फिल्मों की यह रंगीन दुनिया अक्सर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती है। फिल्मी गलियारों में मनोरंजन जगत से जुड़े किस्से और कहानियां अक्सर सुनने को मिलते रहते हैं। लोग भी अपने पसंदीदा सितारों से जुड़े इन किस्सों के बारे में जानने के लिए काफी उत्सुक रहते हैं। ऐसे में लोगों की दिलचस्पी को देखते हुए अमर उजाला ने बॉलीवुड गॉसिप्स नाम की एक सीरीज की शुरुआत की है, जिसे पढ़कर आप ना सिर्फ हैरान होंगे बल्कि चौंकेंगे भी। सीरीज की अगली कड़ी में आज बात करेंगे बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के जीवन से जुड़ा उस पहलू की जब उनकी एक फिल्म को रिलीज कराने के लिए देश के उस समय के प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
Bollywood Gossips: जब दिलीप कुमार के गले की फांस बन गई थी यह फिल्म, फिर पीएम नेहरू ने संकटमोचक बन संभाली कमान
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हम आज अपनी इस सीरीज से आपको उस दौर में लेकर चलेंगे जब दिलीप कुमार बॉलीवुड इंडस्ट्री में बतौर अभिनेता छा चुके थे। लेकिन अभिनेता के रूप में खुद को स्थापित करने के बाद उन्होंने अपने आपको इस फिल्मी दुनिया में बतौर प्रोड्यूसर भी एक मुकाम तक पहुंचाने का मन बना लिया था। अपने इस सफर की शुरुआत करने के लिए सुपरस्टार दिलीप कुमार ने फिल्म 'गंगा जमुना' को चुना था। इस फिल्म में वह न केवल प्रोड्यूसर की भूमिका में थे बल्कि लीड किरादर भी वही निभा रहे थे। हालांकि इस फिल्म को टिकट खिड़की तक पहुंचाने के लिए उन्हें इतने पापड़ बेलने पड़े कि उन्होंने दोबारा फिल्म बनाने से तौबा कर ली। दरअसल, दिलीप कुमार की बतौर प्रोड्यूसर पहली ही फिल्म सेंसर बोर्ड के पचड़े में फंस गई थी, जो उनके लिए गले की फांस साबित हुआ था।
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दरअसल, पूरी तरह से बनकर तैयार होने के बाद 'गंगा जमुना' जब सेंसर बोर्ड के दरवाजे पर पहुंची तो फिल्म के साथ-साथ दिलीप कुमार को जोरों का झटका लगा था। उस वक्त सूचना और प्रसारण मंत्री बीवी केसकर और उनके अंतर्गत काम करने वाले सेंसर बोर्ड को जब 'गंगा जमुना' फिल्म दिखाई गई तो उन्होंने इसमें अश्लीलता और हिंसा का हवाला देते हुए 250 कट लगाने की सिफारिश की थी। सेंसर बोर्ड का कहना था कि फिल्म में जरूरत से ज्यादा अश्लीलता और हिंसा दिखाई गई है। इस तरह की सिफारिश सामने आने के बाद दिलीप कुमार की लाख कोशिशों के बाद भी सेंसर बोर्ड ने अपना फैसला नहीं बदला।
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दिलीप कुमार ने फिल्म को बिना बदलाव के रिलीज कराने के सारे तिगड़म अपना लिए थे, लेकिन एक भी उनके काम नहीं आया था। ऐसे में इसके बाद इंदिरा गांधी ने दिलीप कुमार की तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ 15 मिनट की मीटिंग तय कराई। दिलीप ने नेहरू से मुलाकात कर मदद की गुहार मांगी थी। तब जाकर दिलीप कुमार की यह फिल्म रिलीज हो पाई थी। दरअसल, इस मीटिंग में दौरान दिलीप कुमार ने प्रधानमंत्री को अपनी परेशानी बताई और सेंसर बोर्ड के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए थे। दिलीप कुमार ने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड ने तानाशाहों की तरह व्यवहार किया है और उनकी तरफ से दिए गए किसी भी तर्क पर गौर नहीं किया।
प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने दिलीप कुमार की तरफ से उठाए गए सभी सवालों को ध्यान से सुना था। इसका नतीजा यह हुआ कि जो मीटिंग 15 मिनट चलने वाली थी वो तकरीबन एक घंटे तक चली थी। इसके बाद नेहरू ने तुरंत दिलीप कुमार के नेतृत्व में बनी पहली फिल्म 'गंगा जमुना' की रिलीज को खुद से अनुमति दे दी। इतना ही नहीं दिलीप की तरफ से उठाए गए सवालों पर भी उन्हें गौर किया था, जिसका नतीजा यह हुआ कि इसके बाद बीवी केसकर को मंत्रालय से हटा दिया गया था। आपको बता दें, सेंसर बोर्ड के कारण यह फिल्म तकरीबन छह महीने से भी ज्यादा समय तक लटकी रही थी। 'गंगा जमुना' फिल्म साल 1961 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में दिलीप कुमार, वैयजंती माला और नासिर खान मुख्य भूमिका में थे।
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