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गिरफ्तारी के बावजूद इस एक्टर ने नहीं छोड़ा था काम, 3 महीने तक जेल में रहकर की थी शूटिंग
बलराज साहनी की गिनती बेहद प्रतिभाशाली एक्टर्स में से एक होती है। उनका असली नाम युद्धिष्ठिर साहनी है। 1 मई 1913 को ब्रिटिश इंडिया के रावलपिंडी में जन्मे बलराज साहनी ने उस दौर में इंग्लिश लिटरेचर से मास्टर डिग्री की। उन्होंने लाहौर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। 13 अप्रैल 1973 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। बलराज साहनी की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनसे जुड़ी खास बातें।
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balraj sahni
- फोटो : social media
फिल्मों के अलावा बलराज साहनी सामाजिक कार्यों से भी खूब जुड़े रहे। 1938 में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ मिलकर काम किया है। इसके बाद वो बीबीसी लंदन हिंदी ज्वाइन करने इंग्लैंड चले गए। बलराज साहनी को एक्टिंग का शौक शुरू से था। उन्होंने इंडियन पीपल थियेटर ज्वाइन किया।
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अपने किरदारों को जीवंत बनाने के लिए बलराज साहनी उस किरदार को असल में जीते थे। इस सिलसिले में एक बार वो जेल भी गए। दिलीप कुमार के कहने पर के. आसिफ ने बलराज को फिल्म हलचल में एक अहम रोल दिया। वो फिल्म में जेलर बने। के. आसिफ जेलर के रोल को प्रामाणिक बनाना चाहते थे, इसके लिए वे कुछ नेताओं और फिर जेल प्रशासन से मिले। बलराज साहनी भी चाहते थे कि उनके रोल में जरा सा भी झोल न रहे, इसके लिए वो उत्साहित हो कर आसिफ के साथ आर्थर रोड जेल पहुंचे और जेल के अंदर के रहन-सहन को जाना।
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किसे पता था कि फिल्म के किरदार चुनते वक्त बलराज साहनी को असल जिंदगी में भी जेल में रहना पड़ेगा। एक दिन खबर मिली की परेल से कम्युनिस्ट पार्टी का जुलूस निकलने वाला है। वामपंथी विचारधारा के समर्थक बलराज अपनी पत्नी के साथ उस जुलूस में शामिल हुए लेकिन इसी बीच हिंसा शुरू हो गई। कई लोगों के साथ बलराज साहनी को गिरफ्तार कर लिया गया।
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एक दिन जेलर ने बलराज साहनी को बुलाया और कहा कि उन्हें कहीं देखा है। उस वक्त वहां के. आसिफ भी बैठे थे। के. आसिफ के कहने पर जेलर ने उन्हें जेल में रहकर शूटिंग करने की छूट दी। वो सुबह शूटिंग पर जाते और शाम को वापस जेल लौट आते। करीब 3 महीने तक उन्होंने जेल में रहकर फिल्म हलचल की शूटिंग की थी।
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