हिंदी सिनेमा में निर्माता गुलशन राय का नाम सब जानते हैं। अमिताभ बच्चन के करियर को दिशा देने वाली दो फिल्मों ‘दीवार’ और ‘त्रिशूल’ के निर्माता वही रहे। और भी तमाम फिल्में उन्होंने दूसरे निर्देशकों और सुपरस्टार्स के साथ बनाईं। इन फिल्मों से गुलशन राय के बेटे राजीव राय करीब से जुड़े रहे और जब वह खुद फिल्म निर्देशन करने के काबिल हुए तो गुलशन राय ने उन्हें सौंपे उस वक्त के दो उभरते कलाकार जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर। फिल्म का नाम था, ‘युद्ध’’। ये फिल्म पहले संजय दत्त और राज किरन के साथ बननी थी। फिल्म लॉन्च भी हुई गुलशन राय की सुपर डुपर हिट फिल्म ‘विधाता’ के साथ ही। फिल्म का मुहूर्त क्लैप देने खुद सुनील दत्त आए थे। लेकिन, उन्हीं दिनों संजय दत्त नशे की गिरफ्त में आए। इसी फिल्म की स्क्रिप्ट सुनकर लौटते समय उनका एक्सीडेंट भी हुआ। और, गुलशन राय ने उन्हें फिल्म से निकाल दिया।
Bioscope S2: गुलशन राय ने संजू को इसलिए निकाल दिया था फिल्म ‘युद्ध’ से, जैकी-अनिल की सुपरहिट फिल्म
जैकी और अनिल की हिट जोड़ी
फिल्म ‘युद्ध’ की शूटिंग जब शुरू हुई तो जैकी श्रॉफ की बतौर हीरो पहली फिल्म ‘हीरो’ रिलीज हो चुकी थी। अनिल कपूर इस लिहाज से जैकी श्रॉफ से थोड़ा सीनियर हैं कि उनकी फिल्में जैकी श्रॉफ की पहली फिल्म ‘स्वामी दादा’ से भी पहले आने लगी थीं। निर्देशक बापू की हिंदी फिल्म ‘हम पांच’ में वह साल 1980 में ही दिख चुके थे। बतौर हीरो उनकी पहली फिल्म ‘वंशवृक्षम’ (तेलुगू) भी रिलीज हो चुकी थी। हां, दोनों को देश के घर घर में पहचान दिलाने वाली फिल्में ‘हीरो’ और ‘वो सात दिन’ जरूर एक ही साल 1983 में रिलीज हुईं। ‘हीरो’ का जय किशन उर्फ जैकी दादा सबको खूब भाया तो ‘वो सात दिन’ के प्रेम प्रताप पटियालावाले ने अपने भोलेपन से लोगों का दिल जीत लिया। दोनों ने एक साथ पहली बार 1984 में रिलीज हुई फिल्म ‘अंदर बाहर’ में एक साथ काम किया। मुन मुन सेन के साथ मिलकर दोनों ने इस फिल्म में ऐसा धमाल मचाया कि दोनों की जोड़ी की गिनती सबसे कमाल जोड़ी के रूप में होनी लगी। फिल्म ‘युद्ध’ दोनों की एक साथ बनी दूसरी फिल्म थी।
अनिल कपूर का डबल रोल
जैकी श्रॉफ और अनिल कपूर ने ‘अंदर बाहर’ और फिल्म ‘युद्ध’ के बाद आगे चलकर ‘कर्मा’, ‘काला बाजार’, ‘परिंदा’, ‘राम लखन’, ‘रूप की रानी चोरों का राजा’, ‘1942 ए लव स्टोरी’, ‘त्रिमूर्ति’, ‘कभी हां कभी ना’, ‘लज्जा’ और ‘शूट आउट एड वडाला’ में साथ काम किया है। ये बात कम लोगों को ही पता होगी कि अनिल कपूर असल जिंदगी में जैकी श्रॉफ से बड़े हैं। लेकिन, जब भी फिल्मों में दोनों भाई बने, अनिल कपूर ने हमेशा छोटे भाई का ही रोल किया है। दोनों के बीच कोई 38 दिनों की छोटाई बड़ाई है। फिल्म ‘अंदर बाहर’ की ही तरह फिल्म फिल्म ‘युद्ध’ में भी जैकी श्रॉफ ने पुलिस इंस्पेक्टर का रोल किया और अनिल कपूर बने क्रिमिनल। हालांकि फिल्म ‘युद्ध’ में अनिल कपूर का डबल रोल है। एक कानून के इस तरफ तो दूसरा कानून के उस तरफ। फिल्म का सस्पेंस भी इसी से आता है।
अरुण गोविल भी खास भूमिका में
फिल्म ‘युद्ध’ में एक मेहमान भूमिका धारावाहिक रामायण के राम यानी अभिनेता अरुण गोविल ने भी निभाई। ये रोल उन्होंने रामायण का प्रसारण शुरू होने से पहले निभाया, उन दिनों अरुण गोविल छोटे परदे पर खूब काम किया करते थे और छोटे परदे के मशहूर कलाकारों को फिल्मों में खास रोल देने का उन दिनों चलन हुआ करता था। फिल्म ‘युद्ध’ में अरुण गोविल ने एक पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया, जिसके बेटे का किरदार आगे चलकर जैकी श्रॉफ ने निभाया। अरुण गोविल की इस फिल्म में एंट्री की अजब कहानी है। इस रोल के लिए पहले सुरेश ओबेरॉय को साइन किया गया था लेकिन एक दिन कहीं उन्होंने बयान दे दिया कि उन्हें स्टार पुत्रों की नई खेप से कोई डर नहीं लगता। बस गुलशन राय ने इतनी सी बात पर सुरेश ओबेरॉय को फिल्म से निकाल बाहर किया और उनकी जगह अरुण गोविल को ले लिया।
चलते चलते...
फिल्म ‘युद्ध’ की शुरुआत महाभारत में अर्जुन को उपदेश देते कृष्ण की तस्वीर से होती है और पीछे से अमित कुमार की आवाज में गाने के बोल कहते हैं, ‘डंके में चोट पड़ी है, सामने फौज खड़ी है, किशन ने कहा अर्जुन से, ना प्यार जता दुश्मन से, युद्ध कर…..’, फिल्म ‘युद्ध’ की कहानी भी कुछ ऐसे ही आगे बढ़ती है कि पुलिस इंस्पेक्टर विक्रम को लगता है कि शहर में हो रहे अपराधों में उसकी पहचान के अविनाश राठौड़ का ही हाथ है। वह समझ नहीं पाता कि करे तो क्या करे? हालांकि हकीकत में ये अपराध अविनाश का हमशक्ल उसका जुड़वा भाई कर रहा होता है जिसका बचपन में अपहरण कर लिया गया था। फिल्म में प्राण ने पुलिस उपायुक्त का जानदार और शानदार किरदार किया है। फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा और हेमा मालिनी खास भूमिकाओं में हैं। फिल्म की लीड हीरोइन थीं टीना मुनीम (अब, अंबानी)। फिल्म फिल्म ‘युद्ध’ में जैकी श्रॉफ और टीना मुनीम के बीच एक बेहद रोमांटिक गाना भी फिल्माया गया है। फिल्म में संगीत कल्याणजी आनंद जी का है।
(‘बाइस्कोप’ कॉलम में प्रकाशित यह आलेख बौद्धिक संपदा अधिकारों के तहत संरक्षित हैं।)
