बीते जमाने के दिग्गज अभिनेता प्राण फिल्म इंडस्ट्री में एक बहुत बड़ा नाम रहे हैं। वैसे तो वह हीरो भी बने लेकिन उन्होंने नाम कमाया तो सहायक कलाकार और खलनायक बनकर। फिल्म इंडस्ट्री में उनका लगभग छह दशक लंबा करियर रहा और इस दौरान उन्होंने साढ़े तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 'मधुमति', 'जिस देश में गंगा बहती है', 'उपकार', 'शहीद', 'पूरब और पश्चिम', 'राम और श्याम', 'जंजीर', 'डॉन', 'अमर अकबर एंथनी' जैसी सुपरहिट फिल्मों में प्राण ने शानदार काम किया। अपने समय के वह एक चर्चित विलेन रहे, इस वजह से इन्हें 'विलेन ऑफ द मिलेनियम' कहा गया। प्राण अपने अभिनय के साथ डायलॉगबाजी में बहुत मशहूर रहे हैं। उनका 101वां जन्मदिन उनके चाहने वाले दुनिया भर में मना रहे हैं और इस मौके पर उनके कुछ बेहतरीन किरदार और डायलॉगबाजी को याद कर रहे हैं।
Pran Birthday: इन 10 किरदारों के संवादों में बसे बॉलीवुड के प्राण, चाहने वाले मना रहे 101वीं जयंती
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किरदार: राका
फिल्म: जिस देश में गंगा बहती है (1960)
प्राण ने शुरुआत से ही अपने अभिनय से लोगों पर प्रभाव जमाना शुरू किया था। उन्होंने अपनी शुरुआत एक पंजाबी फिल्म 'यमला जट' से की थी और हिंदी में उनकी पहली फिल्म वर्ष 1942 में रिलीज हुई 'खानदान'। जब 1960 में रिलीज हुई फिल्म 'जिस देश में गंगा बहती है' में प्राण को राज कपूर के साथ देखा गया तो उनके काम की बहुत तारीफ हुई। प्राण ने इस फिल्म में एक डाकू राका का किरदार निभाया है जो अपने ही सरदार को मार कर उसकी बेटी से शादी करना चाहता है। इस फिल्म में प्राण के संवाद काफी मशहूर रहे। उनमें से एक संवाद तब आया जब राका का सरदार अपनी बेटी की शादी राज कपूर के किरदार राजू से करना चाहता है। इस पर राका का डायलॉग होता है, 'एक डाकू की लड़की पुलिस वाले से शादी करेगी, गोली मारिए सरदार'।
किरदार: मोहन
फिल्म: कश्मीर की कली (1964)
शक्ति सामंत के निर्देशन में बनी वर्ष 1964 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'कश्मीर की कली' में प्राण नजर आए शम्मी कपूर, शर्मिला टैगोर और नजीर हुसैन के साथ। यहां भी प्राण एक विलेन रहे। वह शम्मी कपूर के किरदार राजीव और शर्मिला टैगोर के किरदार चंपा के प्रेम के बीच रोड़ा बनते हैं। उनके किरदार का नाम मोहन है जो एक फॉरेस्ट मैनेजर है। वह चंपा के पिता दीनू को कर्जा देता है और वापस न करने की हालत में चंपा से शादी करने की शर्त रखता है। चंपा कश्मीर में फूल बेचने का काम करती है। यहां भी प्राण का एक संवाद काफी मशहूर रहा। वह कहते हैं, 'ये फूलों के साथ-साथ दिल कब से बेचना शुरू कर दिया है'।
किरदार: मलंग चाचा
फिल्म: उपकार (1967)
वर्ष 1967 में बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली फिल्म 'उपकार' में प्राण ने एक रिटायर फौजी मलंग चाचा का किरदार निभाया। इस फिल्म में मनोज कुमार, आशा पारेख और प्रेम चोपड़ा मुख्य भूमिकाओं में हैं। मनोज कुमार को तो इस फिल्म से देशभक्त का दर्जा मिलना शुरू हो गया और प्राण को इस फिल्म के लिए अपना पहला फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। प्राण को यह पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता की श्रेणी में मिला। इस फिल्म में प्राण ने भरपूर डायलॉगबाजी की। उनमें से कुछ संवाद हैं, 'यह पाप की नगरी है, यहां कंस और दुर्योधन का ठिकाना है', 'राम ने हर युग में जन्म लिया लेकिन लक्ष्मण फिर पैदा नहीं हुआ', 'जिंदगी में चढ़ते की पूजा मत करना, डूबते की भी सोचना'।
किरदार: राजा बहादुर
फिल्म: आन बान (1972)
'शेर और बकरी जिस घाट पर एक साथ पानी पीते हों, वह घाट न हमने देखा है और न देखना चाहते हैं।' प्राण ने यह संवाद बोला प्रकाश मेहरा के निर्देशन में बनी वर्ष 1972 की फिल्म 'आन बान' में। इस फिल्म में राजेंद्र कुमार, प्राण, राखी गुलजार और कुमकुम जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। शीर्षक से ही पता चलता है कि यह फिल्म कुछ आन बान और शान जैसी चीजों को ही दर्शाती होगी। प्राण ने फिल्म में राजा बहादुर का किरदार निभाया है जो जानता है कि उसकी राजशाही के दिन बहुत कम हैं। फिर भी वह शराब में डूबा रहता है, औरतों में खेलता है और ठाट बाट से रहता है।