बॉलीवुड एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां कई बार ऐसे विषयों पर भी कहानी बनाई जाती है जिस पर समाज खुले तौर पर बात करने से भी हिचकिचाता है। हिंदी सिनेमा में सिर्फ नाच गाना या मसालेदार फिल्में ही नहीं बनी हैं,बल्कि कुछ ऐसी फिल्मों का भी निर्माण हुआ है जिसने दर्शकों को चौंका दिया है। सैमलैंगिकता से लेकर प्यार और दोस्ती के अनोखे रिश्तों पर कई बार बॉलीवुड में बेहतरीन कहानियां बनाई गईं हैं।
बॉलीवुड: अपने समय से आगे की थीं ये फिल्में, दर्शक हुए थे प्रभावित
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माई ब्रदर निखिल
ओनिर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में एचआईवी एड्स जैसा मुद्दा दिखाया गया था। ये फिल्म उस वक्त बनी थी जब इस बारे में सार्वजनिक तौर बात करने के बारे मे लोग सोचते भी नहीं थे। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे निखिल के एचआईवी पॉजिटिव होने की खबर जानकर उसके घर वाले उसे घर से बाहर कर देते हैं। उसे स्वीम टीम से बाहर कर दिया जाता है। उसे वो सब झेलना पड़ता है जो असल जिंदगी में लोगों के साथ उनकी बीमारी जानने के बाद व्यवहार किया जाता है। ये फिल्म साल 2005 में रिलीज हुई थी। फिल्म में जुही चावला अहम भूमिका में नजर आईं थीं।
क्या कहना
कुंदन शाह के निर्देशन में बनी फिल्म क्या कहना को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। ये फिल्म साल 2002 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में प्रीति जिंटा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हमारे देश में आज भी लोग टीनएज प्रेग्नेंसी की बातें करने मे हिचकिचाते हैं, लेकिन इस फिल्म में ऐसी ही लड़की की कहानी दिखाई गई थी जिसे गर्भवती होने के बाद समाज के ताने सहने पड़ते है जबकि उसके प्रेमी को कोई कुछ नहीं कहता है। हालांकि उसका परिवार उसका सहारा बनता है और मजबूती से खड़ा होना सिखाता है।
दिल चाहता है
फरहान अख्तर द्वारा निर्देशित की गई इस फिल्म में तीन दोस्तों की कहानी दिखाई गई थी। प्यार और दोस्ती के रिश्तों से सजी इस फिल्म ने दर्शकों को बहुत सीख दी थी। इस फिल्म में अक्षय कुमार ने एक ऐसे लड़के का किरदार निभाया था जिसे अपने से 10-15 साल बड़ी महिला से प्यार हो जाता है। ये बात जब वो अपने दोस्तों और मां को बताता है तो कोई भी ये बात नहीं समझ पाता है। इसके अलावा बाकी दोस्त भी जिंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों से दोस्ती और प्यार का असली मतलब समझ पाते हैं। साल 2001 में बनी इस फिल्म की कहानी आज भी बेहद ताजा लगती है।
मॉनसून वेडिंग
मीरा नायर द्वारा निर्देशित ये फिल्म नाम से किसी शादी की कहानी लगती है जबकि फिल्म का मर्म कुछ और ही है। इस फिल्म में चाइल्ड अब्यूज के मुद्दे को उठाया गया था। फिल्म में शेफाली शाह ने एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया था जिसका बचपन में उसके अंकल ने यौन शोषण किया होता है, लेकिन वो अपने परिवार से इस बार में कुछ नहीं कहती है। आज भी लोग बच्चों की बात को अनसुना कर उन्हें डांटने फटकारने लगते हैं। इस फिल्म ने ये ही सीख देने की कोशिश की थी कि अपने बच्चे की बात पर ध्यान देना कितना जरूरी है।