डेमो

बलराज साहनी का जन्म 1 मई 1913 को पाकिस्तान में हुआ था। उन्होंने लाहौर यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिट्रेचर में अपनी मास्टर डिग्री की थी। इसके बाद वो अपने परिवार के व्यापार को संभालने के लिये रावलपिंडी चले गये थे। उन्होंने 1938 में महात्मा गांधी के साथ मिलकर भी काम किया था। गांधी जी से मिलने के बाद वो बीबीसी लंदन हिंदी को ज्वाइन करने इंग्लैंड चले गये थे।

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बलराज साहनी - फोटो : social media

बलराज साहनी अपने बचपन का शौक पूरा करने के लिये 'इंडियन प्रोग्रेसिव थियेटर एसोसियेशन' (इप्टा) में शामिल हो गये थे। 'इप्टा' में वर्ष 1946 में उन्हें सबसे पहले नाटक 'इंसाफ' में अभिनय करने का मौका मिला। इसके साथ ही ख्वाजा अहमद अब्बास के निर्देशन में फिल्म 'धरती के लाल' में भी बलराज साहनी को बतौर अभिनेता काम करने का मौका मिला।

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balraj sahni and neetu singh - फोटो : youtube

इप्टा से जुड़े रहने के कारण बलराज साहनी को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्हें अपने क्रांतिकारी और कम्युनिस्ट विचारों के कारण जेल भी जाना पड़ा। उन दिनों वह फिल्म 'हलचल' की शूटिंग कर रहे थे और निर्माता के आग्रह पर विशेष व्यवस्था के तहत पिक्चर की शूटिंग किया करते थे। शूटिंग खत्म होने के बाद वापस जेल चले जाते थे।

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