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ये महिला जीतकर लाई भारत में पहला ऑस्कर और फिर हुआ कुछ ऐसा कि...
Sun, 28 Apr 2019 11:06 AM IST
anand anand
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sun, 28 Apr 2019 11:06 AM IST
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Bhanu Athaiya
- फोटो : social media
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ऑस्कर एक ऐसा अवार्ड जिसे पाने की तमन्ना फिल्मी दुनिया से जुड़े हर शख्स की होती है, पर एक महिला ऐसी भी हैं जिन्होंने ये अवार्ड जीतने के बाद अकादमी को फिर से वापस कर दिया, नाम है भानु अथैय्या। जीवन के 90वें बसंत में कदम रखने जा रही भानु ने गुरुदत्त, यशराज, राज कपूर, आशुतोष गोवारिकर, कोनार्ड रुक्स और रिचर्ड एटनबरो जैसे कई नामचीन फिल्मकारों के साथ काम किया है।
Bhanu Athaiya
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सात भाई-बहनों में तीसरी भानु ने तमाम पत्रिकाओं में फैशन इलस्ट्रेटर के तौर पर फ्रीलांसिंग की है और एक पत्रिका के संपादक के सुझाव पर ही इन्होंने फिल्मों की कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग की शुरूआत की। 1952 में आई गुरुदत्त की फिल्म सीआईडी में भानु को पहली बार कॉस्ट्यूम डिजाइनर के तौर पर मौका मिला। इस दौर में उन्होंने प्यासा, साहब बीवी और गुलाम, हेरा फेरी और मिस्टर नटवरलाल जैसी तमाम फिल्मो में काम किया।
Bhanu Athaiya
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हॉलीवुड निर्देशक रिचर्ड एटनबरो जब फिल्म 'गांधी' बनाने के लिए भारत आये तो उन्हें किसी ऐसे कॉस्ट्यूम डिजानर की तलाश थी जो महात्मा गांधी की विस्तृत जीवन यात्रा के सारे पहलुओं को ध्यान में रखकर फिल्म के सभी पात्रों के कपड़े डिजाइन कर सके। उनकी यह तलाश पूरी हुई भानु अथैय्या से मिलकर।
1983 के ऑस्कर समारोह को याद करते हुए भानु बताती हैं, ''समारोह के लिए जाते समय गाड़ी में मेरे साथ फिल्म के लेखक जॉनी ब्रिले भी थे। उन्होंने कहा कि ये अवार्ड तुम्हें ही मिलेगा।'' उस समय ऑस्कर समारोह में बैठे दूसरे डिज़ायनर्स भी यही कह रहे थे कि अवार्ड मुझे ही मिलेगा। इस पर मैंने पूछा कि आप ऐसा इतने विश्वास से कैसे कह सकते है?
1983 के ऑस्कर समारोह को याद करते हुए भानु बताती हैं, ''समारोह के लिए जाते समय गाड़ी में मेरे साथ फिल्म के लेखक जॉनी ब्रिले भी थे। उन्होंने कहा कि ये अवार्ड तुम्हें ही मिलेगा।'' उस समय ऑस्कर समारोह में बैठे दूसरे डिज़ायनर्स भी यही कह रहे थे कि अवार्ड मुझे ही मिलेगा। इस पर मैंने पूछा कि आप ऐसा इतने विश्वास से कैसे कह सकते है?
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Bhanu Athaiya
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इस सवाल पर उन लोगों ने मुझे जवाब दिया कि आपकी फिल्म का दायरा इतना बड़ा है कि उससे हम प्रतियोगिता ही नहीं कर सकते। 1983 में फिल्म 'गांधी' के लिए ऑस्कर जीतने के साथ ही भानु अथैय्या को ऑस्कर में नामांकित की जाने वाली विभिन्न फिल्मों को वोट करने का अधिकार भी मिल गया।
इसके बाद इन्होंने राम तेरी गंगा मैली, हीरो हीरालाल, अग्निपथ, चांदनी, लगान और स्वदेश जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया। 1991 में गुलज़ार द्वारा निर्देशित फिल्म 'लेकिन' और 2003 में आशुतोष गोवारिकर द्वारा निर्देशित 'लगान' के लिए भानू अथैय्या को बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर का राष्ट्रीय पुरष्कार भी मिल चुका है।
इसके बाद इन्होंने राम तेरी गंगा मैली, हीरो हीरालाल, अग्निपथ, चांदनी, लगान और स्वदेश जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम किया। 1991 में गुलज़ार द्वारा निर्देशित फिल्म 'लेकिन' और 2003 में आशुतोष गोवारिकर द्वारा निर्देशित 'लगान' के लिए भानू अथैय्या को बेस्ट कॉस्ट्यूम डिजाइनर का राष्ट्रीय पुरष्कार भी मिल चुका है।
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भारतीय सिनेमा में लगभग 67 साल से काम कर रही भानु ने कवि और हिंदी फिल्मों के गीतकार सत्येंद्र अथैय्या से शादी की, दोनों की एक बेटी भी है। वर्ष 2012 में भानु अथैय्या ने 1983 में जीते ऑस्कर को लौटाने की घोषणा की। उनका मानना था कि उनके परिवार वाले और भारत सरकार उनके इस अमूल्य अवार्ड के रख-रखाव में सक्षम नहीं हैं इसलिए यह अवार्ड अकादमी के संग्रहालय में ही सबसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित रहेगा।