डांस मास्टर सरोज खान के निधन से हिंदी सिनेमा के कोरियाग्राफर्स और डांसर सबसे ज्यादा दुखी हैं। लॉक डाउन शुरू होने के बाद से तमाम मुसीबतें झेलते रहे इन कोरियोग्राफर्स के लिए शुक्रवार की सुबह सरोज खान का जाना बहुत बड़ा झटका है। इंडियन फिल्म एंड टीवी कोरियोग्राफर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष रिक्की गुप्ता ने अमर उजाला से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि सरोज खान मुंबई के सारे डांसर्स और कोरियोग्राफर्स के लिए एक प्रेरणास्रोत रही हैं, उन्होंने न सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री में वंशवाद को अपनी मेहनत से चुनौती दी बल्कि सारे डांसर्स को ये भी बताया कि मेहनत और हौसले से कोई भी व्यक्ति यहां सबसे बड़ा रुतबा हासिल कर सकता है।
EXCLUSIVE: नेपोटिज्म के खिलाफ कामयाबी की सबसे बड़ी मिसाल रहीं सरोज खान: कोरियोग्राफर रिक्की
सरोज खान के निधन से बेहद दुखी रिक्की गुप्ता कहते हैं कि सरोज खान के निधन की खबर से उबरने में मुंबई के डांसर्स औऱ कोरियोग्राफर्स को अभी वक्त लगेगा। एसोसिएशन की पिछली आम बैठक में सरोज खान से अपनी मुलाकात का जिक्र करते हुए रिक्की कहते हैं कि सरोज खान को सारे कोरियोग्राफर्स और डांसर्स बहुत इज्जत देते थे, वह उनकी संरक्षक की तरह रही हैं और जो सम्मान उन्होंने अपनी मेहनत और हिम्मत के बल बूते हासिल किया, वैसा सम्मान हिंदी सिनेमा में कम नृत्य निर्देशकों को ही हासिल हुआ है।
सिनेमा में बेहतरीन नृत्य निर्देशन के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली सरोज खान को दो पुरस्कार तो हिंदी फिल्मों जब वी मेट और देवदास के गानों के लिए मिले, जबकि तीसरा राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें तमिल फिल्म श्रृंगारम के लिए मिला। अभिनेत्री अदिति राव हैदरी की इस तमिल डेब्यू फिल्म ने ये भी साबित किया कि कलाकार में अगर दम हो तो भाषाएं उसकी सरहद नहीं बन सकतीं।
रिक्की कहते हैं कि सरोज खान ने सारे डांसर्स को एक सपना दिया। वह खुद भी सरोज खान की ही तरह डांसर से कोरियोग्राफर बने। रिक्की का मानना है कि सरोज खान जैसी शख्सीयत सौ साल में कोई एक होती है और उनके कद के बराबर पहुंचने वाला फिलहाल हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में दूसरा कोरियोग्राफर नहीं दिखता।
सरोज खान के अंतिम संस्कार के तुरंत बाद अमर उजाला से बातचीत में रिक्की ने सरोज खान के बेटे कोरियोग्राफर राजू खान और उनके परिजनों को किसी भी तरह की मदद के लिए एसोसिएशन के 24 घंटे उपलब्ध रहने का वादा किया। रिक्की ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मुंबई के डांसर्स और कोरियोग्राफर्स ने तमाम दुख झेले लेकिन ये दुख सबसे बड़ा हो गया है।