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Jaane Bhi Do Yaaro: सुधीर-विनोद की कहानी के पूरे हुए 40 साल, कुंदन शाह ने मुफलिसी में बनाई क्लासिक फिल्म

Sat, 12 Aug 2023 07:16 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 12 Aug 2023 07:16 PM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla for Jaane Bhi Do Yaaro movie kundan shah Sudhir Mishra ravi Vaswani Naseeruddin
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हिंदी सिनेमा के दर्शकों को लेकर अगर आपको ये लगता है कि वे अक्सर कालजयी फिल्मों को पहचानने में भूल कर जाते हैं तो ये कोई आज का मसला नहीं बल्कि तब से चला आ रहा है जब से फिल्में बनती आ रही हैं। ‘मेरा नाम जोकर’ से लेकर ‘सदमा’ और ‘रहना है तेरे दिल’ में तक ऐसी फिल्मों की बहुत लंबी सूची है। लेकिन अगर बात आज से ठीक 40 साल पहले की करें तो 12 अगस्त 1983 को रिलीज हुई एक फिल्म के साथ भी ये हादसा हो चुका है। साल 1983 में वैसे तो फिल्म ‘हिम्मतवाला’ में श्रीदेवी का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला। इसी साल सनी देओल की भी सिनेमा में बोहनी हुई और इसी साल अमिताभ बच्चन ने फिल्म ‘कुली’ भी रिलीज हुई। साल 1983 की हिट फिल्मों की अगल तलाश करेंगे तो आपको ‘हीरो’, ‘अंधा कानून’, ‘मवाली’, ‘अवतार’, ‘सौतन’ और ‘अगर तुम ना होते’ जैसी फिल्में भी मिल जाएंगी। लेकिन, नहीं मिलेगी तो सिर्फ वो फिल्म जिसकी रिलीज के आज 40 साल पूरे हो रहे हैं। जी हां, फिल्म ‘जाने भी दो यारो’!

Bioscope with Pankaj Shukla for Jaane Bhi Do Yaaro movie kundan shah Sudhir Mishra ravi Vaswani Naseeruddin
‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कहानी दो प्रेस फोटोग्राफरों की
फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की कहानी थी भी उन लाखों, करोड़ों लोगों की जो कुछ बन पाने की जुगत में दिन रात लगे रहते हैं। ये कहानी है एक अखबार के लिए काम करने वाले दो भोले भाले लेकिन ईमानदार फोटोग्राफरों की जिनके कैमरे में एक कत्ल कैद हो जाता है। असली कातिल को पकड़ने के चक्कर में दोनों खुद बिल्डरों के काले धंधे के दलदल में आ गिरते हैं और जितना इससे निकलने की कोशिश करते हैं, उतना ही और अंदर धसते जाते हैं। कुंदन शाह ने इन दोनो को आम आदमी का नुमाइंदा बनाकर सिस्टम मे करप्शन के कपड़े बीच चौराहे उतारने की तब कोशिश की। फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की चुस्त कथा पटकथा कुंदन शाह ने सुधीर मिश्रा के साथ मिलकर लिखी और इसके जबर्दस्त संवाद लिखने का काम किया बाद में कैलेंडर बनकर मशहूर हुए अभिनेता निर्देशक सतीश कौशिक ने अपने जोड़ीदार रंजीत कपूर के साथ।

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‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

11 साल पहले फिर से हुई थी रिलीज
साल 2012 में ‘जाने भी दो यारो’ की फिर से रिलीज होने के वक्त कुंदन शाह के चेहरे पर बच्चों जैसी खुशी दिखाई दे रही थी। ये खुशी इस बात की थी कि मीडिया की जो चमक दमक कुंदन को साल 1983 में नसीब नहीं हुई थी, वह सब उनके सामने था। फिल्म की पहली रिलीज तो कब हुई और कब पिक्चर सिनेमाघरों से उतर गई, आधे हिंदुस्तान को तो पता भी नहीं चला और ये इसके बावजूद कि फिल्म को बनाया था राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम यानी एनएफडीसी ने। सरकारी दफ्तर में काम सरकारी तरीके से ही होता हैं। हालांकि, कुंदन शाह ने इस बात पर कभी गिला नहीं किया कि उनकी फिल्म को अच्छे प्रचार प्रसार के साथ रिलीज नहीं किया गया।

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‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

निर्देशक बनना किसी दिक्कत से कम नहीं
कुंदन शाह का हमेशा यही मानना रहा कि फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ अपनी पहली रिलीज में भी अपने बजट के हिसाब से अच्छा कारोबार करने में सफल रही थी। फिल्म में कोई गाना नहीं था, कोई आइटम नंबर नहीं था, हीरोइन जो थी फिल्म की वह वैम्प टाइप की थी और इसके बावजूद लोगों को ये कहानी अपनी जैसी लगी। खुद कुंदन शाह ने तब बातचीत में कहा था, ‘साल 1983 में ‘जाने भी दो यारो’  जैसी फिल्म बनाना और रिलीज करना आसान नहीं था। फिल्म के निर्देशन में मुझे बहुत दिक्कतें आईं लेकिन अब देखो तो लगता है कि किसी फिल्म का निर्देशक बन पाना ही अपने आप में किसी दिक्कत से कम नहीं है।’

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‘जाने भी दो यारो’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

चापलूसी नहीं करेगा असली निर्देशक
कुंदन ने तब कहा था, ‘असली निर्देशक कभी सितारों की चापलूसी नहीं करेगा। चापलूस निर्देशक कभी अच्छा सिनेमा नहीं बना सकता और चापलूसी पसंद करने वाला सितारा कभी जमाने का नायक नहीं बन सकता।’ फिल्म ‘जाने भी दो यारो’ की दूसरी रिलीज पर बातें करते हुए कुंदन शाह का इशारा किसकी तरफ था, उन्होंने बताया नहीं। ‘जाने भी दो यारो’ में जिस एक शख्स को सबसे ज्यादा पैसा मिला था वह थे नसीरूद्दीन शाह और साल 1983 में उनकी इस फिल्म के लिए फीस थी कुल 15 हजार रुपये। और, वह भी इस शर्त के साथ फिल्म की शूटिंग के लिए कपड़े वह घर से पहनकर आएंगे और अपना निकोन कैमरा भी साथ लेकर आएंगे, जिसे गले में लटकाकर उन्हें फिल्म में फोटोग्राफर दिखना था।

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