दुनिया के सबसे खूबसूरत पांच मर्दों में से एक हिंदी सिनेमा के बहुमुखी अभिनेता ऋतिक रोशन एक निर्देशक पिता राकेश रोशन के बेटे जरूर हैं, लेकिन स्टारडम उन्हें विरासत में नहीं मिला। 20 साल तक पर्दे के पीछे रहकर उन्होंने फिल्मी कलाकारों को देखकर, उनकी फिल्मों के सेट पर सफाई करके और उन्हें चाय पिलाकर अपने आप धीरे-धीरे तराश कर तैयार किया है। फिल्मों में मुख्य अभिनेता के तौर पर शुरुआत करने से पहले उन्होंने कई फिल्मों में गुमनाम रहकर काम किया और श्रेय तक नहीं मांगा।
बॉलीवुड में ऋतिक रोशन को पूरे हुए 20 साल, कैमरे के पीछे रहकर अभिनेता ने सीखे स्टारडम के गुण
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बचपन में ही ले लिया था अभिनेता बनने का फैसला
ऋतिक ने बहुत छोटी सी उम्र में ही अभिनेता बनने का निर्णय ले लिया था, लेकिन उनके पिता राकेश रोशन चाहते थे कि वह पहले अपनी पढ़ाई पूरी कर लें। ऋतिक अपने आप को दूसरों से अलग समझते थे, क्योंकि वह बढ़े हुए अंगूठे के साथ पैदा हुए थे। वह छह साल के थे तब तक हकलाते थे। स्कूल में उनके बोलने का मजाक न बने, इसलिए वह मौखिक परीक्षाओं से बीमारी का बहाना करके बचा करते थे। रोजाना की स्पीच थेरेपी ने उन्हें ठीक से बोलना सिखाया गया।
बाल कलाकार के रूप में किया 12 वर्ष की उम्र तक काम
ऋतिक के नाना जे ओम प्रकाश फिल्मों के बहुत बड़े निर्माता और निर्देशक थे। उन्होंने ही ऋतिक को पहली बार छह साल की उम्र में पर्दे पर उतारा। 1980 में जितेंद्र और रीना रॉय की फिल्म आशा आई जिसमें ऋतिक ने जितेंद्र के गाए हुए गाने पर डांस किया है। इसके लिए उनके नाना ने ऋतिक को मेहनताने के तौर पर 100 रूपये दिए। अपने पिताजी के निर्माण में बनी फिल्म 'आप के दीवाने' में ऋतिक ने रहीम के बचपन का किरदार निभाया था, जो कि उनके पिताजी का किरदार था। इसके बाद वह अपने नाना की फिल्म आस-पास के एक गीत 'शहर में चर्चा है' में नजर आए। जब वह 12 साल के हुए, तब उन्हें फिल्म भगवान दादा में पहला बोलता किरदार मिला। यह बाल कलाकार के रूप में उनकी आखिरी फिल्म है।
फिल्म के सेट पर लगाए झाड़ू और क्रू को पिलाई चाय
इसके बाद उन्होंने अपने पिता के साथ खुदगर्ज, किंग अंकल, करण अर्जुन और कोयला जैसी फिल्मों में सहायक निर्देशक बनकर काम किया। वह फिल्म के सेट पर झाड़ू लगाते और पूरे क्रू के लिए चाय बनाते। फिल्म कोयला के सेट पर रोजाना पैक अप होने के बाद वह शाहरुख के हिस्से का अभिनय करते और उसे खुद ही कैमरे से शूट करते, ताकि एक अभिनेता के रूप में वह खुद का फैसला कर सकें। इसी दौरान अभिनय के अध्यापक किशोर नमित कपूर से उन्होंने अभिनय का प्रशिक्षण भी लिया।
2000 में मिली सिनेमा में धमाकेदार एंट्री
अपने पिता के ही निर्देशन में बनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'कहो न...प्यार है' से ऋतिक ने हिंदी सिनेमा में धमाकेदार एंट्री ली और तहलका मचा दिया। इसी फिल्म से अमीषा पटेल ने भी हिंदी सिनेमा में कदम रखा है। यह फिल्म सुपरहिट हुई और इस फिल्म में धमाकेदार परफॉरमेंस के लिए ऋतिक रोशन को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और बेस्ट डेब्यू मेल का फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इसके बाद ऋतिक का कामयाबी का सिलसिला अब तक जारी है।