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चिल्लाओ मत, नहीं तो ये केस यहीं रफा दफा कर दूंगा, खून में जोश भर देंगे सनी देओल के ये डायलॉग्स
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला,
Updated Thu, 18 Oct 2018 07:50 AM IST
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बॉलीवुड के एक्शन हीरो सनी देओल का 19 अक्तूबर को 62वां जन्मदिन है। उन्होंने अपने पूरे फिल्मी करियर में कई हिट फिल्में दी हैं। फिल्म 'घायल' के लिए सनी को बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था तो वहीं साल 2001 में आई फिल्म 'गदर-एक प्रेम कथा' कई हफ्तों तक सिनेमाघरों से नहीं उतरी थी। फिल्मों में उनकी एक्टिंग को ही नहीं बल्कि डायलॉग्स भी दर्शकों ने काफी पसंद किए। उनकी फिल्मों को डायलॉग दर्शक की जुबान पर आज भी जिंदा हैं। सनी देओल के जन्मदिन पर आज हम आपको उनके बेहतरीन डायलॉग्स से रूबरू करवाते हैं।
दामिनी : चिल्लाओ मत। नहीं तो ये केस यहीं रफा दफा कर दूंगा। न तारीख, न सुनवाई, सीधा इंसाफ। वो भी ताबड़तोड़।
दामिनी: मैदान में खुले शेर का सामना करोगे, तुम्हारे मर्द होने की गलतफहमी दूर हो जाएगी।
दामिनी: तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख...तारीख पर तारीख...तारीख मिलती रही है, लेकिन इंसाफ नहीं मिला। माई लॉर्ड इंसाफ नहीं मिला...मिली है तो सिर्फ यह तारीख।
दामिनी: जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पे पड़ता है, तो आदमी उठता नहीं...उठ जाता है।
दामिनी: मैदान में खुले शेर का सामना करोगे, तुम्हारे मर्द होने की गलतफहमी दूर हो जाएगी।
दामिनी: तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख...तारीख पर तारीख...तारीख मिलती रही है, लेकिन इंसाफ नहीं मिला। माई लॉर्ड इंसाफ नहीं मिला...मिली है तो सिर्फ यह तारीख।
दामिनी: जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पे पड़ता है, तो आदमी उठता नहीं...उठ जाता है।
जिद्दी: पत्थरों की दुनिया में देवता बनना तो बहुत आसान है, इंसान बनना बहुत मुश्किल।
जीत: इन हाथों ने हथियार छोड़े हैं, चलाना नहीं भूले।
गदर- एक प्रेम कथा: हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा।
गदर- एक प्रेम कथा: मैं अपने बीबी बच्चों के लिए सर झुका सकता हूं। तो मैं सबके सर काट भी सकता हूं।
जीत: इन हाथों ने हथियार छोड़े हैं, चलाना नहीं भूले।
गदर- एक प्रेम कथा: हमारा हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा।
गदर- एक प्रेम कथा: मैं अपने बीबी बच्चों के लिए सर झुका सकता हूं। तो मैं सबके सर काट भी सकता हूं।
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घातक: पिंजरे में आकर शेर भी कुत्ता बन जाता है।
घायल: जाकर दुम हिलाना उनके सामने...तलवे चाटना..बोटियां फेकेंगे बोटियां...
ये मजदूर का हाथ है, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है।
घातक: मर्द बनने का इतना ही शौक है, तो कुत्तों का सहारा लेना छोड़ दें।
घायल: जाकर दुम हिलाना उनके सामने...तलवे चाटना..बोटियां फेकेंगे बोटियां...
ये मजदूर का हाथ है, लोहा पिघलाकर उसका आकार बदल देता है।
घातक: मर्द बनने का इतना ही शौक है, तो कुत्तों का सहारा लेना छोड़ दें।
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बॉर्डर: जिंदगी का दूसरा नाम प्रॉब्लम है।
नरसिम्हा: ईंट और पत्थर जवाब देने के लिए नहीं होते, घर बनाने के लिए होते हैं।
कहर: गुंडे और गुंदागर्दी यहीं से जन्म लेते हैं, जिसे आप पुलिस स्टेशन कहते हैं।
नरसिम्हा: ईंट और पत्थर जवाब देने के लिए नहीं होते, घर बनाने के लिए होते हैं।
कहर: गुंडे और गुंदागर्दी यहीं से जन्म लेते हैं, जिसे आप पुलिस स्टेशन कहते हैं।