शशि कपूर का नाम लेते ही उनकी रोमांटिक छवि आंखों के सामने घूम जाती है। ...ओ मेरी ओ मेरी ओ मेरी शर्मिली, आओ ना तरसाओ ना..., तोता मैना की कहानी तो पुरानी पुरानी हो गई..., ले जाएंगे दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे..., बांहों में तेरी मस्ती के घेरे... और मोहब्बत बड़े काम की चीज है...जैसे कई गानों में रोमांस जताकर बॉलीवुड में खुद को रोमांटिक हीरो के तौर पर स्थापित किया।
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वे अभिनेता बनना चाहते थे। उनके पिता चाहते तो वह शशि को लेकर फिल्म का निर्माण कर सकते थे, लेकिन उनका मानना था कि शशि कपूर संघर्ष करें और अपनी मेहनत से अभिनेता बनें।
1944 में शशि ने अपना कॅरियर पिताजी के पृथ्वी थिएटर के नाटक शकुंतला से आरम्भ किया था। शशि कपूर ने अपने सिने कॅरियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की। चालीस के दशक में उन्होने कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया।
इनमें 1948 में प्रदर्शित फिल्म 'आग' और 1951 में प्रदर्शित फिल्म 'आवारा' शामिल हैं जिसमें उन्होंने अभिनेता राजकपूर के बचपन की भूमिका निभाई।
शशिकपूर ने अभिनेता के रूप में सिने करियर की शुरुआत 1961 में यश चोपड़ा की फिल्म 'धर्मपुत्र' से की। यह फिल्म आजादी के पहले की दशा पर आचार्य चतुरसेन शास्त्री के उपन्यास पर आधारित थी।
इसमें मुस्लिम दम्पत्ति के अवैध संतान की कहानी थी। उस बच्चे का पालन-पोषण एक उदारवादी हिन्दू परिवार करता है। धर्मपुत्र का गाना तू हिंदू बनेगा ना मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा..खूब हिट हुआ था।
1960 में शशि कपूर ने अनेक रोमांटिक फिल्मों में काम किया। इसका एक कारण यह भी था कि चॉकलेटी हीरो का वह दौर था। चार दीवारी, मेहंदी लगी मेरे हाथ, प्रेमपत्र, मोहब्बत इसको कहते हैं, नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे, जुआरी, कन्यादान, हसीना मान जाएगी जैसी फिल्मों में आए।
ज्यादातर फिल्में फ्लॉप रहीं और शशि कपूर उस दौर के नायक-दिलीप कुमार, देव आनंद, राज कपूर, राजेंद्र कुमार, मनोज कुमार में अपना महत्वपूर्ण स्थान नहीं बना सके। साथ ही उनकी प्रतिभा का परिचय भी बाहर तक नहीं आ पाया।
(फोटोः शशि कपूर के बेटे करण कपूर अपनी बेटी अालिया कपूर के साथ)
1965 शशि कपूर के सिने करियर का अहम वर्ष साबित हुआ। इस वर्ष उनकी 'जब जब फूल खिले' प्रदर्शित हुई। बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की जबरदस्त कामयाबी ने शशि कपूर को भी स्टार के रूप में स्थापित कर दिया।
सूरज प्रकाश द्वारा निर्देशित इस फिल्म की एक रोमांटिक टेल 'एक था गुल...' ने सिल्वर गोल्डन जुबली मनाई थी।1965 में शशि कपूर के सिने कॅरियर की एक और सुपरहिट फिल्म 'वक्त' रिलीज हुई।
इस फिल्म में उनके सामने बलराज साहनी, राजकुमार और सुनील दत्त जैसे नामी सितारे थे। इसके बावजूद वह अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रहे।