राजेश खन्ना नाम का तिलिस्म जो कभी हिंदी सिनेमा के दीवानों के सिर चढ़कर बोलता रहा, उस नाम का करिश्मा आज भी उनकी फिल्मों के रूप में उनके चाहने वालों के दिलों में बसता है। राजेश खन्ना को हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार कहा जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने लगातार 15 हिट फिल्में दीं। लेकिन क्या आपको पता है कि ये 15 हिट फिल्में कौन सी हैं, और कौन सी है वह फिल्म जिसने हिट के इस सिलसिले को तोड़ा और आखिर कौन सी वह फिल्म है जो इन 15 फिल्मों में शामिल नहीं है? चलिए आपका सिनेमा का सामान्य ज्ञान थोड़ा और बढ़ाते हैं। राजेश खन्ना का सितारा चमका था फिल्म आराधना से। इसके बाद उनकी लाइन से रिलीज हुई फिल्में डोली, बंधन, इत्तेफाक, दो रास्ते, खामोशी, सफर, द ट्रेन, कटी पतंग, सच्चा झूठा, आन मिलो सजना, महबूब की मेहंदी, छोटी बहू, आनंद और हाथी मेरे साथी सुपरहिट रहीं।
बाइस्कोप: जया के दुखी मन से निकली हाय राजेश खन्ना के करियर पर पड़ी भारी, यूं सिमट गया सुपरस्टारडम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बावर्ची दरअसल 1966 में रिलीज हुई हिट बंगाली फिल्म गाल्पो होलियो सत्ती की हिंदी रीमेक है। तपन सिन्हा लिखित और निर्देशित इस फिल्म में राबी घोष ने बांग्ला सिनेमा में हंगामा मचा दिया था। ऋषिकेश मुखर्जी ने ये फिल्म देखी तो उन्हें बहुत पसंद आई। अपने गुरु भाई गुलजार को उन्होंने फिल्म के हिंदीकरण की जिम्मेदारी सौंपी और खुद ये कहानी सुनाने पहुंच गए राजेश खन्ना के पास। राजेश खन्ना इससे पहले आनंद में ऋषिकेश मुखर्जी के साथ काम कर चुके थे। और, उनसे डांट भी खा चुके थे। राजेश खन्ना को अब तक वह दिन भी याद था जब ऋषिकेश मुखर्जी ने एक बार उनके लेट आने पर कुछ नहीं कहा लेकिन जब वह मेकअप वगैरह कराकर शूटिंग के लिए पहुंचे तो ऋषिकेश मुखर्जी ने पैकअप बोल दिया था। ऋषि दा का काम करने का स्टाइल किसी रिंगमास्टर से कम नहीं था। कौन बनेगा करोड़पति में एक बार जब धर्मेंद्र सेट पर आए तो उन्होंने और अमिताभ बच्चन ने इस महान निर्देशक के साथ की गई अपनी फिल्म चुपके चुपके के खूब किस्से दर्शकों के साथ बांटे थे और तब भी दोनों ने याद किया था कि कैसे वे शूटिंग के समय ऋषिकेश मुखर्जी से घबराते थे।
लेकिन, ऋषिकेश मुखर्जी को राजेश खन्ना ने मना नहीं किया। उन्होंने कहानी सुनी और ऋषिकेश मुखर्जी के कोई सवाल करने से पहले ही बोल दिया, मैं ये फिल्म कर रहा हूं। ऋषिकेष मुखर्जी थोड़ा हैरान भी हुए कि बिना किसी मान मनौव्वल के इतना बड़ा सितारा तैयार कैसे हो गया। इसके बारे में राजेश खन्ना ने बहुत बाद में राज खोला। उन्होंने कहा, “मैं उन दिनों कुछ ऐसा करना चाहता था जो सुपरस्टार राजेश खन्ना न करना चाहता हो लेकिन पंजाब से आए जतिन खन्ना (राजेश खन्ना का असली नाम) को जिसमें खूब मजा आए। मैंने तो ऋषि दा से सिर्फ इस किरदार को खुलकर करने की छूट मांगी और वह मुझे मिल गई। बस उसके बाद तो मैंने वह सब किया जो ऋषि दा ने मुझे आनंद में नहीं करने दिया।” राजेश खन्ना की कही बात सही भी है। फिल्म बावर्ची में वह सब कुछ है जो आमतौर पर हिंदी सिनेमा के फॉर्मूलों में कहीं फिट नहीं होता।
फिल्म की ओपनिंग क्रेडिट्स की बजाय कलाकारों का परिचय एक एक करके अमिताभ बच्चन की आवाज कराती है। फिल्म का हीरो हाफ पैंट और कमीज में दिखता है। फिल्म की हीरोइन की कहानी का फिल्म में एक अलग ही ट्रैक है और फिल्म की इस हीरोइन के परिवार का जो शख्स रिटायरमेंट के करीब है उसका नाम है मुन्ना। और, मुन्ना की उसके पिताजी अब भी क्लास लगाते हैं।
शांति निवास की इस कहानी के सारे पात्र अतरंगी हैं। दादू से लेकर पिंटू बाबा तक सबकी कोई न कोई समस्या है। और, एक बार रघु नाम का बावर्ची जब शांति निवास में दाखिल हो जाता है तो हर समस्या का हल तुरत फिरत निकलने लगता है। एक मध्यमवर्गीय संयुक्त परिवार में दिन भर चलने वाली चख चख इस एक किरदार के आते ही कम होने लगती है। ऋषिकेश मुखर्जी रघु की हर कला का किसी न किसी बहाने प्रदर्शन करते रहते हैं। पाक कला में वह निपुण है ही। बातों का भी धनी है। भाषाओं का ज्ञानी है और जरूरत पड़ने पर दादूजी के सबसे छोटे बेटे को फिल्म संगीत का ज्ञान भी दे देता है। शांति निवास में जिस एक इंसान से रघु की सबसे ज्यादा पटती है वह है कृष्णा।
कृष्णा के माता पिता का एक दुर्घटना में निधन हो गया। वह दिन भर घर में चकरघिन्नी की तरह घूम घूमकर काम करती है। रघु की वह लाडली है। और, रघु ही है जो उसके मन की बात ताड़ जाता है। फिर एक दिन रघु गायब हो जाता है। साथ ही गायब हो जाता है दादू के बिस्तर के नीचे रखा उनका कीमती बक्सा। कहानी का ये मोड़ पहले तो सबके असली चेहरे सामने लाता है। फिर सामने ये भी लाता है कि रघु बुरा आदमी नहीं है। वह तो एक प्रोफेसर है जो दूसरों को खुशियां बांटने के मिशन पर निकला है। काश! ऐसा एक रघु हर संयुक्त परिवार को मिल जाता।
ऋषिकेश मुखर्जी का सिनेमा आम इंसान का सिनेमा है। उनका शांति निवास असल का मध्यमवर्गीय घर जैसा ही दिखता है। ना ज्यादा तामझाम और न ही घर को फिल्मी बनाने का कोई इंतजाम। राजेश खन्ना का रघु वाला रूप भी बिल्कुल सिंपल सा जिसे इन दिनों डिग्लैमराइज्ड रोल कहते हैं। कहां राजेश खन्ना जैसा रोमांटिक हीरो और कहां एक भरे पूरे परिवार के बर्तन मांजता रघु। रघु का किरदार करना ही ये बताता है कि राजेश खन्ना को कभी किसी बात का मोह नहीं रहा। वह कहते भी थे, “मैं तो हर रोज नई जिंदगी जीता हूं। शाम हुई, सो गए। अगर अगली सुबह आंख खुल गई तो फिर एक नया जीवन। नहीं तो किसको पता कि कब आंख लगे और फिर लगी ही रह जाए।”
आनंद का संवाद, बाबूमोशाय, जिंदगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए, यहां आकर सादगी की वकालत करते हुए खुश रहने को बहुत साधारण बात बताता है बस ये साधारण होना ही सबसे मुश्किल है, ये भी समझाता है। फिल्म में राजेश खन्ना और जया भादुड़ी के साथ जितने भी साथी कलाकार रहे, सबको ऋषिकेश मुखर्जी ने ऐसे किरदार दिए कि किसी एक को भी कम कर दो तो कहानी का संतुलन बिगड़ जाए। डांस मास्टर के रूप में पेंटल हो या फिर फिल्मों में संगीत देने के लिए हाथ पैर मारते संगीतकार के रूप में असरानी। फिल्म में कैफी आजमी और मदन मोहन की जोड़ी ने फिर एक बार रंग जमाया। फिल्म के गाने ऋषिकेश मुखर्जी के अपनी फिल्मों के सबसे पसंदीदा गाने रहे। वह कहते भी थे, “अगर सिनेमा के स्वर्णिम युग के सारे संगीतकारों में से मुझे किसी एक के साथ काम करने का मौका चुनना हो तो मैं फिर से मदन मोहन के साथ फिल्म बनाना चाहूंगा।”
फिल्म बावर्ची की कहानी पिछली सदी के आखिर में एक बार फिर परदे पर दिखी थी गोविंदा की फिल्म हीरो नंबर वन के रूप में। लेकिन इससे पहले बावर्ची की मूल बांग्ला फिल्म गाल्पो होलियो सत्ती की रीमेक तमिल में एक बार और कन्नड़ सिनेमा में दो बार बन चुकी थी। बावर्ची की शूटिंग के दिनों में अमिताभ बच्चन और जया भादुड़ी का प्रेम प्रंसग भी अपने उनवान पर था और इसे लेकर राजेश खन्ना काफी उल्टा सीधा भी बोलते थे। अमिताभ बच्चन का वह सेट पर काफी मजाक उड़ाते और एक दिन दुखी होकर जया बच्चन के मुंह से निकल गया, एक दिन जमाना देखेगा कि ये कहां होगा और आप कहां होंगे? किसी का दिल बहुत दुखा हो और उस वक्त उसके मुंह से कोई बात निकल जाए तो लोग कहते हैं कि सच होकर रहती है। और, खुद राजेश खन्ना ने बावर्ची के अगले साल रिलीज फिल्म नमक हराम में मान लिया कि उनके दिन पूरे हुए अब बारी नए सुपर सितारे की है। अमिताभ बच्चन की है। आज के बाइस्कोप में इतना ही, कल बात करेंगे एक और ओल्डी गोल्डी की..। सिलसिला जारी है।
पढ़ें: बाइस्कोप: श्रीदेवी के लिए आठवें फेरे का असल जिंदगी तक में दिखा असर, पढ़िए ‘1984 ए क्लासिक लव स्टोरी’