अपनी जादुई आवाज से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाले दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों और पद्मश्री से सम्मानित गायक हरिहरन देश की तकरीबन सभी भाषाओं में गा चुके हैं। खुद को खालिस बंबइया मानने वाले हरिहरन इस बात से दुखी दिखे कि विकीपीडिया ने उनकी मातृभूमि बदल दी है। अपने नए अलबम ‘मनमर्जी’ के सिलसिले में उन्होंने ‘अमर उजाला’ से ये खास मुलाकात की।
Hariharan Interview: मैं सौ फीसदी बंबइया हूं! लेकिन विकिपीडिया वाले हैं कि मेरी बात सुनते ही नहीं
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हरिहरन जी, आपके श्रोता ही नहीं बल्कि मुंबई फिल्म जगत के अधिकतर लोग भी आपका जन्म दक्षिण भारत में मानते हैं, ये गलतफहमी कैसे चली आ रही है?
मेरा जन्म तिरुवनंतपुरम, केरल में हुआ, यह गलत जानकारी इंटरनेट से फैली और फैलती ही जा रही है। लोग पीढ़ी दर पीढ़ी एक गलत जानकारी पर यकीन करते जा रहे हैं और इस बारे में विकिपीडिया मेरी बात सुनने को तैयार ही नहीं है। ये बोल बोलकर मैं थक चुका हूं कि इंटरनेट पर मेरे बारे में जो गलत जानकारी है उसे ठीक कर दें लेकिन विकिपीडिया वाले हैं कि मेरी बात सुनते ही नहीं। मैं सौ फीसदी बंबइया हूं (मुंबइया भी नहीं)। मेरा जन्म दादर में हुआ। माटुंगा के डॉन बॉस्को हाई स्कूल और सेंट जेवियर्स कॉलेज से मैंने पढ़ाई की है।
और, संगीत की पढ़ाई आपको घुट्टी के साथ मिली..
हां, जब से मैंने होश संभाला, संगीत ही सबसे पहले कानों में पड़ा। पिताजी (अनंत सुब्रमणि) शास्त्रीय गायक थे। उनसे मां (अलामेलू मणि) ने संगीत सीखा और मां से मैंने संगीत सीखा। मेरी मां संगीत पढ़ाती भी हैं। बहुत छोटा था तभी पिताजी हम सबको छोड़ गए। लेकिन, संगीत के जरिये वह हमारे जीवन में अब भी बने हुए हैं। मां ने संगीत की जो घुट्टी पिलाई, उसी ने मुझे उस्ताद गुलाम अली साहब तक पहुंचाया और बस तब से सफर जारी है..
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और इसी बीच आपने जीत लिया आल इंडिया सुर सिंगार कंपटीशन?
उन दिनों अखबार में एक विज्ञापन निकला था कि आल इंडिया सुर सिंगार प्रतियोगिता के लिए दो गाने रिकार्ड करके भेज सकते हैं। मैं और मेरे एक दोस्त घनश्याम वासवानी ने दो गाने रिकार्ड करके भेज दिए। घनश्याम वासवानी भी गायक थे। मेरे गाने की रिकॉर्डिंग उन्होंने की और उनके गाने की रिकॉर्डिंग मैने करके भेजी।
इसी कंपटीशन ने आपकी सिनेमा के लिए राह खोली होगी होगी?
सही कहा आपने। इस कंपटीशन के बाद ही सबसे पहले संगीतकार जयदेव ने मुझे साल 1977 में अपनी फिल्म 'गमन' में गाने का मौका दिया। ये किसी फिल्म के लिए गाया मेरा पहला गाना था। कुछ और फिल्मों में भी गाया उसके बाद लेकिन 80 के दशक की शुरुआत में ही मुझे गजलों ने अपनी तरफ खींच लिया। बस तभी से गजलें और फिल्मी दोनों के साथ मोहब्बत जारी है।