कला को लेकर हमेशा से ही भारत देश धनी रहा है। चाहें नृत्य हो, संगीत हो या फिर अभिनय हो। लोगों ने अपनी अद्भुत कला से अपनी अमिट छाप छोड़ी है। इस पावन धरती पर ऐसे कई कलाकार हुए, जिन्होंने कला को अलग- अलग रंग-रूप और परिभाषा दी है। आज नए कलाकार इन्हीं रंग-रूपों और परिभाषाओं का अनुसरण कर रहे हैं। आज के इस लेख में हम आपको एक ऐसी शख्सियत से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिनकी जादुई आवाज ने श्रोताओं के कानों में अमृत समान रस घोलने का काम किया है। हम बात कर रहे हैं, पद्मश्री और पद्म विभूषण अवॉर्ड से सम्मानित बेगम अख्तर की। आज गायिका की पुण्यतिथि है। इस खास अवसर पर जानते हैं गायिका की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।
Begum Akhtar: गजल, ठुमरी और दादरा की मल्लिका थीं बेगम अख्तर, जिंदगी से लड़कर गायकी को बनाया था अपना मुकद्दर
अपनी गजलों से दर्शकों को मदहोश कर देने वाली बेगम अख्तर का जन्म सात अक्टूबर 1914 उत्तर प्रदेश के फैजाबाद में हुआ था। बेगम अख्तर बचपन से ही गायिका बनना चाहती थीं, लेकिन उनका परिवार इसके सख्त खिलाफ था। हालांकि, परिवार में उनके चाचा ने उनके सपनों को पंख देने में बेगम अख्तर की मदद की थी। अपनी गायकी से लोगों की रूह में बस जाने वाली बेगम अख्तर का पहला प्यार ही संगीत था। उस जमाने के लोकप्रिय संगीत उस्ताद अता मुहम्मद खान, अब्दुल वाहिद खान और पटियाला घराने के उस्ताद झंडे खान से उन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत की शिक्षा-दीक्षा दिलाई गई थी।
बेगम अख्तर उस गायिकी का नाम है, जो आजाद पक्षी की तरह उन्मुक्त गगन का विचरण करती हैं। अपने सपनों को पाना गायिका के लिए भी आसान नहीं रहा है। बेगम अख्तर ने 15 वर्ष की बाली उम्र में मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति दी थी। इस प्रोग्राम की अतिथि प्रसिद्ध कवयित्री सरोजिनी नायडू थीं। कवयित्री बेगम अख्तर की गायकी की इस कदर मुरीद हुईं की उन्होंने बेगम अख्तर को साड़ी उपहार में भेंट कर दी थी।
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उनकी गाई गजल 'कभी तकदीर का मातम कभी दुनिया का गिला, मंजिल-ए-इश्क में हर गाम पे रोना आया' यह गजल उनकी जिंदगी की पूरी कहानी बयां करता है। संगीत में अपनी आत्मा पीरोने वाली बेगम अख्तर की जिंदगी भी कम कष्टदायी नहीं थी। बाली उम्र में ही गायिका ने अपनी जिंदगी का सबसे खतरनाक मंजर देखा था। कहा जाता है कि यह हादसा 13 साल की उम्र में हुआ था। उस समय बिहार का एक राजा उनका कदरदान बन गया था। राजा ने बेगम अख्तर को न्यौता भेजा और उनके साथ बलात्कार भी किया। इस घटना के बाद बेगम अख्तर प्रेग्नेंट हो गई थीं और आगे चलकर उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था, जिसका नाम शमीमा रखा।
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इस क्रूर हादसे के बाद भी सुरों की मल्लिका ने अपने जीवन के तार को झनकने नहीं दिया। बेगम अख्तर ने दोबारा खुद को समेटा और जीवन को नए सिरे से शुरू किया। आगे चलकर बेगम अख्तर ने इश्तिआक अहमद अब्बासी से 1945 में निकाह किया। उनके शौहर पेशे से वकील थे। अपने आखिरी दिनों में भी बेगम अख्तर ने गायकी को ही अपना सारा समय दिया था। कहा जाता है कि कैफी आजमी की गजल गाते हुए गायिका की तबीयत बिगड़ी थी और अस्पताल ले जाते हुए उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई थी।