भारतीय टेलीविजन पर सबसे लंबे चले धारावाहिकों में ‘सीआईडी’ का भी एक रिकॉर्ड रहा है। धारावाहिक की पहचान इसमें एसीपी प्रद्युम्न का रोल करने वाले शिवाजी साटम तो रहे ही, दया के किरदार में अभिनेता दयानंद शेट्टी ने भी इस धारावाहिक को लोकधारा में शामिल करा दिया। जब भी दयानंद शेट्टी का जिक्र आता है तो सामने एक सीबीआई अफसर की छवि उभर कर आती है और याद आता है बस एक डायलॉग, ‘दरवाजा तोड़ दो, दया!’ यह संवाद अब अभिनेता दयानंद शेट्टी की पहचान बन चुका है। वह चाहते हैं कि वह इस इमेज को तोड़ें लेकिन रोहित शेट्टी जैसे निर्देशक भी दया की इस पहचान को कैश कराने का मौका नहीं छोड़ते। आइए जानते हैं, अभिनेता दयानंद शेट्टी के अब तक के सफर की कहानी, उन्हीं की जुबानी...
Dayanand Shetty: दरवाजा तोड़ते रहे दया ने अब धरा नया रूप, देखिए क्या गुल खिलाने की कर रहे तैयारी
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खेल खेल में बन गया एक्टर
मैं एक्टर नहीं बनना चाहता था। जैसे आम लोग चाहते है कि उन्हें एक्टिंग में आना है ऐसा कुछ जज्बा मेरे अंदर नहीं था। मजाक मजाक में थिएटर कर लिया करता था। ‘सीआईडी’ के लिए बुलावा आया तो भी मैंने कहा कि मैं शौकिया एक्टर हूं, कैमरे के सामने एक्टिंग नहीं कर सकता। धारावाहिक के निर्माता बी पी सिंह खुद ऑडीशन ले रहे थे। मैं इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं था कि दया का रोल मुझे मिलेगा। उन दिनों मेरे पिताजी की तबियत भी खराब थी। ऑडीशन देने का बिलकुल भी मन नहीं था। लेकिन मेरा नाम वहां मेरे एक दोस्त ने ले दिया था और मैं सिर्फ उसकी दोस्ती की खातिर ऑडिशन में चला गया। और, उस ऑडीशन ने मुझे आज यहां तक पहुंचा दिया।
पुलिसवालों का फीडबैक
दया का किरदार करने के दौरान पुलिस वालों से अक्सर मिलना होता। कुछ तारीफ करते तो कुछ लोग बोलते कि तुम लोग इतनी जल्दी मामले की गुत्थी सुलझते दिखा देते हो कि कि हमें दिक्कत हो जाती है। लोग हमसे पूछते हैं कि ‘सीआईडी’ वाले तो बड़ी जल्दी केस सॉल्व कर देते हैं आप लोग इतना टाइम क्यों लगाते हो? कुछ पुलिसवालों ने बताया कि उनके बच्चे भी तंज कसते हैं कि आप लोग ऐसे ही सिर्फ गन लेकर घूमते हो। देखो दया कैसे फायर करता है।
तोड़ दो, दरवाजा!
‘सीआईडी’ में काम शुरू करने से पहले इस शो के 40 एपिसोड हो चुके थे। उनमें भी दरवाजा तोडा जा चुका था लेकिन उसका उतना असर नहीं बना। जब मैंने ‘सीआईडी’ में काम शुरू किया और दरवाजा तोड़ना शुरू किया तो फिर शूटिंग टीम के लिए फरमान आया कि आगे से दरवाजा कहीं से भी तोड़ना हो तो दया ही तोड़ेगा। मैं कहीं भी किसी लोकेशन पर रहूं, दरवाजा तोड़ने मुझे ही आना पड़ता था। लोगों को यह पसंद आता गया। लोग मुझे शो के अलावा भी दरवाजा तोड़ने के लिए बुलाने लगे। अभी हाल ही में मैंने जूतों का एक विज्ञापन किया तो उसमें भी दरवाजा तोड़ने वाला सीक्वेंस डाला गया। कई रियलिटी शोज में भी गया हूं वहां भी लोग दरवाजा तुड़वाते ही हैं। मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता लेकिन लोगो को यही चाहिए।
रोहित शेट्टी ने भी इसे कैश कराया
जब निर्देशक रोहित शेट्टी की फिल्म ‘सिंघम रिटर्न्स’ कर रहा था तो रोहित शेट्टी ने उसमे भी दरवाजा तोड़ने वाला सिक्वेंस डालने की बात की। इसे लेकर मैं सहज नहीं हो पा रहा था। रोहित से मेरा सम्बन्ध दोस्ती जैसा है। मैं दरवाजा तोड़ तोड़ के ऊब चूका था। रोहित ने कहा, ‘तू टेंशन न ले सब ठीक होगा। तू देख लेना सीटी न बजे तो।’ वाकई मैंने थिएटर में तीन चार बार जाकर फिल्म देखी और हर बार लोग सीटी बजा रहे थे।’