'जानें वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला...' इस लाइन को सुनते ही जहन में गुरुदत्त की फिल्म 'प्यासा' का नाम है। लेकिन इस गाने को सुनकर ऐसा लगता है जैसे अभिनेता, निर्देशक गुरु दत्त ने अपनी जिंदगी में मिले प्यार को मंजिल ना मिलने को इस गाने के जरिए बयां किया था। गुरु दत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा को अमरता दे दी। सिनेमा की पढ़ाई में आज भी गुरु दत्त की फिल्मों का जिक्र जरूर होता है। उन्होंने एक से बढ़कर एक हिट फिल्में दीं। गुरु दत्त ने बेहद कम समय में अपने आप को सिनेमा जगत में स्थापित कर लिया था।
जन्मदिन: गुरु दत्त और गीता की शादीशुदा जिंदगी के बीच आ गई थी ये अभिनेत्री, अधूरी रह गई ये इच्छा
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गुरुदत्त और गीता की मुलाकात फिल्म 'बाजी' के सेट पर हुई थी। उस समय गीता रॉय एक पार्श्व गायिका के रूप में मशहूर हो चुकी थीं। उनके पास एक लंबी गाड़ी हुआ करती थी, वो गुरुदत्त से मिलने उनके माटुंगा वाले फ्लैट पर आया करती थीं। सरल इतनी थीं कि रसोई में सब्जी काटने बैठ जाती थीं। अपने घर से वो ये कह कर निकलती थीं कि वो गुरु दत्त की बहन से मिलने जा रही हैं।
गुरु दत्त की छोटी बहन ललिता, गुरु दत्त और गीता के प्रेम पत्र एक दूसरे के लिए ले जाया करती थीं। दोनों का प्यार परवान चढ़ चुका था और 1953 में गुरु दत्त और गीता रॉय विवाह बंधन में बंध गए। दोनों की जिंदगी काफी खुशनुमा चल रही थी। अचानक ही 'प्यासा' बनने के दौरान गीता और उनके बीच दूरियां आनी शुरू हो गईं। कारण था उनकी अपनी हीरोइन वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियां। दोनों के बीच शक इस हद तक बढ़ गया कि एक दिन गुरु दत्त को एक चिट्ठी मिली। उसमें लिखा गया था कि, 'मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। अगर तुम मुझे चाहते हो तो आज शाम को साढ़े छह बजे मुझसे मिलने नारीमन प्वॉइंट पर आओ। तुम्हारी वहीदा।'
गुरु और वहीदा के अफेयर की खबर सुनकर गीता अपने बच्चों को लेकर गुरु दत्त से अलग होकर दूसरे घर में जाकर रहने लगीं। जिसके बाद उन्होंने शराब, सिगरेट और नींद की गोली को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया। गुरु दत्त अकेले हो गए थे और वहीदा ने भी उनका साथ छोड़ दिया था। बच्चों से मिलने की तड़प और अकेलापन गुरु तो अंदर ही अंदर खा रहा था।
और फिर वो मनहूस दिन भी आया जब गुरु दत्त ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। गुरु 10 अक्टूबर को अपने घर में मृत पाए गए थे। उसी दिन उन्होंने भाई के साथ बच्चों के लिए शॉपिंग की। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार 9 अक्टूबर को उनके दोस्त अबरार अलवी उनसे मिलने गए तो गुरु दत्त शराब पी रहे थे। इस बीच उनकी गीता दत्त से फोन पर लड़ाई हो चुकी थी। वो अपनी ढाई साल की बेटी से मिलना चाह रहे थे और गीता उसे उनके पास भेजने के लिए तैयार नहीं थीं। गुरु दत्त ने नशे की हालत में ही उन्हें अल्टीमेटम दिया, 'बेटी को भेजो वरना तुम मेरा मरा हुआ शरीर देखोगी।' एक बजे रात को दोनों ने खाना खाया और फिर अबरार अपने घर चले गए। अगले दिन दोपहर में उनके पास फोन आया कि गुरु दत्त की तबीयत खराब है।