क्या आप किसी ऐसे फिल्म निर्देशक का नाम जानते हैं जिसने ये जिद की हो कि हिंदी सिनेमा में वह कदम रखेगा तो तभी रखेगा जब फिल्म के हीरो अमिताभ बच्चन हों और यही नहीं अपनी ये जिद उसने पूरी भी की हो। इस निर्देशक का नाम है के भाग्यराज। भाग्यराज ने अपनी पहली हिंदी फिल्म अमिताभ बच्चन के साथ बनाई और हादसा उनके साथ ये हुआ कि बतौर निर्देशक अपनी पहली ही फिल्म में उनका अमिताभ बच्चन से पंगा भी हो गया। इसके बाद क्या हुआ, ये बताने से पहले आपको बता देते हैं उस फिल्म के बारे में जिसके जरिये भाग्यराज को हिंदी सिनेमा में कदम रखने का पहला मौका मिल सकता था लेकिन जिसमें काम करने से अमिताभ के इंकार करने पर भाग्यराज ने भी उस फिल्म से अपना नाम वापस ले लिया।
Bioscope S2: मुंहमांगी फीस पर अमिताभ ने नापा ‘आखरी रास्ता’, लोकेशन पर हुआ डायरेक्टर से पंगा और फिर..
कमल हासन की फिल्म की रीमेक
फिल्म ‘आखरी रास्ता’ दरअसल के भाग्यराज की तमिल में लिखी फिल्म ‘ओरु कैदियन डायरी’ का रीमेक है। फिल्म के तमिल संस्करण के हीरो थे कमल हासन। ‘ओरु कैदियन डायरी’ की रीमेक फिल्म ‘आखरी रास्ता’ में तमिल फिल्म के डायरेक्टर पी भारतीराजा की बजाय फिल्म के निर्माता ए पूर्णचंद्रराव ने के भाग्यराज को फिल्म के निर्देशन का मौका दिया। फिल्म से मशहूर निर्देशक टी रामाराव प्रस्तुतकर्ता के रूप में जुड़े जो अमिताभ बच्चन को लेकर इससे पहले ‘अंधा कानून’ और ‘इंकलाब’ जैसी फिल्में निर्देशित कर चुके थे। फिल्म ‘आखरी रास्ता’ के लिए अमिताभ बच्चन को जब पूर्णचंद्र राव ने चेन्नई बुलाया तो उनके आने के पहले ही ये तय हो गया था कि ये फिल्म अमिताभ बच्चन ही करेंगे। अमिताभ को कहानी पसंद भी आई लेकिन मामला निर्देशक के नाम पर आकर अटक गया। अमिताभ बच्चन को भाग्यराज का नाम इसलिए नहीं जम रहा था क्योंकि उन्होंने इससे पहले कोई हिंदी फिल्म निर्देशित नहीं की थी और उन्हें हिंदी बोलनी भी नहीं आती थी। बहुत तर्क वितर्क हुए और आखिरकार अमिताभ बच्चन अपनी मुंहमांगी कीमत पर ही भाग्यराज के साथ काम करने को राजी हुए।
कमल हासन की फिल्म ही बंद हुई
फिल्म ‘आखरी रास्ता’ बनना आसान इसलिए भी हो गया कि उन्हीं दिनों अमिताभ बच्चन एक फिल्म ‘खबरदार’ नाम की कमल हासन के साथ करने वाले थे। ये फिल्म लगातार लेट होती जा रही थी और अमिताभ बच्चन उन दिनों प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लगातार अपने मित्र राजीव गांधी के साथ व्यस्त होते जा रहे थे। उधर ‘खबरदार’ का बनना टला और इधर अमिताभ बच्चन ने फटाक से ये सारी तारीखें फिल्म ‘आखरी रास्ता’ के लिए दे दीं। इस फिल्म की शूटिंग के बाद अमिताभ बच्चन लंबे समय तक फिल्मों से दूर रहे। बीच में अपने मित्रों के लिए वह ‘जलवा’ और ‘कौन जीता कौन हारा’ में एक दो सीन के लिए नजर तो आए लेकिन ‘आखरी रास्ता’ के बाद दो साल के लंबे अंतराल के बाद उनकी जो फिल्म रिलीज हुई थी, वह थी ‘शहंशाह’। बोफोर्स मामले में अमिताभ बच्चन के दामन पर लगे दागों को धोने में फिल्म ‘शहंशाह’ ने काफी मदद की थी।
कहानी बाप बेटे की जिद की
कहानी फिल्म ‘आखरी रास्ता’ की कुछ यूं है कि कानून के एक तरफ बुजुर्ग बाप है और दूसरी तरफ जवान बेटा है पुलिस अफसर के किरदार में। दोनों किरदार अमिताभ बच्चन ने ही किए। पहले रोल में वह डेविड हैं जिसकी खूबसूरत पत्नी पर एक नेता की नापाक नजर है। वह नेता जिसे डेविड अपना सब कुछ मानता है। धोखे से डेविड को जेल भेजने के बाद उसकी पत्नी से बलात्कार होता है और वह खुदकुशी कर लेती है। जेल से छूटा डेविड प्रण करता है कि वह इसका बदला लेगा और सरेआम लेगा। डेविड का बेटा अब तक बड़ा होकर पुलिस अफसर बन चुका है। वह बार बार डेविड के निशाने पर आए लोगों को बचाने की कोशिश करता है और हर बार मुंह की खाता है। यहां तक कि डेविड अपना आखिरी शिकार मरने से ठीक पहले भी करने में कामयाब रहता है।
अनुपम खेर को मिला था मेन विलेन का मौका
फिल्म ‘आखरी रास्ता’ में मेन विलेन का रोल सदाशिव अमरापुरकर ने किया जो नेता चतुर्वेदी के रोल में फिल्म में नजर आते हैं। ये रोल पहले अनुपम खेर को ऑफऱ हुआ था। अनुपम तब तक सुभाष घई की फिल्म ‘कर्मा’ में डॉक्टर डैंग का रोल साइन कर चुके थे और उन्हें लगा कि एक साथ दो फिल्मों में विलेन बनना उनके करियर के लिए ठीक नहीं होगा। तो उन्होंने बहुत ही चतुराई से फिल्म में डेविड के दोस्त का किरदार चुन लिया। फिल्म में जया प्रदा डेविड की पत्नी के किरदार में हैं और श्रीदेवी बनी हैं विजय की प्रेमिका। श्रीदेवी और अमिताभ की जोड़ी को लोगों ने इससे पहले फिल्म ‘इंकलाब’ में भी खूब पसंद आई थी और यहां भी दोनों की जोड़ी परदे पर खूब जमी।