50 और 60 के दशक में हिंदी फिल्मों में अभिनेताओं की जिस महान तिकड़ी का नाम आता है, वह है दिलीप कुमार, राज कपूर और देव आनंद। इन तीनों कलाकारों ने दर्शकों के लिए अलग अलग स्वाद की फिल्में बनाईं। सिनेमा ने भी इनकी एक अलग छवि बनाई। दिलीप कुमार को ट्रेजेडी किंग कहा गया, राज कपूर को शोमैन तो देव आनंद को रोमांस का बादशाह। देव आनंद ने अपनी जिंदगी तो बनाई ही साथ ही कई और लोगों को भी अपने साथ मिलाकर मशहूर बनाया। आज देव आनंद का जन्मदिन है। इसलिए, आज हम कुछ ऐसे लोगों के बारे में बताएंगे जिन्होंने फिल्मों में कदम देव आनंद के साथ रखा।
देव आनंद का पारस सा स्पर्श पाकर सोना बन गए ये सितारे, गुरुदत्त से लेकर तब्बू तक लिस्ट में शामिल
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गुरुदत्त
देव आनंद और गुरुदत्त दोनों ने ही साथ मिलकर संघर्ष करना शुरू किया था। ये दोनों अच्छे दोस्त भी बन गए थे। उसी समय इन दोनों ने एक दूसरे से वादा किया था कि भविष्य में जो भी आगे जाएगा वह दूसरे की मदद करेगा। भाग्य देव आनंद के साथ निकला। इसलिए उनकी फिल्मों में एंट्री पहले हो गई। फिर देव आनंद ने अपना वादा याद रखा और गुरुदत्त को वर्ष 1951 में आई अपनी हिट फिल्म 'बाजी' से निर्देशन में शुरुआत करने का मौका दिया। गुरुदत्त खुद भी बहुत हुनरमंद थे इसलिए आगे चलकर वह एक जबरदस्त कलाकार और निर्देशक बन कर सामने आए।
कल्पना कार्तिक
कल्पना की खोज तो देव के भाई चेतन आनंद ने की थी लेकिन उन्होंने अपनी शुरुआत देव की फिल्म 'बाजी' से की। यह फिल्म हिट रही और कल्पना के काम को भी पसंद किया गया। कल्पना को भविष्य में बहुत ज्यादा फिल्में देने के लिए नहीं, बल्कि देव आनंद से शादी करने के लिए जाना जाता है। इन दोनों की शादी का किस्सा भी बहुत अजीब है। देव आनंद ने खुद एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने कल्पना से 'टैक्सी ड्राइवर' फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट पर ही शादी कर ली थी।
साहिर लुधियानवी
साहिर लुधियानवी का नाम हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन गीतकारों में लिया जाता है। लेकिन एक समय ऐसा था जब इन्हें भी एक बड़े मौके की दरकार थी। और वह मौका उन्हें देव आनंद से मिला। साहिर कई फिल्मों में गीतकार का काम कर चुके थे लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिल रही थी। तब देव ने साहिर को अपनी फिल्म 'बाजी' के गीत लिखने का मौका दिया। यहां से उन्हें लोग जानने भी लगे और आगे भी उन्हें बेहतरीन फिल्मों के लिए लिखने के ऑफर आने लगे।
राज खोसला
फिल्मों के निर्देशन में राज खोसला का बहुत बड़ा नाम रहा है। एक वक्त था जब राज खोसला को खुद देव आनंद ने ही गुरुदत्त के सहायक निर्देशक के रूप में नियुक्त किया था। जब राज खोसला ने अपनी पहली फिल्म बनाई तो उसमें उन्होंने अभिनेता के तौर पर देव आनंद को ही चुना। यह भी बात जानने वाली है कि राज खोसला के निर्देशन में बनी पहली पांच फिल्मों मिलाप, सीआईडी, कालापानी, सोलवां साल और बंबई का बाबू के हीरो देव आनंद ही हैं।

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