शादीशुदा रिश्ते को निभाना काफी मुश्किल होता है। पति-पत्नी की आपसी समझ, प्यार और सम्मान इस रिश्ते की नींव होते हैं, लिहाजा इसके लिए दोनों को एफर्ट्स करने चाहिए। इस रिश्ते की मजबूती के लिए क्या होना चाहिए जितना महत्वपूर्ण सवाल है कि क्या नहीं होना चाहिए? महान विद्वान, शिक्षक, कुशल कूटनीतिज्ञ, रणनीतिकार और अर्थशास्त्री रहे आचार्य चाणक्य ने भी अपनी नीति में सफल दांपत्य जीवन के लिए तमाम सुझाव दिए हैं। साथ ही उन्होंने यह सुझाव भी दिए हैं कि पति और पत्नी को रिश्ते में मधुरता बनाए रखने के लिए किन चीजों से बचना चाहिए। बॉलीवुड की यह पांच फिल्में भी कुछ-कुछ चाणक्य नीति से मिलती-जुलती हैं। इनमें भी सफल दांपत्य का राज छिपा है। आइए जानते हैं इन फिल्मों के बारे में...
Chanakya Niti: पति-पत्नी के रिश्तों को चाणक्य नीति जैसी सलाह देती हैं ये फिल्में, जानें कब और कैसे देखें?
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'वो सात दिन'
साल 1983 में आई फिल्म 'वो सात दिन' इसका अलग उदाहरण है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, अनिल कपूर और पद्मिनी कोल्हापुरे ने मुख्य रोल निभाए थे। माया (पद्मिनी कोल्हापुरे) की शादी डॉ. आनंद (नसीरुद्धीन शाह) से होती है। लेकिन, माया शादी से पहले से प्रेम (अनिल कपूर) को प्यार करती है। शादी के बाद वह सुसाइड करने की कोशिश करती है। हालांकि, उसका डॉ. पति उसे बचा लेता है, लेकिन जब इस आत्महत्या की वजह जानता है तो हैरान रह जाता है। इसके बाद सच्चाई पता चलती है कि डॉ.आनंद ने भी माया से शादी सिर्फ अपनी बीमार मां की खातिर के लिए की थी। मां की मौत के बाद डॉ. आनंद माया के प्रेमी यानी प्रेम को ढूंढने निकलता है, ताकि दोनों को मिलवाया जा सके। लेकिन, आखिर में माया इससे इनकार कर देती है और डॉ. आनंद के साथ ही रहती है। आखिर में माया को शादी की ताकत का एहसास होता है। यह फिल्म पति-पत्नी के रिश्ते अहमियत को दिलचस्प अंदाज में बयां करती है। वर्ष 1999 में आई फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' की कहानी भी लगभग ऐसी ही है। प्रेम की अहमियत बेशक जीवन में कम नहीं, लेकिन विवाह के प्रति फर्ज सबसे जरूरी हैं। इसी पर शादीशुदा रिश्ते की नींव टिकी है। 'वो सात दिन' को आप ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर देख सकते हैं।
'बीबी नंबर वन'
वर्ष 1999 में आई यह फिल्म आकर्षण और प्यार के बीच के फर्क को समझाती है। फिल्म में प्रेम मेहरा (सलमान खान) बेहद आधुनिक रूपाली (सुष्मिता सेन) की ओर आकर्षित होकर अपनी आदर्श पत्नी पूजा (करिश्मा कपूर) की अनदेखी करता है। पूजा को जब सच्चाई पता चलती है तो वह उससे अलग रहने लगती है। अपने दोस्त की मदद से वह भी मॉडर्न रूप अख्तियार करती है। बाद में प्रेम का अहसास होता है कि वह सिर्फ भौतिक रिश्ते के पीछे भाग रहा था। 'बीबी नंबर वन' को आप डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर देख सकते हैं।
'हम तुम्हारे हैं सनम'
शक का इलाज किसी नीम हकीम के पास नहीं होता। यूं तो यह कहावत ही शक के नुकसानों को बताने के लिए पर्याप्त है। अगर फिल्म की बात करें तो 'हम तुम्हारे हैं सनम' इसका एक उदाहरण है। वर्ष 2002 में आई इस फिल्म में शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और सलमान खान ने मुख्य किरदार अदा किए थे। फिल्म में गोपाल (शाहरुख खान) अपनी पत्नी राधा (माधुरी दीक्षित) और उसके दोस्त सूरज (सलमान खान) के रिश्ते को गलत नीयत से देखने लगता है। बस यहीं से गलतफहमियों का सिलसिला शुरू होता है वह एक खुशहाल वैवाहिक जीवन को बर्बादी की कगार पर ला देता है। फिल्म का सबक है कि गलतफहमियों को बढ़ाते रहने से बेहतर है, जल्द उन्हें दूर किया जाए। इसके लिए बातचीत से बेहतर भला क्या हो सकता है? इस फिल्म को आप अमेजन प्राइम वीडियो और वूट पर देख सकते हैं।
'तनु वेड्स मनु'
वर्ष 2011 में आई 'तनु वेड्स मनु' और वर्ष 2015 में आई 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' दोनों ही फिल्में मैरिड लाइफ में लड़ाइयों की असली वजह की झलक पेश करती हैं। आर. माधवन और कंगना रणौत अभिनीत फिल्म के दोनों पार्ट काफी हिट हुए। पहले पार्ट में जहां दिखाया गया कि तनु (कंगना रणौत) के अफेयर का पता चलने के बाद भी मनु (आर. माधवन) उससे शादी को तैयार होता जाता है। वहीं, दूसरे पार्ट में दिखाया गया है कि तनु के बचपने और पहले प्रेमी को न भूलने की वजह से कितने झगड़े झंझट होते हैं। तनु को तब अपनी गलती का अहसास नहीं होता, जब मनु की जिंदगी में तनु की हमशक्ल लड़की दत्तो की एंट्री नहीं हो जाती और बात तनु-मनु के तलाक तक पहुंचती है। यह फिल्म बताती है कि पति और पत्नी दोनों यह चाहते हैं कि एक-दूसरे की जिदंगी में वह सबसे महत्वपूर्ण हों। जब भी कोई तीसरा उनकी जगह लेगा तो मैरिड लाइफ खतरे में आ सकती है। इस फिल्म को अमेजन प्राइम वीडियो पर देखा जा सकता है।

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