हिंदी सिनेमा में ऐसा कई बार हुआ है कि जब एक सुपरस्टार की फिल्म को रिलीज होने से पहले ही ब्लॉकबस्टर मान लिया जाता है और असल में फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित होती है। इनके असफल होनी की वजह फिल्म से सबसे महत्वपूर्ण तथ्य कहानी की कमी होना होता है। वहीं, कई फिल्म निर्माताओं का मानना है कि सुपरस्टार को फिल्म में कास्ट करने से ही फिल्में सुपरहिट हो जाएंगी। हालांकि दर्शक उन्हें कई बार गलत ठहरा चुके हैं।
Content is King: बॉलीवुड की वो फिल्में जो साबित करती हैं कि दर्शकों के लिए कहानी मायने रखती है, स्टार्स नहीं
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मकबूल
विशाल भारद्वाज की 'मकबूल' 2003 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में इरफान खान, तब्बू और पंकज कपूर नजर आए हैं। फिल्म की कहानी मुंबई के अंडरवर्ल्ड के लिए शेक्सपेयक के ‘मैकथेन’ का शानदार रूपांतरण है। इस फिल्म को दर्शकों ने काफी पसंद किया था।
ए वेनसडे
2008 में आई 'ए वेनसडे' में दिखाया गया है कि एक व्यक्ति 3 आतंकियों की रिहाई के बदले पूरी मुंबई पुलिस को बंधक बना लेता है। इस फिल्म में नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर के बीच टकराव दिखाई देता है। इस फिल्म की कहानी ही आपको आखिरी तक फिल्म से जोड़े रखेगी।
स्टेनली का डब्बा
अगर आपको लगता है कि यह फिल्म बच्चों के लिए ही है, तो आप गलत हैं। फिल्म की कहानी एक शिक्षक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो छात्रों को अपने साथ लंच शेयर करने के लिए मजबूर करता है। वहीं, जब तक छात्र हाथ में टिफिन नहीं लाता है, तब तक उसे स्कूल में प्रवेश करने से मना करा जाता है।
कहानी
इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक गर्भवती महिला कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान अपने पति की तलाश में जुटी हुई है। यह महिला प्रधान फिल्मों में 100 करोड़ से अधिक की कमाई करने वाली पहली फिल्मों में से एक थी। इस फिल्म में विद्या बालन मुख्य भूमिका में नजर आई थीं।