रेखा उस सफर की मुसाफिर रही हैं जिसमें मंजिलें तो तमाम आईं लेकिन घर नहीं आया। उनकी पैदाइश तमिलनाडु की और नाम हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में चलता है। उनकी बातों को सुनकर लगता है कि वह कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थीं। लेकिन, जब बन गईं तो ऐसी बनीं कि उनके सामने और कोई टिक ही नहीं पाया। यहां एक बात और सिद्ध होती है कि अगर किसी काम को कोई मजबूरी में भी मन लगाकर करें तो उसमें भी महारत हासिल किया जा सकती है। रेखा इतवार को 67 की हो रही हैं लेकिन उनकी आवाज़ का जादू अब भी रियलिटी शो ‘बिग बॉस’ में लोगों को लुभा रहा है। रेखा के जन्मदिन पर जानते हैं उनकी कामयाबी के उन 10 पड़ावों के बारे में जिनमें उनके किरदारों ने दुनिया भर में खूब चर्चाएं बटोरीं।
Rekha Birthday: 10 कमाल किरदार और अदाकारी की लंबी रेखा, इस रोल के लिए मिला नेशनल फिल्म अवार्ड
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किरदार : रेखा रॉय
फिल्म : दो अनजाने (1976)
हिंदी में अपनी पहली फिल्म के बाद रेखा के पास ऑफर तो खूब आते थे लेकिन उन्हें किसी ऐसे ऑफर की तलाश थी जो उन्हें एक अभिनेत्री के तौर पर स्थापित कर सके, न कि एक प्रदर्शित होने वाली वस्तु के रूप में। लगातार अपनी भाषा, चाल ढाल और वजन पर काम करते हुए रेखा ने अपने ऊपर काफी हद तक उत्तर भारतीय लड़की का चोला ओढ़ लिया था। फिर उन्हें देखकर कहना मुश्किल था कि वह दक्षिण भारत के एक लड़की हैं। तब उन्हें मौका मिला अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'दो अनजाने' में काम करने का। दुलाल गुहा के निर्देशन में बनी यह फिल्म निहार रंजन गुप्ता के लिखे एक बंगाली उपन्यास ‘रात्रिर यात्री’ पर आधारित रही। इसमें रेखा का किरदार एक लालची पत्नी का था। यह पहली फिल्म थी जिसमें रेखा को अपने अभिनय के जौहर दिखाने का मौका मिला।
किरदार : आरती चंद्रा
फिल्म : घर (1978)
मानिक चटर्जी के निर्देशन में बनी यह फिल्म रेखा के करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इस फिल्म में रेखा ने एक नई दुल्हन का किरदार निभाया है जो अचानक से सामूहिक दुष्कर्म का शिकार होती है। इस फिल्म की पूरी कहानी रेखा के किरदार आरती के संघर्ष और उसके प्यार करने वाले पति के साथ जीवन निर्वहन करने में बीतती है। कहानी में आरती के पति का नाम विकास चंद्र है जिसका किरदार विनोद मेहरा ने निभाया है। इस फिल्म से पहले रेखा 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकी थीं लेकिन इस फिल्म में जो उन्होंने किया, उसे कोई नहीं भुला सका। इसके लिए रेखा के काम को खूब सराहना मिली। इसी फिल्म के लिए रेखा को पहली बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।
किरदार : जोहराबाई
फिल्म : मुकद्दर का सिकंदर (1978)
‘घर’ में खिंची रेखा को अपनी अदाकारी से रेखा ने एक बार फिर से अमिताभ बच्चन के साथ और लंबा किया फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ में। यहां उन्होंने एक वेश्या जोहरा का किरदार निभाया है। यह फिल्म उस साल की ही नहीं, बल्कि उस दशक की ही सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो गई। इसी के साथ रेखा भी हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी और सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं। एक वेश्या के किरदार में रेखा के अभिनय की समीक्षकों ने बहुत सराहना की। उनका यह किरदार दर्शकों को भी बहुत पसंद आया। अमिताभ बच्चन और रेखा के साथ इस फिल्म में राखी, विनोद खन्ना, अमजद खान, कादर खान, निरूपा रॉय, आदि कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। प्रकाश मेहरा की इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।
किरदार : मंजू दयाल
फिल्म : खूबसूरत (1980)
वर्ष 1973 में आई रेखा की फिल्म 'नमक हराम' से रेखा और निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी के बीच एक पिता और पुत्री जैसा रिश्ता पनप गया था। इन दोनों को साथ काम करने का दूसरा मौका इस फिल्म में मिला। यहां रेखा ने मंजू दयाल नाम का एक किरदार निभाया है। मंजू एक खुशमिजाज युवा लड़की है जो अपनी बहन की ससुराल कुछ दिन रहने के लिए जाती है। उसकी बहन की नई-नई शादी हुई है। उसका भरा पूरा परिवार है लेकिन लोग ज्यादा खुश नहीं रहते। मंजू इन लोगों में ही खुशियां फैलाने का काम करती है। एक इंटरव्यू के दौरान रेखा ने खुद कहा था कि इस तरह के चुलबुले किरदारों को वह आसानी से पकड़ लेती हैं। क्योंकि, उनका खुद का स्वभाव भी कुछ इसी तरह का रहा है। इस फिल्म में शानदार अभिनय के लिए रेखा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से नवाजा गया।