फिल्म 'शोले' भारत की सफलतम फिल्मों में शुमार है। इस फिल्म के बाद से सच में मांओं ने अपने बच्चों को गब्बर का डर दिखाकर सुलाना शुरू कर दिया था। वहीं, गली-गली दोस्तों की जोड़ी को जय और वीरू का नाम दिया जाने लगा। 15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई 'शोले' से जुड़े कई किस्से मशहूर हुए। लेकिन इस आर्टिकल में हम आपको इसकी उपलब्धियां नहीं, बल्कि इसकी गलतियों की तरफ ध्यान दिलाएंगे। इस महान फिल्म में कई बड़ी गलतियां हैं। क्या आपने कभी गौर किया?
'शोले' तो आपने जरूर देखी होगी, क्या फिल्म की इन गलतियों पर गया है आपका ध्यान
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सबसे पहले बात करते हैं उस सीन की जब बसंती का प्यार पाने के लिए वीरू टंकी पर चढ़ जाता। एक तरफ ये दिखाया गया है कि रामगढ में बिजली नहीं है। फिल्म में शुरू से लकर अंत तक ठाकुर की बहू पूरे घर में लालटेन जलाती दिखती है। वहीँ, वीरू बसंती के लिए पानी की जिस टंकी पर चढ़ता है। ये वो टंकी है जिसमें बिना बिजली की मोटर के पानी भरा नहीं जा सकता।
ऐसे ही जब बसंती शिव मंदिर में में पैदल ही पूजा करने आई थी तो जाते समय उसके पास तांगा कैसे आ जाता है। दरअसल, फिल्म के एक सीन में दिखाया गया है कि बसंती पैदल ही मंदिर जाती है। यहां तक कि वीरू भी पूछता है कि आज तुम्हारी धन्नो कहां है। लेकिन जब वो मंदिर से लौटती है तो तांगा बाहर इंतजार कर रहा है।
अरे ओ सांबा...कितने आदमी थे' इस आइकोनिक सीन में जब गब्बर अपने तीन डाकुओं को गोली मारता है तो वो तीनो गब्बर के ठीक सामने फेस टु फेस खड़े दिखाए गए हैं। लेकिन जब गब्बर तीनों को सामने से गोली मारता है रो अगले ही सीन में दो डाकुओं की पीठ और पीछे गर्दन पर गोली लगी दिखाई गई है।
इस फिल्म के जय के आखिरी सीन में जब जय पुल के पास आता है तो उसकी दोनों हथेलियां खुली दिखाई गईं हैं। वहीं, जब वो वीरू की बांह में दम तोड़ता है तो वीरू को उसके एक हाथ में सिक्का मिलता है। ऐसे में सवाल उठता है जय ने मरते समय सिक्का जेब से निकला था?