सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में बदलाव किया जिसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए। दलितों और आदिवासियों के उत्पीड़न में सीधे गिरफ्तारी और केस दर्ज कराने पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया। बॉलीवुड भी आरक्षण के मुद्दे को उठाने में कभी पीछे नहीं रहा। समय-समय पर ऐसी फिल्में आती रही हैं जब आरक्षण के मुद्दे को उठाया गया है।
भारत बंद के दौरान कई राज्यों में हिंसा, इन 5 बॉलीवुड फिल्मों में उठा है आरक्षण का मुद्दा
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आरक्षण (2011)
प्रकाश झा ने 2011 में 'आरक्षण' फिल्म से इस मुद्दे को सिनेमा के परदे पर उठाया था। फिल्म में अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, मनोज बाजपेयी, तन्वी आजमी और प्रतीक बब्बर ने मुख्य किरदार निभाया था।
चमेली की शादी (1986)
बासु चटर्जी निर्देशित 1986 में आई इस फिल्म में कॉमेडी के जरिए आरक्षण और जाति व्यवस्था पर व्यंग्य किया गया था। इस फिल्म में अनिल कपूर, अमृता सिंह, अमजद खान, पंकज कपूर और राम सेठी ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं कर पाई थी लेकिन क्रिटिक्स ने इसे काफी सराहा था।
अंकुर (1974)
1974 में आई श्याम बेनेगल की फिल्म 'अंकुर' हिंदी सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक है। जाति व्यवस्था पर आधारित इस फिल्म ने कुल 3 नेशनल अवॉर्ड और 43 अन्य पुरस्कार जीते। फिल्म में शबाना आजमी, अनंतनाग, संधु मेहर, प्रिया तेंदुलकर और दिलीप ताहिल मुख्य भूमिकाओं में थे।
सुजाता (1959)
निर्माता-निर्देशक बिमल रॉय ने फिल्म के जरिए छुआछूत के मुद्दे को दिखाया। जिसे फिल्मफेयर ने बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड दिया। मुख्य भूमिका सुनील दत्त और नूतन ने निभाई थीं।