कहा जाता है कि एक अच्छी किताब घर बैठे दुनिया का सैर कराती है। किताबों से अच्छा दोस्त भी नहीं है लेकिन अगर आप इस भागदौड़ की जिंदगी में किताब पढ़ने का समय नहीं निकाल पाते हैं तो हम लाए कुछ ऐसी फिल्में जो उपन्यास पर आधारित हैं। इनकी कहानी ने फिल्मकारों को फिल्म बनाने पर मजबूर कर दिया। चलिए जानते हैं ऐसे ही पांच फिल्में जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
Novel based Movies: उपन्यास अधारित इन फिल्मों ने रिलीज होते ही मचाया धमाल, आज ही देख डालिए
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1965 में बनी यह फिल्म मशहूर लेखक आर के नारायण की उपन्यास 'द गाइड' पर आधारित थी। इस फिल्म में देव आनंद और वहीदा रहमान ने मुख्य किरदार निभाया था। फिल्म को विदेशी फिल्म श्रेणी में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला पर अंतिम सूची में ये जगह न बना पाई। इसके बाद ये फिल्म भारत में अगले साल यानी 1966 में रिलीज हुई और 1967 के फिल्मफेयर पुरस्कारों में नौ नामांकन पाकर सात पुरस्कार जीतने में सफल रही। इस फिल्म की कहानी एक शादीशुदा महिला और टूरिस्ट गाइड के विवाहेत्तर संबंधों पर आधारित है।
ये फिल्म1983 में आई थी। शेखर कपूर के निर्देशन में बनी फिल्म में मुख्य भूमिका में नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी है। वहीं खास बात यह है कि इस फिल्म में उर्मिला मातोंडकर ने बाल कलाकार के तौर पर काम किया था। फिल्म की कहानी इंदु (शबाना) और डीके (नसीरुद्दीन शाह) पर केंद्रित है। सुखी जीवन बिता रहे डीके को पता चलता है कि उसका एक बेटा है। उसकी प्रेमिका बेटे को जन्म देने के बाद मर गई। डीके की पत्नी कैसे इस बच्चे को अपनाएगी।
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के उपन्यास 'देवदास' पर फिल्म देवदास आई थी। साल 2002 में लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म में शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और ऐश्वर्या राय ने बेहतरीन अभिनय किया था। वहीं ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट रही थी। बेहतरीन एक्टिंग, भव्य सेट और शानदार डॉयलॉग से भरपूर ये फिल्म आपको बोर नहीं होने देगी।
साल 2003 में बनी फिल्म पिंजर लेखिका अमृता प्रीतम के उपन्यास पिंजर पर ही आधारित थी। फिल्म में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के दौर को दिखाया गया है। पिंजर में मनोज वाजपेयी, उर्मिला मातोंडकर ने उम्दा अभिनय किया है। भारत-पाक विभाजन के दौरान बहू-बेटियों के साथ हुई ज्यादती को फिल्म बखूबी बताती है।

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