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Interview: बंपर डेब्यू के बाद 'गोलमाल' करने वाले इस एक्टर ने बॉलीवुड की खोल दी सच्चाईे
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 10 Nov 2018 04:06 PM IST
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shreyas talpade
- फोटो : social media
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जैसे कई सितारे आसमान में चमक दिखाकर खो जाते हैं, वैसा ही बॉलीवुड में होता है। श्रेयस तलपड़े ने एक दशक से भी पहले ‘इकबाल’ और ‘डोर’ से शानदार शुरुआत की थी। फिर वह उस तरह नजर नहीं आए और धीरे-धीरे ओझल हो गए। अब वह अगले बरस फिर संजीदा रूप में दर्शकों के बीच आने की कोशिश कर रहे हैं। श्रेयस तलपड़े से उनके फिल्मी सफर पर अमर उजाला की विशेष बातचीत...
श्रेयस
- फोटो : file photo
‘इकबाल’ (2005) और ‘डोर’ (2006) से आपको संजीदा अभिनेता के तौर पर पहचान मिली। फिर आप कॉमेडी फिल्में करने लगे। वह संवेदनशील अभिनेता कहां खो गया?
अभिनय की दुनिया में करिअर कई बातों से मिलकर बनता है। मैं दूसरों को दोष नहीं दूंगा, क्योंकि इसका फायदा नहीं। मैं खुद को भी दोष नहीं दूंगा, क्योंकि वह पूरा सच नहीं होगा। होता यह है कि जब ‘इकबाल’ और ‘डोर’ जैसी फिल्में चल जाती हैं, तो फिर कई ऑफर आते हैं। जरूरी नहीं कि उन पर आपका दिल आए लेकिन कभी दोस्त के लिए, कभी बड़े बैनर को देखकर या किसी सीनियर डायरेक्टर के कहने पर आप उनकी फिल्म कर लेते हैं। यह सोचकर करते हैं कि पहले इन्होंने बढ़िया फिल्में बनाई हैं, तो अब भी अच्छी ही बनाएंगे। लेकिन कभी-कभी फिल्में वैसी नहीं बन पाती हैं, जैसा सोच रहे होते हैं।
अभिनय की दुनिया में करिअर कई बातों से मिलकर बनता है। मैं दूसरों को दोष नहीं दूंगा, क्योंकि इसका फायदा नहीं। मैं खुद को भी दोष नहीं दूंगा, क्योंकि वह पूरा सच नहीं होगा। होता यह है कि जब ‘इकबाल’ और ‘डोर’ जैसी फिल्में चल जाती हैं, तो फिर कई ऑफर आते हैं। जरूरी नहीं कि उन पर आपका दिल आए लेकिन कभी दोस्त के लिए, कभी बड़े बैनर को देखकर या किसी सीनियर डायरेक्टर के कहने पर आप उनकी फिल्म कर लेते हैं। यह सोचकर करते हैं कि पहले इन्होंने बढ़िया फिल्में बनाई हैं, तो अब भी अच्छी ही बनाएंगे। लेकिन कभी-कभी फिल्में वैसी नहीं बन पाती हैं, जैसा सोच रहे होते हैं।
Shreyas Talpade
- फोटो : social media
संजीदा फिल्मों से पूरी तरह कॉमेडी में जाना कैसे हुआ?
जिस समय मैंने ‘इकबाल’ और ‘डोर’ की थीं, तब मल्टीस्टारर कॉमेडी (‘अपना सपना मनी मनी’, ‘ढोल’, ‘धमाल’, ‘पेईंग गेस्ट बॉम्बे टू बैंकॉक’, ‘हाउसफुल’, ‘गोलमाल’ सीरीज) काफी चल रही थीं। मैं नाम तो नहीं लूंगा, लेकिन ‘इकबाल’ के बाद एक ऐसी ही कॉमेडी के लिए मैंने ऑडिशन दिया तो डायरेक्टर ने कहा कि यार तुम्हारी इमेज बहुत सेंसेटिव किस्म के लड़के की है, कॉमेडी नहीं कर पाओगे। बात मेरे अहंकार को लग गई। तब मुझे ‘गोलमाल रिटर्न्स’ ऑफर हुई, मैंने वह की और वह चल गई। फिर तो यह हुआ कि अरे! ये तो कॉमेडी भी कर सकता है। फिर वैसे रोल आने लगे। लाइन लग गई। बीच में मैंने 'वेलकम टू सज्जनपुर' जैसी फिल्म भी की।
जिस समय मैंने ‘इकबाल’ और ‘डोर’ की थीं, तब मल्टीस्टारर कॉमेडी (‘अपना सपना मनी मनी’, ‘ढोल’, ‘धमाल’, ‘पेईंग गेस्ट बॉम्बे टू बैंकॉक’, ‘हाउसफुल’, ‘गोलमाल’ सीरीज) काफी चल रही थीं। मैं नाम तो नहीं लूंगा, लेकिन ‘इकबाल’ के बाद एक ऐसी ही कॉमेडी के लिए मैंने ऑडिशन दिया तो डायरेक्टर ने कहा कि यार तुम्हारी इमेज बहुत सेंसेटिव किस्म के लड़के की है, कॉमेडी नहीं कर पाओगे। बात मेरे अहंकार को लग गई। तब मुझे ‘गोलमाल रिटर्न्स’ ऑफर हुई, मैंने वह की और वह चल गई। फिर तो यह हुआ कि अरे! ये तो कॉमेडी भी कर सकता है। फिर वैसे रोल आने लगे। लाइन लग गई। बीच में मैंने 'वेलकम टू सज्जनपुर' जैसी फिल्म भी की।
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Shreyas Talpade
- फोटो : social media
धीरे-धीरे आप हिंदी फिल्मों से दूर होते चले गए। क्यों?
जब एक जैसी फिल्में करते हैं और वे चलतीं नहीं हैं, तो आपको लगता है कि अपनी कहानी अपने ढंग से कहें। तब मैं मराठी फिल्मों (‘पोस्टर बॉयज’, ‘बाजी’) के प्रोडक्शन में उतर गया। यहां तो जो भी करना है, खुद करना है। कोई ऊपर उठने में मदद नहीं करता। यहां ऊंचाई के लिए खुद उड़ना होता है।
जब एक जैसी फिल्में करते हैं और वे चलतीं नहीं हैं, तो आपको लगता है कि अपनी कहानी अपने ढंग से कहें। तब मैं मराठी फिल्मों (‘पोस्टर बॉयज’, ‘बाजी’) के प्रोडक्शन में उतर गया। यहां तो जो भी करना है, खुद करना है। कोई ऊपर उठने में मदद नहीं करता। यहां ऊंचाई के लिए खुद उड़ना होता है।
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Shreyas Talpade
- फोटो : file photo
क्या वजह है कि जब आप वापस हिंदी में आए हैं, तो वेब सीरीज की एडल्ट कॉमेडी (बेबी कम ना) कर रहे हैं?
मैं इसे एडल्ट नहीं, बल्कि नॉटी कॉमेडी कहता हूं। इसमें कोई लिमिट क्रॉस नहीं की है। इसमें मेरा कैरेक्टर बात को सीधे तरीके से कह रहा है। लेकिन यह सामने वाले पर निर्भर करता है कि वह बात का क्या अर्थ निकालेगा? देखने वाला इसका नॉटी मतलब निकालता है, तो इसका मतलब यह है कि देखने वाला नॉटी है।
मैं इसे एडल्ट नहीं, बल्कि नॉटी कॉमेडी कहता हूं। इसमें कोई लिमिट क्रॉस नहीं की है। इसमें मेरा कैरेक्टर बात को सीधे तरीके से कह रहा है। लेकिन यह सामने वाले पर निर्भर करता है कि वह बात का क्या अर्थ निकालेगा? देखने वाला इसका नॉटी मतलब निकालता है, तो इसका मतलब यह है कि देखने वाला नॉटी है।