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मानहानि केस: मद्रास उच्च न्यायालय ने ट्विटर को आरोप मुक्त करने से किया इनकार, अब 13 अप्रैल को होगी सुनवाई
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हर्षिता सक्सेना
Updated Fri, 18 Mar 2022 10:31 PM IST
सार
मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मानहानि केस में ट्विटर को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया है।
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सुसी गणेशन,लीना मनीमेकलाई
- फोटो : सोशल मीडिया
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मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मानहानि केस में ट्विटर को आरोप मुक्त करने से इनकार कर दिया है। फिल्म निदेशक सुसी गणेशन द्वारा कवियत्री और फिल्म निर्माता लीना मनीमेकलाई, विभिन्न फिल्म हस्तियों और अन्य सोशल मीडिया संगठनों के खिलाफ मानहानि केस दायर किया था। मामले में शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी वेलमुरूगन ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर की अर्जी को खारिज कर दिया है।
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सुसी गणेशन,लीना मनीमेकलाई
- फोटो : सोशल मीडिया
दरअसल सुसी गणेशन ने सैदापेट की नौवीं मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अदालत में मानहानि याचिका दायर की थी। दायर याचिका में उनके खिलाफ साल 2019 में मीटू के आरोपों के लिए मनी मनीमेकलाई और सिंगर चिन्मयी को सजा देने की मांग की गई थी। अपनी याचिका में गणेशन ने यह भी दावा किया था कि सभी आरोप निराधार है। उन पर यह आरोप फिल्म जगत में उनके नाम और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए लगाए गए हैं।
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सुसी गणेशन,लीना मनीमेकलाई
- फोटो : सोशल मीडिया
पूरे मामले में गणेशन ने ऑनलाइन न्यूज़ मीडिया कंपनी न्यूजमिनट, फेसबुक, गूगल, टि्वटर और इस तरह के अन्य संस्थानों पर कथित तौर पर अपमानजनक बयान प्रकाशित करने का आरोप लगाया था। इस मामले में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था, जिस ने बीते साल दिसंबर में मामले में सैदापेट की निचली अदालत को 4 महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था।
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सुसी गणेशन
- फोटो : सोशल मीडिया
इसी बीच उन्होंने हाई कोर्ट में भी अर्जी दायर करते हुए प्रतिवादियों को उनके खिलाफ कोई अन्य आरोप लगाने से रोकने की भी मांग की थी। साथ ही उन्होंने सभी प्रतिवादियों से संयुक्त रूप से एक करोड़ 10 लाख रुपये का मुआवजा भी मांगा था इसी सिलसिले में आज शुक्रवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई की गई।
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ट्विटर
- फोटो : सोशल मीडिया
इस दौरान ट्विटर के वकील ने न्यायमूर्ति वेलमुरूगन से कहा कि उनका मुवक्किल सिर्फ एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है, जिसका काम जानकारी प्रसारित करना है। इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन अदालत ने यह दलील खारिज कर दी। इस दौरान कोर्ट ने प्रतिवादियों को लिखित रूप में अपना पक्ष रखने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई 13 अप्रैल तक टाल दी है।
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