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क्या बॉलीवुड में आइडिया खत्म हो गए हैं, क्यों बढ़ रहे रीमेक, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

Wed, 20 Feb 2019 04:06 PM IST
anand anand एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: anand anand Updated Wed, 20 Feb 2019 04:06 PM IST
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हिंदी सिनेमा में रीमेक का दौर बड़ी तेजी से आया। इसलिए आज के जमाने में हिंदी सिनेमा को बॉलीवुड कहना तर्कसंगत लगता है। गौरतलब है कि पुरानी फिल्म 'पति-पत्नी और वो' के आधिकारिक ऐलान के बाद फिल्म 'चुपके-चुपके', 'कुली नंबर 1' और 'राम लखन' का भी रीमेक बनाया जाना है। फिल्ममेकर हिंदी सिनेमा की पुरानी किताबों को नया कर दर्शकों को पेश रहे हैं। मगर देखने वाली बात तो यह होगी कि क्या दर्शक इन रीमेक फिल्मों को स्वीकार करेंगे या नहीं। बता दें कि साल 2018 में बॉलीवुड में रीमेक और सीक्वल ही देखने को मिले। ऐसे में साल 2019 में बॉलीवुड के सामने नई-नई कहानियों को पेश करने की चुनौती होगी क्या वाकई में फिल्ममेकर रीमेक के जंजाल से खुद को बचा पाएंगे?

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बता दें कि 1978 में रिलीज हुई  संजीव कुमार, विद्या सिन्हा और रंजीता की फिल्म 'पति-पत्नी और वो' का निर्देशन बी आर चोपड़ा ने किया था। फिल्म बहुत सुपरहिट रही थी। यही वजह है कि फिल्म के रीमेक पर काम किया जा रहा है। ट्रेड एनालिस्ट आमोद मेहरा का मानना है 'किसी भी पुरानी फिल्म का रीमेक बनाने के लिए फिल्ममेकर को तैयार होने की जरूरत होती है और जहां तक सवाल दर्शकों का है तो बता दें कि वह रीमेक से ज्यादा नई कहानियों पर अपना समय और पैसा खर्च करती है। गौरतलब है कि इसका रीमेक मुदस्सर अजीज बना सकते हैं।

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उन्होंने आगे कहा इससे भी ज्यादा ये जरूरी है कि किसी फिल्ममेकर की नई और रीमेक कहानी दर्शकों को कितना एंटरटेन कर रही है।, लेकिन आमोद का आखिर में यही मानना है कि फिल्ममेकर को किसी भी फिल्म के रीमेक को ज्यादा घुमा-फिराकर पेश नहीं करना चाहिए। अगर किसी हिट फिल्म का रीमेक जैसे डॉन और अग्निपथ तो एक बार को दर्शकों को जरूर लुभाए, लेकिन इसका एक अपवाद अमिताभ बच्चन की फिल्म जंजीर रही जो रीमेक में बड़ी फ्लॉप साबित हुई। इसका कारण यही रहा कि फिल्म की पूरी कहानी तोड़मरोड़ दी गई थी।

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अमिताभ बच्चन और रेेखा

फिल्म अक्टूबर और पीकू की कहानी लिखने वालीं जूही चतुर्वेदी कहती हैं 'किसी भी फिल्म का रीमेक बनाने से पहले यह बात ध्यान में रहनी चाहिए कि हद से ज्यादा ऑरिजिनल स्टोरी से खेला ना जाए बल्कि जब किसी क्लासिक फिल्म का रीमेक बनाया जाता है तो उसे ऑरिजिनल से भी अच्छा करने की कोशिश होनी चाहिए।' जूही ने आगे कहा 'इस कड़ी में कईयों का मानना है कि क्लासिक फिल्मों के रीमेक बनाना तर्कसंगत नहीं लगता। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पाथेर पंचाली, जाने भी दो यारो,  मासूम, अर्थ, एल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है और मिर्च मसाला जैसी फिल्मों के अगर रीमेक बनाए गए तो यह इनके साथ न्याय नहीं हो पाएगा। 

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the accidental prime minister - फोटो : twitter

वहीं, फिल्म न्यूटन और द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर के स्क्रिप्ट राइटर मयंक तिवारी का मानना है कि बॉलीवुड के इस दौर में क्लासिक फिल्मों का रीमेक बनाना उनके लिए सरासर अन्याय ही होगा। फिल्म मनमर्जिया और केदारनाथ की लेखिका कनिका ढिल्लन भी कहती हैं कि खुद की लिखी कहानियों से ज्यादा खुशी की बात कोई होती ही नहीं है।  बता दें कि नये जमाने के बॉलीवुड में कर्मशियल फिल्में ऑरिजिनल कंटेंट की हत्या कर सकती हैं और कर भी रही हैं, खासतौर पर तब जब फिल्ममेकर्स क्लासिक फिल्मों के सहारे पैसा बनाने की सोचते है, लेकिन मुदस्सर अजीज इस बात से सहमत नहीं है वह कहते हैं कि ऑस्कर् अवॉर्ड के लिए चुनी गई हॉलीवुड फिल्म 'ए स्टार इज बोर्न' एक रीमेक फिल्म है और फिल्ममेकर ने इस फिल्म के साथ न्याय करते हुए इसे नई-नई बातों से जोड़ा है।

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