प्यार वो शब्द है जिसकी व्याख्या करना बेहद मुश्किल है, क्योंकि इसे शब्दों की सीमा में बांधकर नहीं रखा जा सकता। प्यार होना या ना होना यह हमारे हाथ में नहीं है, यह तो बस हो ही जाता है और जब यह होता है तो इंसान इसे पाने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाने के लिए तैयार रहता है। जब आप प्यार में होते हो तो आपको हर दिन खास लगता है। हर लम्हा आपके लिए बेहतरीन होता है। लेकिन प्यार के साथ सब्र भी होना बेहद जरूरी है, क्योंकि प्यार वक्त मांगता है और जब हम इसे वक्त देते हैं तो यह भी हमारे वक्त में चार चांद लगा देता है। प्यार में कभी जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि जल्दबाजी से किया हुआ काम हमेशा बिगड़ता ही है। दुनियाभर में काफी लोग हैं जिन्होंने प्यार के मामले में सब्र की कीमत को पहचानकर अपने प्यार को मुकम्मल किया। इन्हीं लोगों में से एक थे हमारे गजोधर भैया, यानी कॉमेडी के किंग कहे जाने वाले राजू श्रीवास्तव। राजू ने सब्र रखते हुए अपने प्यार का 12 साल तक इंतजार किया था। भले वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी प्रेम कहानी अमर है, जो हमेशा उनके होने का एहसास दिलाती रहेगी। आज हम इस लेख के माध्यम से बात करेंगे उनकी प्रेम कहानी के बारे में। तो चलिए शुरू करते हैं...
Love Story: भाभी की कजिन से बेइंतहा मोहब्बत कर बैठे थे राजू श्रीवास्तव, 12 साल इंतजार के बाद मुकम्मल हुआ इश्क
बड़े भाई की शादी में राजू को मिला सच्चा प्यार
राजू अपनी भाभी की चाचा की लड़की शिखा के प्यार में पूरे 12 वर्षों तक पागल रहे थे। इन बारह सालों में राजू ने शिखा को पटाने के नायाब तरीके खोज निकाले थे। 1981 में उनके बड़े भाई की शादी फतेहपुर में तय हुई थी। राजू श्रीवास्तव अपने भाई की शादी में बाराती बनकर फतेहपुर गए थे और तभी शादी में पहली बार उन्होंने शिखा को देखा था और पहली ही नजर में राजू को प्यार हो गया था। उन्होंने उसी वक्त ठान लिया था कि इसी लड़की से ही मैं शादी करूंगा। जिसके बाद उन्होंने शिखा के बारे में जानकारी जुटाना शुरू किया। छानबीन करने के बाद राजू को पता चलता है कि शिखा कोई और लड़की नहीं बल्कि उनकी भाभी की ही कजिन हैं। फिर क्या था, राजू जुट गए अपने प्यार को पाने की कोशिश करने में।
राजू को कम लगने लगा था कानपुर से इटावा तक का लंबा सफर
राजू ने शिखा के घर के बारे में और ज्यादा पता किया, तो मालूम हुआ कि वह इटावा में रहती हैं। इसके बाद कानपुर के रहने वाले राजू इटावा जाने का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेते थे। कानपुर से इटवा की दूरी करीब 156 किमी है, लेकिन तब राजू के लिए यह बस पलभर का सफर हो गया था। शिखा के भाइयों से भी राजू ने मेलजोल बढ़ाया, क्योंकि राजू को मालूम था कि शिखा तक जाने का रास्ता उनके भाइयों से होकर गुजरता है। राजू ने किसी तरह उन्हें पटाया। फिर कोई न कोई बहाना लेकर इटावा जाने लगे। धीरे-धीरे शिखा से राजू की मुलाकातें बढ़ने लगी, लेकिन उनमें कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं थी। इसके बाद फिल्म इंडस्ट्री में किस्मत आजमाने के लिए 1982 में मुंबई गए। लेकिन यहां भी उनके दिलों दिमाग से शिखा के प्यार का खुमार उतर ही नहीं रहा था। वह हर समय उसके ही खयालों में खोए रहने लगे। लेकिन उन्हें इस बात का भी पता था कि अगर उन्हें शिखा को हासिल करना है तो दुनिया को कुछ बनकर दिखाना होगा, उन्हें पहले शिखा की जिम्मेदारियों को उठाने लायक बनना होगा। राजू ने मुंबई में तगड़ा स्ट्रगल किया।
चिट्ठियों ने जोड़े दिलों के तार
इस बीच राजू शिखा को खोज खबर लेते रहते थे। शिखा से संपर्क साधने के लिए बीच-बीच में उनके घर चिट्ठी भेजते थे। राजू को इस बात का भी डर था कि कहीं शिखा की शादी किसी दूसरे इंसान से न हो जाए। इस डर ने कहीं न कहीं राजू को मजबूत भी बनाया। उन्होंने खूब मेहनत की, वक्त गुजरता रहा और राजू अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ते रहे। राजू ने इस बीच शिखा से प्यार का इजहार नहीं किया। क्योंकि उनकी यह बात कहने की हिम्मत नहीं हुई। वह गोलमटोल बातों को खत में लिखकर शिखा को भेज देते थे। उधर, शिखा ने भी कभी खुलकर कोई जवाब नहीं दिया।
प्यार के इजहार में लग गए 12 साल
12 साल तक राजू ने अपने प्यार को दिल में दबाए रखा। हालांकि इस बीच शिखा को भी एहसास हो गया था कि राजू उनसे बेइंतहा मोहब्बत करते हैं। शिखा भी राजू प्यार किए बगैर ना रह सकीं। क्योंकि राजू का स्वभाव ही कुछ ऐसा था कि हर कोई उनकी तरफ खिंचा चला आता था। उस वक्त शिखा की शादी के लिए जो भी रिश्ता आता वह उसे मना कर देती थीं। कभी इन्हें लड़का पसंद नहीं आता तो कभी उसकी नौकरी। घर वाले भी शिखा की इस हरकत से परेशान थे। इसी बात से राजू को अंदाजा हुआ कि शिखा भी मुझसे शादी करना चाहती हैं। जब राजू पूरी तरह से मुंबई में सेटल हो गए तब एक दिन राजू ने अपने घरवालों के जरिए शिखा के घर रिश्ते की बात पहुंचाई। कुछ दिनों बाद शिखा के भाई राजू के मलाड मुंबई वाले घर आए। शिखा के भाई ने मुंबई में राजू का घर देखा और उन्हें फिर तसल्ली हो गई थी कि यह लड़का उनकी बहन को खुश रखेगा। दोनों की शादी 17 मई 1993 को हुई थी। राजू की शिखा से शादी लखनऊ में हुई थी। इस शादी से उन्हें दो बच्चे हैं, उनकी बेटी का नाम अंतरा और बेटे का नाम आयुष्मान है।