विजय: ज़रा ठीक से साफ कीजिए कोई देखेगा तो समझेगा कि आप के हाथ ख़ून से रंगे हैं..
Bioscope S2: मिथुन के हाथों से यूं निकल गई अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘त्रिशूल’, खय्याम का कमाल संगीत
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अमिताभ की बुलंदी का साल
अमिताभ बच्चन, शशि कपूर और संजीव कुमार स्टारर फिल्म ‘त्रिशूल’ 5 मई 1978 को रिलीज हुई और इसने उस साल कमाई में दूसरा नंबर पाया था। उस साल पहले नंबर पर भी अमिताभ बच्चन की ही फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ रही और तीसरे नंबर पर जो फिल्म कमाई के मामले में 1978 में थी, वह फिल्म भी अमिताभ बच्चन की ही फिल्म थी, ‘डॉन’। उस साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 10 हिंदी फिल्मों में अमिताभ बच्चन की दो और फिल्में ‘कसमे वादे’ और ‘गंगा की सौगंध’ भी शामिल रहीं। पांच फिल्में, पांच किरदार और पांचों के तेवर जुदा जुदा। ये ही वो मील के पत्थर हैं जिन्हें पार करके अमिताभ बच्चन 20वीं सदी के महानायक कहलाए। ये तमगा उन्हें बीबीसी के एक ऑनलाइन पोल में मिला था। सदी बदल चुकी है लेकिन सदी के महानायक का ये तमगा उनके साथ इस नई सदी में भी चला आया है।
निर्माता गुलशन राय ने रिजेक्ट कर दी फिल्म
फिल्म ‘त्रिशूल’ के 75 फीसदी के करीब बन जाने के बाद इस फिल्म में कोई करंट ही इसके निर्माता गुलशन राय को नजर आ रहा था। हुआ यूं कि राजकमल स्टूडियो में फिल्म का ट्रायल रखा गया। फिल्म खत्म हुई तो गुलशन राय, निर्देशक यश चोपड़ा और फिल्म की लेखक जोड़ी सलीम-जावेद सब एक ही गाड़ी से निकले। काफी लंबा रास्ता तय करने के बाद गुलशन राय ने पूछा कि इस फिल्म का क्या कर सकते हैं, इसे रिलीज करेंगे तो पिक्चर चलेगी ही नहीं। इस पर सलीम खान बोले, ‘तो मत रिलीज कीजिए ये फिल्म। सबसे आसान तरीका यही है इसको फ्लॉप होने से बचाने का।’ उस वक्त तो गुलशन राय कुछ बोले नहीं। बाद में फिल्म के निर्देशक यश चोपड़ा को उन्होंने फोन किया और इसकी शिकायत की कि ये क्या तरीका होता है बात करने का। तो यश चोपड़ा ने बात बनाई कि सलीम खान की तो आदत है मज़ाक करने की।
फिर सलीम-जावेद ने मिलाए ये मसाले
अगले दिन यश चोपड़ा और सलीम जावेद होटल हॉलीडे इन में मिले और ये तय हुआ कि गुलशन राय ऐसे मानेंगे नहीं और फिल्म अगली बार अगर वह वितरकों को दिखाते हैं तो इसमें थोड़ा मसाला मिलाना जरूरी है। तय हुआ कि इसमें कुछ एक्शन और इमोशन इफरात में डाल दिया जाए। कुछ और बदलाव भी तय हुए और 15 दिन की शूटिंग यश चोपड़ा ने फिल्म की फिर से तय की की। गुलशन राय को बताया यही गया कि सिर्फ पांच दिन की शूटिंग और करेंगे तो फिल्म ठीक हो जाएगी। ये पांच दिन खत्म हुए तो फिर पांच दिन और फिर पांच दिन और, इस तरह से गुलशन राय को मनाया गया। फिल्म ‘त्रिशूल’ एक तरह से सलीम जावेद का भी लिटमस टेस्ट रही। अमिताभ के साथ वह ‘जंज़ीर’, ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी सुपरहिट फिल्में बना चुके थे और यहां एक निर्माता को ये शक़ था कि फिल्म रिलीज हुई तो चलेगी नहीं।
अमिताभ की बाहों में पूनम ढिल्लों
सलीम-जावेद ने होटल हॉलीडे इन में अपना तुरुप का पत्ता फेंक दिया था और फिल्म में आया वो एंबुलेंस वाला सीन जिसमें दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। इस सीन में इस फिल्म लॉन्च हो रही पूनम ढिल्लो को घायल हालत में उठाकर अमिताभ घर ले जाते हैं। बरसों बाद पूनम ढिल्लों ने ये राज खोला था कि तब उनकी सहेलियां उनसे पूछा करती थीं कि आखिर कैसा महसूस होता है अमिताभ बच्चन की बाहों में होना। पूनम तब सिर्फ 16 साल की थीं जब उन्होंने ‘मिस इंडिया’ का खिताब जीता। यश चोपड़ा ने उनका एक मैगजीन के कवर पर देखा और पहुंच गए उनके घर पर पूनम को साइन करने। पूनम ढिल्लों के माता पिता कतई नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी फिल्मों में काम करे लेकिन यश चोपड़ा ने किसी तरह उन्हें मना ही लिया। फिल्म में पूनम की जोड़ी बनी थी सचिन के साथ और दोनों ने अपनी मोहब्बत के इज़हार में जो गाना गाया, ‘गापूची गापूची गम गम’, वो उस साल का सुपर हिट गाना हुआ। फिल्म में मोहब्बत के इज़हार के दो और गानों की बात हम करेंगे लेकिन पहले बात मिथुन चक्रवर्ती की जो अगर थोड़ा पहले सलीम खान को मिले होते तो सचिन की जगह इस फिल्म के तीसरे हीरो होते।

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