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बॉलीवुड के ये पांच खलनायक किसी हीरो से नहीं थे कम, फिल्मों में एंट्री पर सीटियों से गूंजने लगता था हॉल

Sun, 18 Apr 2021 11:39 AM IST
दीपाली श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: दीपाली श्रीवास्तव Updated Sun, 18 Apr 2021 11:39 AM IST
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Bollywood Villain: These Five Popular Bollywood Villains Were No Less Than A Hero
बॉलीवुड के विलेन

हिंदी फिल्मों में हीरो-हीरोइन तो खास होते ही है लेकिन अगर किसी फिल्म में विलेन ना हो तो कोई मजा नहीं आता। हमने हमेशा से ही फिल्मों में विलेन के किरदार को हीरो से पिटते देखा है। लेकिन कुछ फिल्मों के विलेन ऐसे भी रहे हैं, जिन्हें आजतक आप नहीं भूल पाए होंगे। ये विलेन 70, 80, 90 के दशक के हैं, जो पर्दे पर जब आते थे तो सिनेमा हॉल सीटियों से गूंज उठता था। आज हम आपको इन विलेन के बारे में बताने जा रहे हैं।

Bollywood Villain: These Five Popular Bollywood Villains Were No Less Than A Hero
अजीत

अजीत

'सारा शहर मुझे लॉयन के नाम से जानता है' साल 1976 में आई फिल्म 'कालीचरण' में 'लॉयन' के रूप में अभिनेता अजीत की खलनायिकी को कोई भूल सकता है क्या? अजीत ने अपने शानदार अभिनय और फिल्मों में षड्यंत्रों से लोगों का दिल जीत लिया था। बड़े पर्दे पर 'लॉयन' और 'मोना डार्लिंग' की जुगलबंदी दर्शकों को खूब एंटरटेन करती थी। अजीत पर्दे पर अपने अलग स्टाइल और आइकॉनिक डायलॉग्स के लिए मशहूर थे।

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रंजीत

रंजीत

रंजीत, जिन्होंने कई फिल्मों में विलेन के किरदार से लोगों के होश उड़ा दिए। रंजीत का असली नाम गोपाल बेदी है, लेकिन लोग उन्हें रंजीत के नाम से ही जानते हैं। रंजीत एक ऐसे विलेन थे, जिन्हें पर्दे पर देखकर तो लोग उनसे नफरत करते थे लेकिन असल जिंदगी में लड़कियां उनपर मरती थीं। रंजीत की जबरदस्त पर्सनैलिटी, स्टाइल और लुक्स लोगों का दिल जीतने के लिए काफी था। फिल्मों की दुनिया में रंजीत के नाम एक और अजीब रिकॉर्ड भी दर्ज है। उन्होंने 350 फिल्मों में रेप सीन किए। हाल ये था कि रंजीत की मां ने भी उनकी फिल्म देखकर उन्हें घर से निकलने को बोल दिया था। रंजीत और हीरोइन के बीच ये डायलॉग आज भी लोगों को खूब याद होगा... 'भगवान के लिए मुझे छोड़ दो' के जवाब में रंजीत का वो डायलॉग 'चिल्ला! यहां तेरी चीख सुनने वाला कोई नहीं', 'इतनी अच्छी चीज भगवान के लिए छोड़ दूं...तो मैं क्या करूंगा?

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कुलभूषण खरबंदा

कुलभूषण खरबंदा

अगर आपको साल 1980 में आई फिल्म 'शान' में कुलभूषण खरबंदा द्वारा निभाया गया किरदार शाकाल याद ना हो तो सीरीज 'मिर्जापुर' में कालीन भैया के बाबू जी तो जरूर याद होंगे। जी हां, हम उन्हीं बाबू जी की बात कर रहे हैं, जिन्होंने अपनी खलनायिकी से अच्छे अच्छों के पसीने छुटा दिए। फिल्म 'शान' में शाकाल का किरदार बेहद दमदार था, पर्दे पर जब भी शाकाल का किरदार आता था तो एक डर का माहौल बन जाता था। 'शाकाल के हाथ में जितने पत्ते होते हैं, उतने ही पत्ते उसकी आस्तीन में भी होते हैं' ये संवाद शाकाल के जुबां से सुनने में ही अच्छा लगता था। अभिनेता कुलभूषण खरबंदा ने इसके अलावा भी कई फिल्मों में विलेन के कई दमदार किरदार निभाए हैं।

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जीवन

जीवन

हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े खलनायक हुआ करते थे जीवन। जिन्होंने 60, 70 और 80 के दशक में हिंदी फिल्मों में विलेन का किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई। साल 1977 में फिल्म आई थी 'अमर अकबर एंथोनी।' सभी को याद होगी ये फिल्म जिसमें रॉबर्ट का एक किरदार था। रॉबर्ट का किरदार निभाने वाले अभिनेता जीवन का बोलने का अंदाज, तीरछी नजरें और दुश्मनी करने का तरीका लोगों को खूब भाता था। जीवन के कुछ डायलॉग्स भी थे जो खूब मशहूर हुए थे, जैसे... 'आज या तो इंसाफ होगा या मामला साफ होगा' और  'आदमी के जब बुरे दिन आते हैं तो उसकी अकल मारी जाती है।' आलम ये था कि एक तरफ पर्दे पर जीवन की एंट्री होती थी और दूसरी तरफ तालियों का शोर होता था।

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