बॉलीवुड बनाम साउथ विवाद के बीच विदेश में बंगाली, हिंदी, तमिल, तेलुगू आदि फिल्में मिलकर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। जी हां, इस बार आयोजित होने वाले कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत की छह फिल्मों की स्क्रीनिंग होने जा रही है। लेकिन यह पहला मौका नहीं है, जब भारत की फिल्मों ने विदेशों में अपनी छाप छोड़ी हो। इससे पहले भी भारतीय सिनेमा की फिल्मों ने बाकी विदेशी फिल्मों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई हैं। आज हम इस खबर में आपको उन्हीं फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें कान्स फिल्म फेस्टिवल में खूब सराहा गया है। आइए जानते हैं...
Cannes Film Festival: आज से नहीं 1954 से कांस फेस्टिवल में धाक जमा रही हैं भारतीय फिल्में, यहां देखिए पूरी लिस्ट
ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग (A Night of Knowing Nothing)
'ए नाइट ऑफ नोइंग नथिंग' एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म है, जिसका निर्देशन पायल कपाड़िया ने किया है। 2021 में रिलीज हुई इस फिल्म में एक इंडियन स्टूडेंट की जिंदगी का जिक्र है। इस फिल्म को कांस फिल्म फेस्टिवल के 74वें एडिशन यानी 2021 में बेस्ट डॉक्यूमेंट्री के लिए गोल्डन अवॉर्ड मिला था।
द लंच बॉक्स (The Lunch Box )
फिल्म 'लंचबॉक्स', रितेश बत्रा द्वारा लिखित और निर्देशित 2013 की एक ऐतिहासिक-रोमांटिक फिल्म है। इसमें इरफान खान और निम्रत कौर के अलावा भारती आचरेकर, नकुल वैद और नवाजुद्दीन सिद्दीकी सहायक भूमिका में हैं। इस फिल्म की स्क्रीनिंग 2013 के कान्स फिल्म फेस्टिवल में की गई थी।
सलाम बॉम्बे (Salaam Bombay)
बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता इरफान खान की यह दूसरी फिल्म है, जिसने कांस फिल्म फेस्टिवल में अपनी खास जगह बनाई थी। 1988 में आई फिल्म सलाम बॉम्बे को उसी साल कांस फिल्म फेस्टिवल में खास सम्मान प्रदान किया गया था। मीरा नैयर द्वारा निर्देशित इस फिल्म में स्लम एरिया में रहने वाले बच्चों की जिंदगी के बारे में बताया गया गया था।
खारिज (Kharij)
खारिज, रामपद चौधरी की नोवल पर आधारित है, जिसे देश और विदेश में काफी पसंद किया गया था। इस फिल्म को 1983 में कांस फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल जूरी अवॉर्ड से नवाजा गया था।
