बॉलीवुड एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर इन दिनों अपनी वेब सीरीज 'दलदल' को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। इस सीरीज की स्ट्रीमिंग आज से अमेजन प्राइम वीडियो पर शुरू हो चुकी है। इस सीरीज की रिलीज के पहले दिन भूमि ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के दर्शन किए और साथ ही एक भावुक नोट भी शेयर किया।
भूमि ने 'दलदल' की रिलीज के दिन किए स्वर्ण मंदिर के दर्शन, भावुक नोट लिखा- 'खुद से दोबारा प्यार करना सीखने...'
Bhumi Pednekar Daldal Post: भमि पेडनेकर की क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज 'दलदल' आज प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है। इस खास मौके पर भूमि ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के दर्शन किए।
भूमि का पोस्ट
भूमि पेडनेकर ने आज इंस्टाग्राम पर अपनी कई शानदार तस्वीरें शेयर की हैं। पहली तस्वीर में भूमि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के दर्शन करती नजर आ रही हैं। दूसरी तस्वीर में भूमि लैपटॉप पर अपनी सीरीज 'दलदल' को देखकर मुस्कुराती हुई पोज दे रही हैं। तीसरी तस्वीर में सीरीज 'दलदल' के सभी साथी कलाकारों के साथ है। चौथी तस्वीर में भूमि अपनी इस सीरीज के क्लैपबोर्ड से अपने चेहरे को छूपाती नजर आ रही हैं।
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बाकी की खास तस्वीरें
पांचवीं तस्वीर में एक कंप्यूटर दिखाई दे रहा है, जिस पर 'दलदल' की स्क्रिप्ट स्क्रॉल होती नजर आ रही है। छठी तस्वीर में भूमि 'दलदल' के एक सीन में गंभीर रूप में दिखाई दे रही हैं। और उनके आगे टेबल पर नेम प्लेट पर 'रीटा फरेरा IPS' लिखा नजर आ रहा है। सांतवीं तस्वीर में भूमि की एक ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर नजर आ रही हैं, जिसमें उनके ईयररिंग्स काफी चमक रहे हैं। आठवीं तस्वीर में 'दलदल' सीरीज के दिन 65वें सूट की एक हार्ड कॉपी दिखाई दे रही है। नवां एक वीडियो है, जिसमें अमृतसर का स्वर्ण मंदिर चमचमाता दिखाई दे रहा है।
भूमि का भावुक नोट
भूमि ने आज इंस्टाग्राम पर अपनी आठ तस्वीरें और एक वीडियो शेयर किया है। इसके साथ भूमि ने कैप्शन में लिखा, 'पिछले साल सब्र और शुक्र ने मुझे खुद से मिलने को कहा। शक के साथ, खामोशी के साथ और उन सवालों के साथ, जिनके जवाब मेरे पास अभी तक नहीं थे। इसने मुझे डर को भूलने और धीरे-धीरे, नरमी से, खुद से फिर प्यार करना सिखाया।'
'आगे बढ़ने को लेकर...'- भूमि
भूमि ने आगे लिखा, 'सेट पर लंबे-लंबे दिनों में, सेट के बाहर के नाजुक लम्हों में, ब्रह्मांड से की गई दुआओं में और काम पर अटूट भरोसे के बीच, मैं आगे बढ़ती रही। इसलिए नहीं कि मैं बेखौफ थी, बल्कि इसलिए कि मेरा भरोसा अभी भी बाकी था। 'दलदल' उसी जगह से पैदा हुआ। कमजोरी से। भरोसे से। अनिश्चित रास्ते पर भी आगे बढ़ने का चुनाव करने से। आज, मैं यह रचना आभार, विनम्रता और खुले दिल से आपके सामने पेश कर रही हूं।'