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पाकिस्तान में जन्मे थे विनोद खन्ना, माली बनकर धोये टॉयलेट...मरणोपरांत मिला बड़ा अवार्ड
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मशहूर एक्टर विनोद खन्ना को मिला सबसे बड़ा अवार्ड। इस मौके पर हम आपको बता रहे हैं उनकी जिंदगी के बारे में ऐसी बातें, जो यकीनन आपने पहले नहीं सुनी होंगी।
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vinod khanna
फिल्म उद्योग में योगदान के लिए इस साल का दादा साहेब फाल्के अवार्ड दिवंगत अभिनेता विनोद खन्ना को देने का एलान किया गया है। दादा साहेब फाल्के भारतीय फिल्म उद्योग का सर्वोच्च सम्मान है। विनोद खन्ना का 27 अप्रैल 2017 को कैंसर के कारण 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। विनोद खन्ना ने 1968 में 'मन का मीत' फिल्म से कैरियर की शुरुआत की थी और उनकी आखिरी फिल्म 2007 में आई थी।
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विनोद खन्ना
- फोटो : SELF
विनोद खन्ना भारतीय जनता पार्टी के नेता व पंजाब में गुरदासपुर जिले से लोकसभा सांसद थे। वे अपने जीवन में ओशो से प्रभावित थे। वो वक्त ऐसा था कि विनोद खन्ना फिल्में छोड़कर संन्यासी बन गए थे। नाम और पैसा कमाने के बावजूद उन्हें जिंदगी में कुछ खालीपन सा लग रहा था। इसे पूरा करने के लिए वह सन्यासी बने और पूरे चार साल तक अमेरिका में आध्यात्निक गुरु ओशो के आश्रम में बिताए।
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विनोद खन्ना
1980 में विनोद खन्ना का मन फिर बदला। वह अपने परिवार के पास वापस लौटना चाहते थे। हालांकि ओशो की ओर से उन्हें ऑफर भी दिया गया कि वह चाहे तो पुणे के आश्रम की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, लेकिन विनोद खन्ना ने इंकार कर दिया। फिर उनका जो कमबैक रहा, वो भी शानदार था। विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी करियर में विलेन से लेकर रोमांटिक हीरो तक के किरदार निभाए।
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विनोद खन्ना
6 अक्टूबर, 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में जन्मे विनोद की जिंदगी की कहानी फिल्मी स्टोरी से कम नहीं थी। साधारण परिवार से होने के बाद बॉलीवुड एक्टर बनने और फिर ओशो के आश्रम में माली बने। शादीशुदा जिंदगी खत्म करने को लेकर वो हमेशा ही सुर्खियों में रहे। पाकिस्तान से संबंध रखने वाले विनोद खन्ना ने एक पाकिस्तानी फिल्म गॉडफादर में मुख्य भूमिका निभाई, जो 2007 में रिलीज हुई।
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