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Bioscope S2: जया बच्चन को इस फिल्म से मिला सुपरस्टार का दर्जा, लता मंगेशकर ने जीता नेशनल अवॉर्ड

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 04 May 2021 08:36 PM IST
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Bioscope With Pankaj Shukla Kora Kagaz Lata Mangeshkar Anil Ganguly M G Hashmat Jaya Bachchan
फिल्म कोरा कागज का पोस्टर और लता मंगेशकर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

साल 1973 में लता मंगेशकर को सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन के लिए पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला अपने गाने ‘बीती ना बिताई रैना..’ के लिए। इसे लिखा गुलजार ने और संगीत से संवारा संगीतकार आर डी बर्मन ने। लेकिन, बहनों और भाइयों जो गाना बिनाका गीत माला पर अगले साल चोटी की पायदान पर बजा यानी कि किशोर कुमार का गाया गाना ‘मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया..’, उसी फिल्म ‘कोरा कागज़’ के लिए लता मंगेशकर ने जीत लिया सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायन के लिए अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार। ये गाना था ‘रूठे रूठे पिया मनाऊं कैसे...’ और इसे लिखा था एम जी हशमत ने। संगीतकार थे कल्याणजी आनंद जी। लता मंगेशकर ने और एक नेशनल अवार्ड अपनी ही प्रोडक्शन कंपनी की फिल्म ‘लेकिन’ के गाने ‘यारा सीली सीली...’ के लिए भी जीता है। आज के बाइस्कोप में बात होगी लता मंगेशकर को उनका दूसरा नेशनल फिल्म अवार्ड दिलाने वाली फिल्म ‘कोरा कागज’ की। केंद्र सरकार ने इस फिल्म को 1974 की संपूर्ण मनोरंजनक फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी दिया। इस फिल्म के निर्देशक थे अनिल गांगुली जिनकी इसके अगले साल यानी 1975 में रिलीज फिल्म ‘तपस्या’ को भी संपूर्ण मनोरंजनक फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।



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फिल्म कोरा कागज का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

एम जी हशमत की कलम का कमाल
फिल्म ‘कोरा कागज’ के गीतकार एम जी हशमत कमाल के राइटर रहे। उन्होंने हिंदी फिल्मों में कम लिखा लेकिन जो लिखा यादगार बन गया। फिल्म ‘कोरा कागज’ के संवाद भी उनके ही लिखे हुए हैं। हिंदी फिल्मों में संवाद और गीत दोनों लिखने वाले राइटर कम ही रहे हैं। एम जी हशमत का नाम उनमें काफी सीनियर माना जाता है। वैसे तो यहां बात हम फिल्म ‘कोरा कागज’ की ही कर रहे हैं लेकिन इस फिल्म के निर्देशक अनिल गांगुली की अगली फिल्म ‘तपस्या’ के लिए लिखा उनका गाना ‘जो राह चुनी तूने, उसी राह पे राही चलते जाना रे...’ भी कम कमाल नहीं है। यहां भी आवाज़ किशोर कुमार की ही रही। फिल्म ‘कोरा कागज’ में एम जी हशमत के लिखे दो गानों की बात हम कर ही चुके हैं, एक फिल्म का टाइटल गीत और दूसरा लता का गाया वो गाना जिसने उन्हें नेशनल अवार्ड दिलाया। फिल्म का तीसरा गीत भी उन दिनों बहुत हिट हुआ था और हमारे जैसे पढ़ने से जी चुराने वाले बच्चों को तो खूब पसंद आता था...!

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फिल्म कोरा कागज का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

बांग्ला फिल्म की रीमेक
जैसा कि आपने इन गानों में देखा, फिल्म ‘कोरा कागज’ की हीरोइन हैं जया बच्चन। जया का मायका बंगाल का है और वहां उनको अब भी काफी मान सम्मान मिलता है। सत्यजीत रे की फिल्म ‘महानगर’ से उनके अभिनय की बड़े परदे पर बोहनी हुई। और, निर्देशक ऋषिकेष मुखर्जी की फिल्म ‘गुड्डी’ से हुआ उनका हिंदी सिनेमा में डेब्यू। फिल्म ‘कोरा कागज’ के निर्देशक अनिल गांगुली ने उनको देखा तो बस देखते ही रह गए। अजय कर निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘सात पाके बांधा’ उन्होंने देख रखी थी और उन्हें लगा कि सुचित्रा सेन का इस फिल्म का रोल हिंदी में जया बच्चन करेंगी तो बॉक्स ऑफिस निहाल हो जाएगा। आशुतोष मुखोपाध्याय की लिखी कहानी पर बनी ये बांग्ला फिल्म उन तमाम कालजयी बांग्ला फिल्मों में शामिल है, जिन पर हिंदी में फिल्में बनाकर दूसरे निर्देशकों ने अपने नाम की पताका देश भर फहराई।

Bioscope With Pankaj Shukla Kora Kagaz Lata Mangeshkar Anil Ganguly M G Hashmat Jaya Bachchan
फिल्म कोरा कागज का पोस्टर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अनिल गांगुली का शानदार आगाज़
फिल्म ‘कोरा कागज’ के निर्देशक अनिल गांगुली की पहचान साहित्यिक कृतियों पर ऐसी फिल्में बनाने की रही जिनके महिला किरदार दमदार होते थे। अपनी पहली ही फिल्म ‘कोरा कागज’ में उन्होंने जया बच्चन को सुपर स्टार बनाया और यही काम उन्होंने फिल्म ‘तपस्या’ में राखी के लिए किया। राजश्री प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म के लिए राखी को बेस्ट एक्टिंग का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला। ये फिल्म अनिल गांगुली ने बनाई थी आशापूर्णा देवी की लिखी कहानी पर। बाद में, अनिल गांगुली ने एक फिल्म शरत चंद्र चट्टोपाध्याय की कहानी परिणीता पर भी बनाई ‘संकोच’ के नाम से जिसमें जीतेंद्र और सुलक्षणा पंडित मुख्य भूमिकाओं में रहे। फिल्म ‘हमकदम’ को भी ध्यान से देखें तो वह सत्यजीत रे की ‘महानगर’ से प्रेरित नजर आती है। अनिल गांगुली ने ही अनिल कपूर और अमृता सिंह की हिट फिल्म ‘साहेब’ भी निर्देशित की है। 

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फिल्म कोरा कागज का दृश्य - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

इस तरह से मिले विजय आनंद
फिल्म ‘कोरा कागज’ में जया बच्चन को अनिल गांगुली ने बतौर हीरोइन ले तो लिया लेकिन उनके सामने हीरो तलाशने में उनकी चप्पलें घिस गईं। कहानी के हिसाब से एक अधेड़ अभिनेता चाहिए था जो जया से उम्र में बड़ा दिखे। उस समय के चोटी के सितारों सुनील दत्त, राजेंद्र कुमार, देव आनंद आदि ने अनिल गांगुली को घास तक नहीं डाली। नए छोकरे जो उन दिनों लाइमलाइट में चमकने लगे थे, उनमें विजय अरोड़ा, रोमेश शर्मा और अनिल धवन को लेकर बात चली तो वे अनिल गांगुली को नहीं जमे। जया की सलाह पर अनिल गांगुली ये रोल लेकर संजीव कुमार से मिलने गए। बताते हैं कि संजीव कुमार को रोल पसंद भी आया लेकिन उन दिनों उनकी डायरी अगले दो साल तक के लिए फुल चल रही थी और अनिल गांगुली बरसों की मेहनत के बाद मिले फिल्म निर्देशन के इस मौके को मुल्तवी नहीं कर सकते थे। बताते हैं कि संजीव कुमार के कहने पर ही अनिल गांगुली ने निर्देशक विजय आनंद से इस फिल्म में अभिनय की विनती की और वह मान भी गए।

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