सिनेमा और रंगमच के अभिनेता सदाशिव अमरापुरकर ने लगभग दो दशकों तक अपनी बहुमुखी प्रतिभा से सिनेप्रेमियों का मनोरंजन किया है। वह ऐसे कलाकार रहे जिन्होंने नकारात्मक किरदार करके लोगों की रूह कंपा दी और कॉमेडी किरदार करके लोगों को ठहाके लगाने पर भी मजबूर किया। वह भले ही अब इस दुनिया का हिस्सा नहीं है लेकिन उनकी फिल्मों के जरिए वह हमेशा ही लोगों के जेहन में बने रहेंगे। आज हम आपको उनके कुछ ऐसे किरदारों के बारे में बताते हैं जिन्होंने इस कलाकार को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।
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किरदार : रामा शेट्टी
फिल्म : अर्ध सत्य (1984)
इस फिल्म के निर्देशक गोविंद निहलानी लोकल माफिया डॉन रामा शेट्टी के किरदार के लिए एक नए कलाकार को चाहते थे लेकिन उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि वह किसे लें। फिल्म के पटकथा लेखक विजय तेंदुलकर ने उन्हें सुझाव दिया कि वह उनके साथ थिएटर में चलकर एक मराठी नाटक देखें। वह दोनों जब सदाशिव अमरापुरकर के नाटक 'हैंड्स अप' को देखने गए तो सदाशिव के अभिनय से वे बहुत प्रभावित हुए। तब सदाशिव को इस फिल्म में किरदार मिला। सदाशिव ने इस किरदार को इतनी बेहतरी से निभाया के सहायक कलाकार के रूप में उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।
किरदार : फिल्म निर्माता चंद्रन
फिल्म : खामोश (1985)
विधु विनोद चोपड़ा के निर्माण और निर्देशन में बनी इस फिल्म में बड़े-बड़े कलाकारों की एक टुकड़ी थी। इसमें अमोल पालेकर, नसीरूद्दीन शाह, शबाना आजमी, पंकज कपूर, सोनी राजदान, सुषमा सेठ, पवन मल्होत्रा, अवतार गिल, सुधीर मिश्रा और सदाशिव अमरापुरकर मुख्य हैं। सदाशिव उस समय तक इतने मशहूर नहीं थे फिर भी उन्होंने अपने अभिनय के दम पर इतने बड़े कलाकारों के बीच एक अलग पहचान बनाई। उन्होंने इस फिल्म में एक फिल्म निर्माता का किरदार निभाया है जो बहुत ही प्रभावशाली था।
किरदार : दीनबंधु दीनानाथ
फिल्म : हुकूमत (1987)
सदाशिव अभी तक बहुत मशहूर नहीं हुए थे। इस फिल्म को जब उन्होंने साइन किया था उस वक्त उन्होंने सिनेमा में कदम रखा ही था। फिल्म 'अर्ध सत्य' के बाद उनके लिए यह बहुत ही महत्वपूर्ण फिल्म रही। उन्होंने इस फिल्म में मुख्य विलेन का किरदार निभाया। एक विलेन के रूप में वे इतने खतरनाक दिखे कि उस समय के सबसे खतरनाक खलनायको में उनकी गिनती होने लगी थी। फिल्म में मंगल सिंह से दीनबंधु दीनानाथ बनने तक उनका अभिनय काबिले तारीफ रहा।
किरदार : महारानी
फिल्म : सड़क (1991)
इस फिल्म के हीरो तो संजय दत्त हैं लेकिन फिल्म को सदाशिव अमरापुरकर के शानदार अभिनय के लिए याद किया जाता है। सदाशिव ने फिल्म में एक ट्रांसजेंडर महारानी का ऐसा किरदार निभाया है जिससे लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। संजय दत्त उन दिनों ड्रग्स का नशा करते थे तब उन्होंने झोपड़पट्टी इलाके में महारानी जैसा एक किन्नर देखा था। वह किरदार उनके जेहन में घर कर गया था इसलिए उन्होंने इसके बारे में फिल्म के निर्देशक महेश भट्ट को बताया। महेश भट्ट ने ऐसा ही किरदार अपनी फिल्म में ईजाद किया और उसे निभाया सदाशिव अमरापुरकर ने। इस बेहतरीन प्रस्तुति के लिए सदाशिव को सर्वश्रेष्ठ खलनायक के फिल्मफेयर अवार्ड से नवाजा गया था।